रोना विल्सन

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तार 16 आरोपी (फोटोः द वायर)

अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भारत सरकार को लिखा, भीमा कोरेगांव मामले के बंदियों को फ़ौरन रिहा करें

शिक्षाविदों, यूरोपीय संघ के सांसदों, नोबेल पुरस्कार विजेताओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भारतीय जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की दयनीय स्थिति और उचित मेडिकल देखरेख न होने पर चिंता जताते हुए कहा है कि उन्हें कोरोना वायरस के नए और अधिक घातक स्ट्रेन से संक्रमित होने का गंभीर ख़तरा है.

भीमा कोरेगांव और एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ता. (फोटो: द वायर)

एल्गार परिषद: परिजनों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग की

भीमा-कोरेगांव हिंसा और एल्गार परिषद सम्मेलन के संबंध में साल 2018 से अब तक 15 अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है. इनके परिजनों ने कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए इनकी रिहाई की मांग करते हुए कहा है कि ये सभी लोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और उनमें से एक कार्यकर्ता को कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है.

रोना विल्सन.

एल्गार परिषद: एनआईए ने कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर को हैक करने से इनकार किया

भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर से मिले पत्रों के आधार पर विल्सन समेत पंद्रह कार्यकर्ताओं पर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए थे. इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की जांच करने वाले अमेरिकी फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग का कहना है कि इन्हें एक साइबर हमले में विल्सन के लैपटॉप में डाला गया था.

शोमा सेन. (फोटो साभार: फेसबुक)

भीमा-कोरेगांवः यूएपीए के ख़िलाफ़ कार्यकर्ता शोमा सेन बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचीं

भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़े एलगार परिषद मामले में आरोपी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता शोमा सेन ने कहा है कि उनके खिलाफ मामला इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर तैयार किया गया था, जिसे एनआईए ने कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर से बरामद होने का दावा किया था. उन्होंने कहा​ कि उनके ख़िलाफ़ इकट्ठा किए गए सबूत फ़र्ज़ी हैं और उन्हें प्लांट किया गया है.

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भीमा कोरेगांव: क्या रोना विल्सन के कंप्यूटर में प्लांट किए गए थे उन्हें आरोपी ठहराने वाले पत्र

वीडियो: भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले में आरोपियों के वकील ने दावा किया है कि आरोपियों में से एक रोना विल्सन के लैपटॉप से बरामद कथित साजिश के मेल खुद उन्होंने नहीं लिखे थे बल्कि इन्‍हें प्लांट करवाया गया था. क्या है यह पूरा मामला, बता रहे हैं मुकुल सिंह चौहान.

रोना विल्सन. (फोटो: यूट्यूब/पिक्साबे)

रोना विल्सन के लैपटॉप में प्लांट किए गए थे ‘आपराधिक’ पत्र: यूएस डिजिटल फॉरेंसिक फर्म

एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन के कंप्यूटर से मिले पत्रों के आधार पर विल्सन समेत पंद्रह कार्यकर्ताओं पर विभिन्न गंभीर आरोप लगाए गए थे. अब मामले के इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की जांच करने वाले अमेरिकी फर्म का कहना है कि इन्हें एक साइबर हमले में विल्सन के लैपटॉप में डाला गया था.

वरवर राव. (फोटो साभार: फेसबुक/@VaravaraRao)

सामाजिक कार्यकर्ता जितने दिन जेल में रहेंगे, भारतीय जनतंत्र की आयु उसी अनुपात में घटती जाएगी

जेल में बंद वरवरा राव शुक्रवार शाम बेहोश हो गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया. महामारी के दौर में भी अदालत ने उन्हें वे रियायत देने की ज़रूरत नहीं समझी है, जो अन्य बुज़ुर्ग क़ैदियों को दी जाती हैं.

तेलुगू कवि वरवरा राव. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई जेल में बेहोश होने के बाद कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अस्पताल में भर्ती

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार राजनीतिक कार्यकर्ता और कवि वरवरा राव अगस्त, 2018 से जेल में बंद हैं. मामले की एक अन्य आरोपी सुधा भारद्वाज की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है.

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

तेलतुम्बड़े, नवलखा के सरेंडर को लेकर सीजेआई को पत्र लिख कार्यकर्ताओं ने कहा- ये बेहद अमानवीय

सीजेआई एसए बोबडे को लिखे पत्र में इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि हमें इस बात की पीड़ा है कि हमारी अदालतों ने उन लोगों को निरंतर कारावास की सज़ा दी है, जिन्होंने बे-आवाज़ और हाशिये के लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की हिम्मत की है.

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: गौतम नवलखा और आनंद तेल्तुम्बड़े को एक हफ्ते में समर्पण करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट में नागरिक अधिकारी कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बड़े के वकील की ओर से कहा गया है कि दोनों पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें समर्पण करने के लिए अधिक समय की ज़रूरत है.

आनंद तेलतुम्बड़े और गौतम नवलखा. (फोटो साभार: फेसबुक/विकिपीडिया)

भीमा-कोरेगांव हिंसा: गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बड़े की अग्रिम जमानत याचिका ख़ारिज

भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में सप्रीम कोर्ट की पीठ ने नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं गौतम नवलखा और आनंद तेल्तुम्बड़े को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा है. दोनों को अपने पासपोर्ट तत्काल जमा कराने का भी निर्देश दिया गया है.

गौतम नवलखा (फोटो: यूट्यूब)

भीमा कोरेगांव: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबडे की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद के कथित माओवादी संपर्क मामले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी ताकि वे सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें.

माओवादियों से संबंध और प्रधानमंत्री की हत्या की साज़िश के आरोप में गिरफ्तार किए गए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन महेश राउत और रोना विल्सन. (बाएं से दाएं)

भीमा कोरेगांव: एनआईए ने एफआईआर से राजद्रोह के आरोप हटाए, यूएपीए के तहत 11 पर मामला दर्ज

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच एनआईए को सौंपे जाने के बाद एजेंसी द्वारा दर्ज प्राथमिकी में इस मामले में गिरफ़्तार नौ सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा और प्रोफेसर आनंद तेलतुम्बड़े को भी आरोपी बनाया गया है.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार. (फोटो: पीटीआई)

एल्गार परिषद में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी गलत, पुलिस कार्रवाई की एसआईटी से जांच हो: पवार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, ‘राजद्रोह के आरोप में कार्यकर्ताओं को जेल भेजना गलत है. लोकतंत्र में अपनी असहमति का सख्ती से विरोध दर्ज कराने की इजाजत है. यह पुलिस आयुक्त और कुछ अधिकारियों द्वारा शक्ति का दुरुपयोग है.’

Mumbai: Dalit groups protesting at Thane railway station during the Maharashtra Bandh on Wednesday following clashes between two groups in Bhima Koregaon near Pune, in Mumbai. PTI Photo(PTI1_3_2018_000115B)

भीमा-कोरेगांव: एनसीपी नेताओं ने कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाने की मांग की

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे लिखे पत्र में एनसीपी नेता और विधायक धनंजय मुंडे ने दावा किया कि राज्य की पिछली देवेंद्र फड़णवीस सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत भीमा-कोरेगांव घटनाक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ ‘झूठे’ मामले दर्ज किए थे.