राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: विकिपीडिया)

कोविड-19 के कारण 30,000 से अधिक बच्चों ने अपने माता या पिता या फ़िर दोनों को खोया: एनसीपीसीआर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोविड-19 के कारण माता-पिता में से किसी एक या फ़िर दोनों को खोने वाले बच्चों में 15,620 लड़के, 14,447 लड़कियां और चार ट्रांसजेंडर शामिल हैं. इनमें से अधिकतर बच्चे आठ से 13 आयु वर्ग के हैं. महाराष्ट्र में ऐसे बच्चों की संख्या सर्वाधिक है. इसके बाद उत्तर प्रदेश में और राजस्थान हैं.

(फोटो: पीटीआई)

कोरोना के दौरान अनाथ हुए बच्चों को अवैध तरीके से गोद लेने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना काल में अभिभावक को खोने वाले या बेसहारा, अनाथ हुए बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि अनाथ बच्चों को गोद लिए जाने का आमंत्रण देना कानून के प्रतिकूल है, क्योंकि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण की भागीदारी के बिना गोद लेने की अनुमति नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड के कारण नौ हज़ार से अधिक बच्चे बेसहारा, अनाथ हुए: एनसीपीसीआर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 29 मई तक राज्यों की ओर से प्रदान किए गए आंकड़ों के मुताबिक 9,346 ऐसे बच्चे है, जो कोरोना महामारी के कारण बेसहारा और अनाथ हो गए हैं या फिर अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया है. ऐसे सबसे ज़्यादा 2,110 बच्चे उत्तर प्रदेश में हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: विकिपीडिया)

यह कल्पना नहीं कर सकते कि कोविड-19 के कारण कितने बच्चे अनाथ हुए हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने कहीं पढ़ा था कि महाराष्ट्र में 2,900 से अधिक बच्चों ने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता में से किसी एक को या दोनों को खो दिया है. हमारे पास ऐसे बच्चों की सटीक संख्या नहीं है. न्यायालय ने कहा कि ऐसे बच्चों के साथ सड़कों पर भूख से तड़प रहे बच्चों की देखभाल करने का निर्देश राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकारियों को दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

बिहारः बच्चों को सीएए-एनआरसी के बारे में पढ़ाने पर दो स्वयंसेवी समूहों पर राजद्रोह का मामला दर्ज

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद दो स्वयंसेवी संस्थाओं के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. एनसीपीसीआर ने कहा कि उन्होंने निरीक्षण के दौरान कुछ छात्रों के होमवर्क रजिस्टर देखें, जिनसे पता चला कि उन्हें ग़लत तरीके से सीएए और एनआरसी के बारे में बताया गया है.

(फोटो साभार: पिक्साबे)

फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं: बाल अधिकार आयोग प्रमुख

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, वॉट्सऐप और यूट्यूब को भारत में व्यवसाय करना है तो बच्चों के अधिकार के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, अन्यथा इनको इस तरह से चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

(फोटो साभार: फेसबुक)

बाल संरक्षण आयोग ने नेटफ्लिक्स से ‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्ट्रीमिंग रोकने के लिए कहा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास शिकायत आई थी कि नेटफ्लिक्स पर प्रसारित वेब सीरीज बॉम्बे बेगम्स में दिखाया गया है कि नाबालिगों का यौन गतिविधि और मादक पदार्थों के सेवन में संलिप्त होना आम बात है.

(फोटोः पीटीआई)

यौन उत्पीड़न पर बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करे महाराष्ट्र सरकार: एनसीपीसीआर

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के एक बच्ची के यौन उत्पीड़न के लिए पॉक्सो और आईपीसी के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को पॉक्सो से बरी करने के फ़ैसले को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने ख़तरनाक बताया है, वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि वे इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा.

Deoria: A view of the shelter home from where twenty-four girls were rescued after allegation of sexual exploitation of the inmates came to light, prompting the Uttar Pradesh government to swing into a damage control mode by removing the district magistrate and ordering a high-level probe, in Deoria on Monday, Aug 6, 2018. (PTI Photo) (Story no. DEL23)(PTI8_6_2018_000256B)

क़रीब 40 प्रतिशत बाल गृहों में बच्चों को प्रताड़ना से बचाने की व्यवस्था नहीं: रिपोर्ट

साल 2018 में उत्तर प्रदेश के देवरिया और बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित बाल गृहों में यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद सरकार ने देश के सभी बाल गृहों की सामाजिक ऑडिट करने का आदेश दिया था. ऑडिट किए गए 7,163 बाल गृहों में से 1,504 में अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है, जबकि 434 के शौचालयों और स्नानगृह में निजता की व्यवस्था नहीं है.

मोहम्मद ज़ुबैर. (फोटो साभार: ट्विटर/@zoo_bear)

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक को राहत, अदालत ने कहा कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे पुलिस

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर द्वारा ऑनलाइन बहस के दौरान एक नाबालिग बच्ची की ब्लर की हुई तस्वीर पोस्ट करने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर उनके ख़िलाफ़ आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मोहम्मद ज़ुबैर. (फोटो साभार: ट्विटर/@zoo_bear)

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक के ख़िलाफ़ केस दर्ज

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने ट्विटर पर एक शख़्स के साथ हुई बहस में शख़्स की नाबालिग बेटी की ब्लर की हुई तस्वीर पोस्ट की थी. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की शिकायत पर इनके ख़िलाफ़ आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

लॉकडाउनः चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च बढ़ने पर बाल आयोग ने गूगल, ट्विटर, व्हाट्सएप को नोटिस भेजा

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने आईसीपीएफ नामक संस्था की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए गूगल, व्हाट्सएप और ट्विटर को नोटिस भेजकर 30 अप्रैल तक जवाब मांगा है.

New Delhi: Protestors participate in a demonstration against Citizenship (Amendment) Act and NRC at  Shaheen Bagh in New Delhi, Friday, Jan. 10, 2020. The Delhi High Court today refused to entertain a plea seeking directions for removal of demonstrators in order to clear road blockages that are causing traffic congestions at the DND route. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI1_10_2020_000225B) *** Local Caption ***

शाहीन बाग के प्रदर्शन में मौजूद बच्चों की काउंसिलिंग की जाए: बाल संरक्षण आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के ज़िलाधिकारी को आदेश जारी कर कहा है कि संभव है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे बच्चों को अफवाहों और ग़लत जानकारी के कारण मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा हो. आयोग के अनुसार, ज़रूरत पड़ी तो उनके माता-पिता को भी काउंसिलिंग के लिए भेजा जाएगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

झारखंड और बिहार के अभ्रक खदान क्षेत्र में पांच हजार बच्चे शिक्षा से दूर, अनेक बाल मजदूर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा झारखंड और बिहार के अभ्रक खदान वाले इलाकों में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर किए गए सर्वेक्षण में ये खुलासा हुआ है.

FILE PHOTO: Bottles of Johnson's baby powder and Johnson's baby shampoo are displayed in a store in New York City, U.S., January 22, 2019. REUTERS/Brendan McDermid/File Photo

जॉनसन एंड जॉनसन बेबी शैम्पू में घातक रसायन, कंपनी को अपना उत्पाद बाज़ार से वापस लेने का आदेश

राजस्थान की एक सरकारी प्रयोगशाला में जांच के दौरान ‘जॉनसन एंड जॉनसन’ कंपनी के शैम्पू में हानिकारक रसायन पाए गए थे, जिसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बेबी शैम्पू और पाउडर के सैंपलों का परीक्षण करने को कहा था.