भीमा कोरेगांव हिंसा

दिल्ली हिंसा और भीमा-कोरेगांव मामले के जांच अधिकारियों को मिलेगा केंद्रीय गृहमंत्री का पदक

उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा और भीमा-कोरेगांव मामले की जांच करने वाले अधिकारियों सहित देशभर के 121 पुलिस अधिकारियों को जांच में उत्कृष्टता के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के पदक से नवाज़ा गया है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नानावती अस्पताल से वरवरा राव की स्वास्थ्य रिपोर्ट पेश करने को कहा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने वरवरा राव के परिवार के सदस्यों को मुंबई के नानावती अस्पताल में उनसे मिलने की मंज़ूरी दी है. 81 साल के राव तलोजा जेल में कोरोना संक्रमित होने के बाद से अस्पताल में भर्ती हैं.

वरवरा राव के परिवार ने की एनएचआरसी से अपील, अस्पताल से बीमार राव की जानकारी दिलवाएं

भीमा कोरेगांव मामले में 2018 से जेल में बंद 81 वर्षीय वरवरा राव को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद सेंट जॉर्ज अस्पताल से नानावती अस्पताल में शिफ्ट किया गया. परिजनों का कहना है कि अब अस्तपाल ने राव की स्थिति और इलाज संबंधी कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया है.

वरवरा राव ज़मानत के लिए अपनी उम्र और महामारी का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं: एनआईए

भीमा कोरेगांव हिंसा और एल्गार परिषद मामले में 2018 से जेल में बंद 81 साल के सामाजिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव में बीते हफ्ते कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है.

भीमा कोरेगांव: वरवरा राव के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में 2018 से जेल में बंद 81 साल के वरवरा राव के परिजनों ने बीते सप्ताह उनकी सेहत के बारे में चिंता जताते हुए जेल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था.

वरवरा राव को जेजे अस्पताल में भर्ती किया गया, कांग्रेस नेता ने रिहाई के लिए प्रधानमंत्री को लिखा

भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ़्तार 81 साल के कवि वरवरा राव के परिजनों द्वारा काफ़ी समय से उनके बीमार होने के बारे में कहा जा रहा था. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी रिहाई के मामले में हस्तक्षेप करने को कहा है.

बीमार वरवरा राव को जेल में रखने की इजाज़त नहीं देता क़ानून: सामाजिक कार्यकर्ता

इतिहासकार रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र सरकार और एनआईए को पत्र लिखकर अपील की है कि कवि वरवरा राव को जेल से जेजे अस्पताल में शिफ्ट किया जाए, जहां उन्हें उचित इलाज मिल सके. राव भीमा कोरोगांव हिंसा मामले में जेल में हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता वरवरा राव की जेल में तबियत बिगड़ी, जेल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ़्तार राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अगस्त, 2018 से जेल में बंद हैं. राव के परिवार का कहना है कि जेल विभाग उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी मुहैया नहीं करा रहा है.

गौतम नवलखा की साथी का आरोप, जेल में 35 क़ैदियों के साथ एक कमरे में क्वारंटीन किया गया

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ़्तार 67 साल के सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं. उनकी साथी ने एक चिट्ठी लिखकर बताया है कि कोरोना संक्रमण के दौर में जेल में अस्थाई क्वारंटीन के छह कमरों में 350 क़ैदियों को रखा गया है.

सामाजिक कार्यकर्ता जितने दिन जेल में रहेंगे, भारतीय जनतंत्र की आयु उसी अनुपात में घटती जाएगी

जेल में बंद वरवरा राव शुक्रवार शाम बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. महामारी के दौर में भी अदालत ने उन्हें वे रियायत देने की ज़रूरत नहीं समझी है, जो अन्य बुज़ुर्ग क़ैदियों को दी जाती हैं.

मुंबई जेल में बेहोश होने के बाद कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अस्पताल में भर्ती

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अगस्त, 2018 से जेल में बंद हैं. मामले की एक अन्य आरोपी सुधा भारद्वाज की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है.

गिरफ़्तारी से पहले तेलतुम्बड़े ने देश को लिखा- उम्मीद है आप अपनी बारी आने से पहले बोलेंगे

मैं देख रहा हूं कि मेरा भारत बर्बाद हो रहा है, इस तरह के डरावने क्षण में एक उम्मीद के साथ लिख रहा हूं. आज बड़े पैमाने पर उन्माद को बढ़ावा मिल रहा और शब्दों के अर्थ बदल दिए गए हैं, जहां राष्ट्र के विध्वंसक देशभक्त बन जाते हैं और लोगों की निस्वार्थ सेवा करने वाले देशद्रोही.

आत्मसमर्पण से पहले बोले गौतम नवलखा- निर्दोष साबित होने से पहले आरोपी को दोषी मानना नया चलन

भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने यूएपीए कानून की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे कानून सामान्य न्याय की अवधारणा को बर्बाद कर देते हैं.

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा: यह इस वक़्त की सबसे ग़ैर-ज़रूरी और बेतुकी गिरफ़्तारी है

आनंद और गौतम या शोमा और सुधा का अर्थ है लगातार बहस. वह बहस जनतंत्र के शरीर में रक्त संचार की तरह है. उसके रुकने का मतलब जनतंत्र का मरना है. फिर क्या हम और आप ज़िंदा रह जाते हैं?

तेलतुम्बड़े, नवलखा के सरेंडर को लेकर सीजेआई को पत्र लिख कार्यकर्ताओं ने कहा- ये बेहद अमानवीय

सीजेआई एसए बोबडे को लिखे पत्र में इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमें इस बात की पीड़ा है कि हमारी अदालतों ने उन लोगों को निरंतर कारावास की सज़ा दी है, जिन्होंने बे-आवाज़ और हाशिये के लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की हिम्मत की है.