शिशु मृत्यु दर

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

मध्य प्रदेश में शिशु मृत्यु दर सबसे ज़्यादा, केरल में सबसे कम: रिपोर्ट

भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के नए आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक के दौरान भारत में शिशु मृत्यु दर में मामूली सुधार हुआ है, 2017 में यह प्रति हज़ार पर 33 थी जो 2018 में 32 हो गई है.

(फोटो: पीटीआई)

क्या सरकार बच्चों और महिलाओं को भूखे-कमज़ोर रखकर भारत को आत्मनिर्भर बना सकती है?

लैंसेट के अध्ययन के अनुसार कोविड का मातृत्व मृत्यु और बाल मृत्यु दर पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. इसके अनुसार भारत में छह महीनों में 3 लाख बच्चों की कुपोषण और बीमारियों से 14 हज़ार से अधिक महिलाओं की प्रसव पूर्व या इसके दौरान मृत्यु हो सकती है. हालांकि वित्तमंत्री द्वारा घोषित 20.97 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर पैकेज में कुपोषण और मातृत्व हक़ के लिए एक रुपये का भी आवंटन नहीं किया गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

भारत में पांच साल तक के 68 फीसदी बच्चों की मौत की वजह जच्चा-बच्चा का कुपोषण: रिपोर्ट

इंडिया स्टेट लेवल डिज़ीज बर्डन इनिशिएटिव नामक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2000 से भारत में पांच साल की उम्र तक के बच्चों में मृत्यु दर 49 प्रतिशत घटी है, लेकिन राज्यों के बीच इसमें छह गुना तक और ज़िलों में 11 गुना तक अंतर है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

आर्थिक असमानता लोगों को मजबूर कर रही है कि वे बीमार तो हों पर इलाज न करा पाएं

सबसे ग़रीब तबकों में बाल मृत्यु दर और कुपोषण के स्तर को देखते हुए यह समझ लेना होगा कि लोक सेवाओं और अधिकारों के संरक्षण के बिना न तो ग़ैर-बराबरी ख़त्म की जा सकेगी, न ही भुखमरी, कुपोषण और बाल मृत्यु को सीमित करने के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा.

(फोटो :पीटीआई)

नीति आयोग के सीईओ ने कहा, बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कारण भारत पिछड़ा बना हुआ है

अमिताभ कांत ने कहा कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य के हाल बेहाल हैं. यही वे क्षेत्र हैं जिनमें भारत पिछड़ रहा है. पांचवीं कक्षा का छात्र दूसरी कक्षा के जोड़-घटाव नहीं कर पाता है. शिशु मृत्यु दर बहुत ज़्यादा है.

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पौराणिक काल में दो मामा कंस और शकुनि थे, वर्तमान में एक ‘मामा’ मध्य प्रदेश में हैं: कांग्रेस

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने मध्य प्रदेश में बलात्कार, कुपोषण, बाल मृत्यु दर, किसान आत्महत्या और भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी से संबंधित आंकड़े पेश करते हुए शिवराज सरकार पर निशाना साधा है.

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प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की शर्तें उसे महिला विरोधी बनाती हैं

बेस्ट ऑफ 2018: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत दी गई पात्रता शर्तें इसका उद्देश्य पूरा करने की राह में रोड़ा हैं.

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भारत में लगभग 29 लाख बच्चों को नहीं लग पाता खसरे का टीका: रिपोर्ट

पूरी दुनिया में खसरे की बीमारी से हर साल लगभग 90,000 बच्चों की जान चली जाती है, भारत नाइजीरिया के बाद दूसरे नंबर पर.

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आठ सालों में देश में पांच साल की उम्र से पहले ही हुई 1.13 करोड़ बच्चों की मौत

वर्ष 2008 से 15 के बीच हर घंटे औसतन 89 नवजात शिशुओं की मृत्यु होती रही है. 62.40 लाख नवजात शिशुओं की मृत्यु जन्म के 28 दिनों के भीतर हुई.

A mother carries her son to a health centre in Kushbari village, about 315 km (195 miles) north of the eastern Indian city of Kolkata, November 11, 2008. Every year, about 78,000 mothers die in childbirth and from complications of pregnancy in India, according to the United Nations Children's Fund (UNICEF). Picture taken November 11, 2008. To match feature INDIA-MATERNALDEATHS. REUTERS/Parth Sanyal (INDIA) - RTR23VG3

कहां गईं मध्य प्रदेश की 23 लाख गर्भवती महिलाएं?

कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में पिछले पांच सालों में तकरीबन 93.7 लाख गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व देखभाल के लिए अपना पंजीकरण करवाया था पर प्रसव सिर्फ 69.8 लाख के हुए. ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी 23.9 लाख गर्भवती महिलाओं का क्या हुआ?