मराठवाड़ा

महाराष्ट्र: सरकारी रिपोर्ट में मराठवाड़ा के किसानों के लिए 2,904 करोड़ के मुआवजे की सिफारिश

महाराष्ट्र सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया कि बेमौसम बरसात से 44,33,549 किसान प्रभावित हुए और आठ जिलों में 41,49,175 हेक्टेयर जमीन पर फसल बर्बाद हुई.

महाराष्ट्र: बारिश से फसल बर्बाद, मराठवाड़ा में चार दिन में दस किसानों ने आत्महत्या की

मध्य महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश के चलते सोयाबीन, ज्वार, मक्का और कपास जैसी खरीफ की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है.

गलत पूर्वानुमान के लिए मराठवाड़ा के किसानों ने मौसम विभाग के ख़िलाफ़ पुलिस में की शिकायत

किसानों का आरोप है कि पुणे और मुंबई में मौसम विभाग के अधिकारियों ने बीज और कीटनाशक विनिर्माता कंपनियों के साथ गठजोड़ कर किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है क्योंकि किसान भविष्यवाणियों के आधार पर ही बुआई करते हैं.

Nanded: A protester is carried away after being injured during a protest rally demanding reservation for Marathis, in Nanded on Tuesday, July 24, 2018. Maratha outfits have called for a bandh in Maharashtra a day after of a protestor demanding reservation for the community jumped off a bridge over Godavari river and died, in Aurangabad. (PTI Photo) (Story no BOM12)(PTI7_24_2018_000217B)

मराठा आरक्षण आंदोलन में एक और प्रदर्शनकारी की मौत, सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदायों की ओर से बुलाए गए बंद में बुधवार को हुई हिंसा में घायल एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसने दम तोड़ दिया है.

Nanded: A protester is carried away after being injured during a protest rally demanding reservation for Marathis, in Nanded on Tuesday, July 24, 2018. Maratha outfits have called for a bandh in Maharashtra a day after of a protestor demanding reservation for the community jumped off a bridge over Godavari river and died, in Aurangabad. (PTI Photo) (Story no BOM12)(PTI7_24_2018_000217B)

एक व्यक्ति की आत्महत्या के बाद मराठा आंदोलन हुआ हिंसक, एक कॉन्स्टेबल की मौत

महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को दो अन्य युवकों ने भी जान देने की कोशिश की. बुधवार को मुंबई बंद रखने का आह्वान. औरंगाबाद के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट सेवा बंद.

महाराष्ट्र में मई के ​आख़िर तक 1092 किसान ने की आत्महत्या

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के क्षेत्र विदर्भ में सबसे ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या की है. पिछले पांच महीने में विदर्भ में 504 किसानों ने आत्महत्या की.

महाराष्ट्र के कई गांवों में विश्व की ‘सबसे बड़ी रिफाइनरी परियोजना’ का विरोध क्यों हो रहा है

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार कोंकण की 720 किलोमीटर लंबी तट रेखा एक विशालकाय रिफाइनरी के लिए आदर्श जगह है. 15,000 एकड़ के क्षेत्र में प्रस्तावित इस रिफाइनरी पर काम शुरू होने की स्थिति में 17 गांवों के किसानों और मछुआरों का विस्थापन तय है.

महाराष्ट्र में तीन साल में 10,000 किसानों ने ख़ुदकुशी की: विपक्ष

राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र के आठ जिलों में जनवरी से अब तक 907 किसानों ने क़र्ज़ और फ़सल ख़राब होने के चलते आत्महत्या कर ली.

किसान आत्महत्याएं जारी, क़र्ज़ से आज़ादी मांगने दिल्ली पहुंचे किसान

मध्य प्रदेश के न​रसिंहपुर ज़िले में क़र्ज़ से परेशान 22 वर्षीय किसान ने की ख़ुदकुशी. तमिलनाडु के किसानों ने कहा, शुरू करेंगे तीसरे दौर का प्रदर्शन.

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में जनवरी से अब तक 814 किसानों ने आत्महत्या की

महाराष्ट्र में गन्ना आंदोलन हिंसक हुआ, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में तीन किसानों ने की खुदकुशी, नीमच में उपज का दाम कम मिला तो किसान ने उपज को आग लगाई.

A farmer shows wheat crop damaged by unseasonal rains in his wheat field at Sisola Khurd village in the northern Indian state of Uttar Pradesh, March 24, 2015. To match Insight INDIA-MODI/ Picture taken March 24, 2015. REUTERS/Anindito Mukherjee

मराठवाड़ा के एमए पास किसान समेत तीन ने की आत्महत्या

मराठवाड़ा के नांदेड ज़िले का एक अन्य किसान क़र्ज़ की वजह से परेशान था, वहीं ओडिशा में आत्महत्या करने वाले किसान की फसल ख़राब हो गई थी.

गलत पूर्वानुमान पर मराठवाड़ा के किसानों ने मौसम विभाग के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई

किसानों का कहना है कि पुणे और कोलाबा मौसम विभाग के अधिकारियों की बीज और कीटनाशक निर्माताओं से सांठगांठ के चलते उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है.

भारत कृषिप्रधान देश या किसानों की क़ब्रगाह?

नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में कहते थे कि देश के संसाधनों पर पहला हक़ ग़रीबों और किसानों का है, लेकिन उनके कार्यकाल में किसान आत्महत्या की दर बढ़ गई.