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लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के फैसले का मूल्यांकन करना अदालत का काम नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही 17 साल की लड़की और 20 साल के लड़के को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर भारत में ख़ासकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाएं होती रहती हैं, ऐसे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी राज्य की है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

हाईकोर्ट के लिव-इन संबंध को अस्वीकार्य बताने के बाद शीर्ष अदालत से युवक-युवती को मिली सुरक्षा

पिछले महीने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युवक-युवती को सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह नैतिक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं है. शीर्ष अदालत ने इस आदेश को ख़ारिज करते हुए पुलिस से याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा देने को कहा है.

लिव-इन रिलेशनशिप की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ रही, क़ानून में इस पर प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट

इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ही दो अन्य पीठों ने लिव-इन रिलेशनशिप के ख़िलाफ़ फैसला दिया था और प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के संबंध सामाजिक और नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं.

लिव-इन रिलेशनशिप नैतिक और सामाजिक रूप से अस्वीकार्य: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का यह रुख़ ऐसे रिश्तों को मान्यता देने वाले उच्चतम न्यायालय के रुख़ से अलग है. उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मई 2018 में कहा था कि वयस्क जोड़े को शादी के बगैर भी साथ रहने का अधिकार है. न्यायालय ने कहा था कि एक महिला चुन सकती है कि वह किसके साथ रहना चाहती है.

शादी के झूठे वादे के आधार पर यौन संबंध बनाने संबंधी क़ानून में संशोधन की ज़रूरत: अदालत

एक सुनवाई के दौरान ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस एसके पाणिग्रही ने कहा कि आईपीसी की धारा 375 के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि कौन-सी परिस्थिति में ‘सहमति’ को ‘असहमति’ के तौर पर दर्ज किया जाता है, लेकिन इस धारा में उल्लिखित परिस्थितियों में विवाह के वादे पर बने यौन संबंध शामिल नहीं हैं. इसे लेकर दोबारा सोचने की ज़रूरत है.

जीवनसाथी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना मानसिक क्रूरता के समान: उच्चतम न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने एक सैन्य अधिकारी को उसकी पत्नी से तलाक़ की मंज़ूरी दे दी. सैन्य अधिकारी ने एक सरकारी कॉलेज में शिक्षक पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाकर तलाक मांगा था. दोनों की शादी 2006 में हुई थी. वे कुछ महीने तक साथ रहे, लेकिन शादी की शुरुआत से ही उनके बीच मतभेद उत्पन्न हो गए और वे 2007 से अलग रहने लगे थे.

गुजरात: दलित व्यक्ति की बारात में शामिल लोगों पर पथराव, नौ के ख़िलाफ़ प्राथमिकी

गुजरात के अरवल्ली ज़िले का मामला है. पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बारात में शामिल दलित पुरुषों और महिलाओं के परंपरागत साफा पहनने पर आपत्ति जताई थी. राजपूत समुदाय के नौ लोगों के ख़िलाफ़ दंगा, हमला, आपराधिक धमकी देने और एससी/एसटी एक्ट के तहत के तहत मामला दर्ज किया गया है.

अपनी पसंद का साथी चुनना मौलिक अधिकार, धर्म इसमें आड़े नहीं आ सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि हम ये समझने में असमर्थ हैं कि जब क़ानून दो व्यक्तियों, चाहे वो समलैंगिक ही क्यों न हों, को साथ रहने की अनुमति देता है, तो फिर न तो कोई व्यक्ति, न ही परिवार और न ही सरकार को दो लोगों के संबंधों पर आपत्ति होनी चाहिए, जो अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं.

सिर्फ़ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहींः इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक विवाहित दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आग्रह किया था कि परिवार वालों द्वारा उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने पर रोक लगाने के लिए निर्देश दिए जाएं.

मध्य प्रदेश: दलित दूल्हे के घोड़े पर बैठने को लेकर हुई मारपीट, मामला दर्ज

मामला छतरपुर ज़िले के छापरा गांव का है, जहां दलित समुदाय के एक युवक को उसकी बारात से पहले घोड़े पर बैठकर पूजा के लिए जाने से रोका गया. चार सवर्ण युवकों ने उसे घोड़े से उतारने का प्रयास करते हुए जातिगत टिप्पणियां और मारपीट की. साथ ही, पुलिस से शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी.

यूनीफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा भी बोगस निकला

यूनीफॉर्म सिविल कोड के नाम पर चैनलों और अखबारों में कितनी बहस चलाई गई और मुसलमानों के प्रति नफ़रत का वट वृक्ष खड़ा किया जाता रहा. इस डिबेट में पहले भी कुछ नहीं था, अब भी कुछ नहीं है.

महिलाओं के लिहाज़ से भारत विश्व में सबसे ख़तरनाक देश: सर्वे

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सर्वे में 193 देशों को शामिल किया गया था, जिनमें से महिलाओं के लिए बदतर शीर्ष 10 देशों का चयन किया गया. सूची में युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया दूसरे और तीसरे, सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर है.

औरत का मुसलमान होना भी औरत होने की तरह ही ख़तरनाक है…

औरत सिर्फ़ औरत हो तो शायद उसके हिस्से का अज़ाब कट जाए, लेकिन वो औरत के साथ मुसलमान भी हो तो अपने अज़ाब के साथ कटती ही नहीं, मरती है और मरती रहती है.

विराट कोहली ने भारत में पैसा कमाया, शादी इटली में की, वे राष्ट्रभक्त नहीं हैं: भाजपा विधायक

विराट और अनुष्का के इटली में शादी करने पर भाजपा विधायक ने उठाया सवाल, बोले- भारत की भूमि का विराट के लिए कोई मान नहीं है.