संविधान

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हमारा संविधान: अनुच्छेद 15 (5) और 15 (6); मराठा आरक्षण, ईडब्ल्यूएस और संस्थानों में आरक्षण

वीडियो: संविधान में संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 15(5) और 15(6) को जोड़ा गया है, जिनमें सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्गों के लिए ग़ैर सहायता प्राप्त स्कूल और कॉलेजों में और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए वर्ग के लिए आरक्षण की बात कही गई है.

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हमारा संविधान: अनुच्छेद 15 (4); पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण और अन्य प्रावधान

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 15 (4) राज्य को यह अधिकार देता है कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष कानून बना पाए. संविधान में पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए क्या कानून है, इसकी जानकारी दे रही हैं अधिवक्ता अवनि बंसल.

सोली सोराबजी. (फोटो: पीटीआई)

पूर्व अटॉर्नी जनरल और न्यायविद् सोली सोराबजी का निधन

देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित मानवाधिकार अधिवक्ता सोराबजी तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में 1989 से 1990 तक और फिर अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में 1998 से 2004 तक भारत के अटॉर्नी जनरल रहे थे.

(फोटो साभार: अरिजीत)

बाबा साहेब के सपनों को साकार करने के लिए जातिवादी व्यवस्था के विरुद्ध मुहिम तेज़ करनी होगी

कोई भी राजनीतिक दल जाति व्यवस्था के अंत का बीड़ा नहीं उठाना चाहता है, न ही कोई सामाजिक आंदोलन इस दिशा में अग्रसर है. बल्कि, जाति आधारित संघों का विस्तार तेज़ी से हो रहा है. यह राष्ट्र एवं समाज के लिए एक घातक संकेत है.

(फोटो: पीटीआई)

बंधुत्व के बिना स्वतंत्रता और समानता हासिल करना असंभव है

जाति एक ऐसी बाधा है जो एक समाज का निर्माण नहीं होने देती. राष्ट्र बनकर भी नहीं बन पाता क्योंकि हम एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी नहीं होते. एकजुटता या बंधुत्व के अभाव में सामाजिक संपदा का निर्माण भी नहीं हो पाता.

जस्टिस गोविंद माथुर. (फोटो साभार: allahabadhighcourt.in)

क़ानून को छोड़कर न्यायाधीशों को बाकी सभी प्रभावों से मुक्त रहना चाहिए: जस्टिस गोविंद माथुर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने रिटायर होने के बाद अपने विदाई भाषण में कहा कि एक सभ्य भारत के लिए यह हम सब की ज़िम्मेदारी है कि न्यायपालिका को मज़बूत करें.

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हमारा संविधान: अनुच्छेद-15 (3)- महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष क़ानून बनाने का अधिकार

वीडियो: अनुच्छेद 15 (3) राज्य को यह आधिकार देता है, कि महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष क़ानून बना पाए. भारत में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को मद्देनजर रखते हुए, यदि सरकारें कोई भी ऐसा क़ानून बनाती है, जिससे महिलाओं का उत्थान हो सके, तो वह अनुच्छेद 15 (3) के तहत संविधानिक माना जाएगा और अनुच्छेद 15 (1) का अपवाद माना जाएगा.

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हमारा संविधान: अनुच्छेद-15 भेदभाव के ख़िलाफ़ निषेध

वीडियो: भारत में धर्म, कुल, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. संविधान का अनुच्छेद 15 क्या कहता है? कैसे न्यायालयों ने भेदभाव करने वाले बहुत सारे क़ानूनों को ग़ैर-संविधानिक क़रार दिया.

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यूजीसी ने इतिहास के पाठ्यक्रम में पौराणिक कथाओं को जोड़ा, शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

यूजीसी द्वारा स्नातक के इतिहास पाठ्यक्रम के लिए तैयार किए ड्राफ्ट में प्रसिद्ध इतिहासकारों जैसे कि प्राचीन भारत पर आरएस शर्मा और मध्यकालीन भारत पर इरफान हबीब की किताबों को हटा दिया गया है. इनकी जगह पर ‘संघ और सत्ता’ के क़रीबी माने जाने वाले लेखकों की किताबों को शामिल किया गया है.

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हमारा संविधान: क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 12

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 12 भाग तीन के लिए ‘राज्य’ को परिभाषित करता है. संसद, विधानसभा, नगर निकायों के साथ कौन-सी अन्य संस्थाएं है, जिनके ख़िलाफ़ नागरिक मौलिक अधिकारों के हनन के लिए अदालत जा सकते है. इस अनुच्छेद और संबंधित फैसलों के बारे में बता रही हैं अवनि बंसल.

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हमारा संविधान: दोहरी नागरिकता और नागरिकता पर क़ानून में संशोधन करने की शक्ति

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 9 दोहरी नागरिकता पर रोक लगाता है. अनुच्छेद 10 कहता है कि नागरिकता का अधिकार जो अनुच्छेद 5 से 8 में दिया गया है, वो बना रहेगा, जब तक संसद क़ानून द्वारा उसे बदलती नहीं है. नागरिकता संबंधी कानूनों के बारे में विस्तार से बता रही हैं अवनि बंसल.

एमएस गोलवलकर (फोटोः विकीमीडिया कॉमन्स)

गोलवरकर संबंधी ट्वीट पर संस्कृति मंत्रालय ने कहा- किसी विचारधारा को चुप कराने में विश्वास नहीं

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने 19 फरवरी को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से हिंदुत्ववादी विचारक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें महान विचारक बताया था. इस ट्वीट की तमाम लोगों ने आलोचना की थी.

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भारत में संविधान की शुरुआत के बाद किसे नागरिक माना गया

वीडियो: हमारा संविधान कार्यक्रम के सातवें एपिसोड में जानिए भारतीय संविधान बनने के बाद किसे मिला नागरिकता का अधिकार. निवास और किसी अन्य देश से आए लोगों के लिए कैसे तय किया गया नागरिकता का अधिकार.

आरएसएस के पूर्व प्रमुख एमएस गोलवलकर (फोटो साभारः ट्विटर)

हिटलर और जाति समर्थक गोलवलकर की जयंती पर संस्कृति मंत्रालय ने किया ट्वीट, हुई कड़ी आलोचना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख रहे एमएस गोलवलकर के विचारों को ज़्यादातर लोकतंत्र के ख़िलाफ़ माना जाता है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ख़ुद एक कार्यक्रम के दौरान उनसे दूरी बनाते नज़र आए थे.

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हमारा संविधान: अनुच्छेद 1 से 4 केंद्र और उसका क्षेत्र

वीडियो: संविधान के अनुच्छेद 1 से 4 में भारत का क्षेत्रफल, नए राज्य बनाने का अधिकार, राज्यों की सीमा घटाने, बढ़ाने और उनके नाम बदलने का अधिकार, नए क्षेत्र को अर्जित करने के अधिकार के बारे में बताया गया है. साथ ही राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में क्या अंतर है, क्या क़ानून हैं, विस्तार से बता रही हैं अवनि बंसल.