संसदीय समिति

(फोटो: पीटीआई)

तरल ऑक्सीजन के ग़ैर-चिकित्सकीय इस्तेमाल पर रोक, संयंत्रों से उत्पादन बढ़ाने को कहा गया

यह आदेश कोरोना महामारी की नई लहर के चलते देश के कई हिस्सों, विशेषकर दिल्ली में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के बीच आया है. केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसके औद्योगिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की ज़रूरत थी.

इलाहाबाद के एक प्लांट में ऑक्सीजन की लाइन में लगे मरीजों के परिजन. (फोटो: पीटीआई)

पिछले साल संसदीय समिति और अधिकारियों ने सरकार से कहा था, ऑक्सीजन का उत्पादन बढ़ाया जाए

संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने पिछले साल नवंबर में अपनी रिपोर्ट में यह पैरवी भी की थी कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण को ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत का निर्धारण करना चाहिए, ताकि इसकी किफ़ायती दर पर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके. समिति ने अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने का भी सुझाव दिया था.

(फोटो साभार: nominalize/Pixabay)

संसदीय समिति सदस्यों ने ओटीटी, सोशल मीडिया मंचों के लिए नए नियमों पर सवाल खड़े किए

संसदीय समिति के सदस्यों ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा कि क्या नियम कानूनी ढांचे के अनुरूप हैं? नियामक व्यवस्था में केवल नौकरशाह ही क्यों हैं और नागरिक समाज, न्यायपालिका तथा पेशेवर लोगों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है?

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

पर्यावरण मंत्रालय का अनुमानित बजट तीन साल में सबसे कम, 900 करोड़ अतिरिक्त फंड की ज़रूरत: समिति

राज्यसभा सांसद जयराम रमेश की अध्यक्षता वाली पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय के बजट में 35 फीसदी की कटौती की गई. इसके साथ ही पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बजटीय आवंटन में 770 करोड़ रुपये या 37 फीसदी की कमी दर्ज की गई है.

मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

नरेंद्र मोदी की अगुवाई में कैसा रहा संसद का कामकाज

संसद में बीते कुछ वर्षों से सरकार बिना उचित विचार-विमर्श के आनन-फानन में विधेयकों को पारित करने पर आमादा दिखती है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में महज़ 25 फीसदी विधेयकों को संसदीय समिति के पास भेजा गया, जो 15वीं लोकसभा के समय भेजे गए विधेयकों की तुलना में काफ़ी कम है.

New Delhi: Monsoon clouds hover over the Parliament House, in New Delhi on Monday, July 23, 2018.(PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_23_2018_000111B)

संसदीय समिति ने सरकार द्वारा विभिन्न मौकों पर इंटरनेट बंद करने के मामलों को कम करने पर चर्चा की

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों के प्रेजेंटेशन के बाद सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के सदस्य इस आम सहमति पर पहुंचे कि देश में इंटरनेट शटडाउन पर निर्भरता कम होनी चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का भी ख़्याल किया जाना चाहिए.

Gurugram: Migrants wait to board a bus for Bihar at Tau Devi Lal Stadium, during the ongoing COVID-19 lockdown, in Gurugram, Tuesday, June 2, 2020. (PTI Photo)(PTI02-06-2020_000216B)

ग्रेच्युटी की समयसीमा पांच साल से घटाकर एक साल की जाए: संसदीय समिति

श्रम पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि ग्रेच्युटी की सुविधा को सभी प्रकार के कर्मचारियों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें ठेका मज़दूर और दैनिक या मासिक वेतन कर्मचारी शामिल हैं.

कोवैक्सिन. (फोटो साभार: फेसबुक/bharatbiotech)

एम्स के पैनल ने कोरोना वायरस वैक्सीन के मानव परीक्षण की मंज़ूरी दी

एम्स की एथिक्स कमेटी ने स्वदेशी तौर पर विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के मानव परीक्षण की अनुमति दी है. इसके लिए 20 जुलाई से रजिस्ट्रेशन शुरू किया जाएगा.

New Delhi: The statue of Mahatma Gandhi in the backdrop of the Parliament House during the Monsoon Session, in New Delhi on Friday, July 20, 2018. (PTI Photo/Kamal Kishore) (PTI7_20_2018_000250B)

कोरोना वायरस की सस्ती दवाइयों को बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा: संसदीय समिति

गृह मामलों की स्थायी समिति के सदस्यों ने दवाइयों की कालाबाज़ारी पर चिंता प्रकट की है और कहा कि कोविड-19 इलाज के लिए सस्ती दवाओं का प्रचार किया जाए.

(फोटो: रॉयटर्स)

विशेषज्ञों ने संसदीय समिति से कहा, 2021 से पहले कोविड-19 की वैक्सीन बनना मुमकिन नहीं

शुक्रवार को संसद में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता वाले पैनल की बैठक में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने में भारत की अहम भूमिका रहेगी, पर अगले साल से पहले इसके बनने की संभावना बहुत कम है.

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चुनावी बॉन्ड: चुनाव आयोग ने क़ानून मंत्रालय के अलावा संसदीय समिति को भी पत्र लिख जताई थी चिंता

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की संसदीय समिति को बताया था कि यह समय में पीछे जाने वाला क़दम है और इसकी वजह से राजनीतिक दलों की फंडिंग से जुड़ी पारदर्शिता पर प्रभाव पड़ेगा.

Pragya Thakur Reuters

गोडसे को ‘देशभक्त’ बताने वाला बयान देने के बाद प्रज्ञा ठाकुर संसदीय समिति से बाहर

लोकसभा में प्रज्ञा ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने को भाजपा ने निंदनीय बताते हुए उन्हें रक्षा मंत्रालय की परामर्श समिति से बाहर किए जाने की बात कही. साथ ही बताया कि उन्हें इस सत्र में पार्टी की संसदीय दल की बैठकों में हिस्सा लेने की अनुमति भी नहीं होगी.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा का असली अपराध प्रज्ञा ठाकुर को सांसद बनाना था

भाजपा के लोग चाहे जो दिखावा करें, लेकिन प्रज्ञा ठाकुर भारत के लिए शर्मिंदगी का सबब हैं. वे संसद और इसकी सलाहकार समिति के लिए शर्मिंदगी की वजह हैं. और निश्चित तौर पर वे अपने राजनीतिक आकाओं के लिए भी शर्मिंदगी का कारण हैं. लेकिन शायद उन्हें इस शब्द का मतलब नहीं पता.

Surat: Sadhvi Pragya Singh Thakur during a roadshow at an event in Surat on Tuesday. PTI Photo(PTI4_24_2018_000059B)

प्रज्ञा ठाकुर को संसदीय रक्षा समिति में शामिल करने के क्या मायने हैं?

वीडियो: 2008 के मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति में शामिल किया गया है. 21 सदस्यों वाली समिति की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. वर्तमान में प्रज्ञा सिंह स्वास्थ्य कारणों से जमानत पर बाहर हैं. आतंक के आरोपों की अभियुक्त प्रज्ञा सिंह ठाकुर को रक्षा मंत्रालय की समिति के क्या मायने हैं, बता रहे हैं द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन.

प्रज्ञा सिंह ठाकुर. (फोटो: पीटीआई)

मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर रक्षा मामलों की संसदीय समिति के लिए नामित

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मालेगांव विस्फोट मामले की आरोपी भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था. इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस बयान के लिए वे प्रज्ञा सिंह ठाकुर को कभी भी मन से माफ नहीं कर पाएंगे.