मुसलमानों के खिलाफ नफरत

ओंटारियो में पाकिस्तानी परिवार की हत्या की जगह पर बनाया गया अस्थायी मेमोरियल. (फोटो: रॉयटर्स)

घृणा और हिंसा के प्रति समाज के रवैये से उसकी सभ्यता का स्तर मालूम होता है

मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा सिर्फ भारत में नहीं है. यह एक प्रकार की विश्वव्यापी बीमारी है और यह कनाडा में भी पाई जाती है. लेकिन इस हिंसा पर समाज, सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया क्या है, कनाडा और भारत में यही तुलना का संदर्भ है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

क्या हिंदू समाज हत्यारों का साझीदार हुआ?

यह भारत का सामाजिक स्वभाव बनता जा रहा है कि मुसलमानों को खुलेआम मारा जा सकता है, उनके ख़िलाफ़ हिंसक प्रचार किया जा सकता है और पुलिस-प्रशासन से लेकर राजनीतिक दलों तक कोई भी इसे गंभीर मामला मानने को तैयार नहीं.

(प्रतीकात्मक फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

मुस्लिमों के उत्पीड़न की वजह अब ध्रुवीकरण नहीं, उन्हें अपमानित ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर करना है

देश के नेता विगत कोई बीस सालों के अथक प्रयास से समाज का इतना ध्रुवीकरण पहले ही कर चुके हैं कि आने वाले अनेक वर्षों तक उनकी चुनावी जीत सुनिश्चित है. फिर कुछ लोग अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और उन्हें अपमानित करने के लिए जोशो-ख़रोश से क्यों जुटे हुए हैं?

(प्रतीकात्मक  फोटो: पीटीआई)

भारतीय मुसलमानों की विडंबना: हुए अपने ही घर में पराये

जिस तरह देश में सांप्रदायिक वैमनस्य बढ़ रहा है, उससे मुसलमानों के निराश और उससे कहीं ज़्यादा भयग्रस्त होने के अनेकों कारण हैं. समाज एक ‘बाइनरी सिस्टम’ से चलाया जा रहा है. अगर आप बहुसंख्यकवाद से सहमत हैं तो देशभक्त हैं, नहीं तो जिहादी, शहरी नक्सल या देशद्रोही, जिसकी जगह जेल में है या देश से बाहर.

(फोटो: रॉयटर्स)

अभिव्यक्ति की आज़ादी और मानवीय गरिमा में संतुलन को लेकर चिंतित: सुप्रीम कोर्ट

सुदर्शन टीवी के विवादित कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में अदालत के मीडिया नियमन के प्रस्ताव पर केंद्र ने एक हलफनामे में कहा है कि अगर वे इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के लिए दिशानिर्देश देना ज़रूरी समझते हैं, तो समय की दरकार है कि ऐसा पहले डिजिटल मीडिया के लिए किया जाना चाहिए.

(फोटो साभार: ट्विटर/@@SureshChavhank)

सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम को मुस्लिमों को बदनाम करने की कोशिश कहा, लगाई रोक

सुदर्शन न्यूज़ के बिंदास बोल कार्यक्रम के ‘नौकरशाही जिहाद’ एपिसोड के प्रसारण को रोकते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत होने के नाते यह कहने की इजाज़त नहीं दे सकते कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं. और यह नहीं कहा जा सकता कि पत्रकार को ऐसा करने की पूरी आज़ादी है.

(साभार: सुदर्शन न्यूज़/वीडियोग्रैब)

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने दी ‘यूपीएससी जिहाद’ वाले कार्यक्रम के प्रसारण की इजाज़त, अदालत ने भेजा नोटिस

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को सुदर्शन न्यूज़ के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के विवादित नौकरशाही जिहाद वाले एपिसोड के प्रसारण की अनुमति दी थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने इसके ख़िलाफ़ दायर हुई याचिका पर मंत्रालय से जवाब मांगा है.

(साभार: सुदर्शन न्यूज़/वीडियोग्रैब)

सुदर्शन न्यूज़ के नफ़रत भरे प्रचार की निंदा करना ही काफ़ी नहीं है

नेताओं की हेट स्पीच, सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों के ज़रिये समाज में कट्टरता और नफ़रत भरे विचारों को बिल्कुल सामान्य तौर पर परोसा जा रहा है और ऐसा करने वालों में सुरेश चव्हाणके अकेले नहीं हैं.

(साभार: सुदर्शन न्यूज़/वीडियोग्रैब)

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज़ के ‘नौकरशाही जिहाद’ कार्यक्रम पर रोक लगाई

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके के शो ‘बिंदास बोल’ के विवादित ‘यूपीएससी जिहाद’ एपिसोड पर रोक लगा दी है. इसका प्रसारण 28 अगस्त को रात आठ बजे होना था.

(साभार: सुदर्शन न्यूज़/वीडियोग्रैब)

यूपीएससी जिहाद ट्रेलर: जामिया मिलिया ने की सुदर्शन न्यूज़ के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग

सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके अपने शो ‘बिंदास बोल’ के विवादित ट्रेलर में ‘जामिया के जिहादी’ शब्द कहते नज़र आ रहे हैं. जामिया का कहना है कि उन्होंने न सिर्फ यूनिवर्सिटी और एक समुदाय की छवि धूमिल करने की कोशिश की, बल्कि यूपीएससी की प्रतिष्ठा भी ख़राब करने का प्रयास किया है.

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सुदर्शन टीवी को मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का लाइसेंस किसने दिया?

वीडियो: समाचार चैनल सुदर्शन न्यूज़ ने गुरुवार को 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले अपने एक शो का ट्रेलर जारी किया है. इसमें चैनल के एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाणके ‘नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा खुलासा’ करने का दावा कर रहे हैं. इस मुद्दे पर ‘सत्य हिंदी’ के संपादक आशुतोष और केरल के पूर्व डीजीपी से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

Ghaziabad: A vendor sells vegetables at the sealed KDP society, identified as a COVID-19 hotspot, during the nationwide lockdown to curb the spread of coronavirus, in Ghaziabad, Friday, April 10, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI10-04-2020_000158B)

कोरोना वायरस: मुस्लिम सब्ज़ी वाले से आधार कार्ड मांगा गया, हिंदुओं के ठेले पर भगवा झंडा लगाया

कोरोना वायरस संकट के बीच मुसलमानों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफ़रत की वजह से उनके साथ भेदभाव के कई मामले सामने आए हैं.