हिंदी सिनेमा

(फोटो साभार: फेसबुक/@filmheritagefoundation)

साहिर लुधियानवी की हस्तलिखित नज़्में, डायरियां और तस्वीरें कबाड़ की दुकान पर मिलीं

फिल्म हैरिटेज फाउंडेशन नाम के संगठन के निदेशक ने बताया कि इन डायरियों में गीतकार साहिर लुधियानवी के रोज़ाना के कार्यक्रम और अन्य निजी बातें दर्ज हैं. उस दौर के संगीतकार रवि, उनके दोस्त और कवि हरबंस द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र भी मिले हैं.

फिल्म निर्देशक तनुजा चंद्रा. (फोटो साभार: फेसबुक/@MumbaiFilmFestival)

आज भी महिला प्रधान फिल्में बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है: तनुजा चंद्रा

साक्षात्कार: दुश्मन, संघर्ष, सुर: द मेलोडी ऑफ लाइफ और क़रीब-क़रीब सिंगल जैसी फिल्में बनाने वाली निर्देशक तनुजा चंद्रा से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

National Awards Film Collage

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: हेलारो सर्वश्रेष्ठ फिल्म, आयुष्मान-विकी कौशल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तेलुगु फिल्म ‘महानती’ में गुज़रे ज़माने की सुपरस्टार सावित्री का किरदार निभाने वाली कीर्ति सुरेश ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता.

दिनयार कॉन्ट्रैक्टर. (फोटो साभार:​ ट्विटर)

जाने-माने अभिनेता दिनयार कॉन्ट्रैक्टर का निधन

अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘बादशाह’ के अलावा दिनयार कॉन्ट्रैक्टर फिल्म ‘चोरी-चोरी चुपके-चुपके’, ‘दरार’ और ‘36 चाइना टाउन’ में नज़र आ चुके थे. इस साल जनवरी में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

अभिनेता, लेखक और नाटककार मानव कौल. (फोटो: फेसबुक)

संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करता है, उसे दांव पर नहीं लगाया जा सकता: मानव कौल

वीडियो: अभिनेता, लेखक और नाटककार मानव कौल और ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ फिल्म के निर्देशक सौमित्र रानाडे से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख़्तर. (फोटो: पीटीआई)

राष्ट्रवाद और देशभक्ति सिर्फ़ नारा नहीं: जावेद अख़्तर

पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख़्तर ने कहा कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति का मतलब सामाजिक रूप से जागरूक होना होता है. यह सिर्फ़ नारा नहीं बल्कि एक जीवनशैली है.

Kader Khan Twitter

क़ादिर ख़ान: जिन्हें लेकर अपनी-अपनी ग़लतफ़हमियां हैं

क़ादिर ख़ान हिंदी सिनेमा में उस पीढ़ी के आख़िरी लेखक थे, जिन्हें आम लोगों की भाषा और साहित्य की अहमियत का एहसास था. उनकी लिखी फिल्मों को देखते हुए दर्शकों को यह पता भी नहीं चलता था कि इस सहज संवाद में उन्होंने ग़ालिब जैसे शायर की मदद ली और स्क्रीनप्ले में यथार्थ के साथ शायरी वाली कल्पना का भी ख़याल रखा.

फिल्म ठाकरे में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी बाल ठाकरे के किरदार में नज़र आएंगे. (फोटो: यूट्यूब ग्रैब)

ठाकरे फिल्म के ट्रेलर में दक्षिण भारतीयों के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने का आरोप

फिल्म के ट्रेलर में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी द्वारा बोले गए एक संवाद पर दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ ने जताई आपत्ति. सेंसर बोर्ड भी दक्षिण भारतीय लोगों से जुड़े दो डायलॉग और बाबरी मस्जिद से जुड़े एक डायलॉग पर जता चुका है आपत्ति.

फिल्म निर्देशक तुलसी रामसे. (फोटो साभार: फेसबुक/Anirudh Shrotriya‎)

‘वीराना’, ‘बंद दरवाज़ा’, ‘तहख़ाना’ जैसी हॉरर फिल्मों के निर्देशक तुलसी रामसे का निधन

भारतीय सिनेमा में हॉरर श्रेणी की फिल्मों में सबसे लंबे समय तक रामसे ब्रदर्स का दबदबा था. तुलसी रामसे एफयू रामसे के पुत्र थे और सात भाइयों में एक थे. ज़ी टीवी पर प्रसारित हुए बहुचर्चित ‘ज़ी हॉरर शो’ का भी किया था निर्देशन.

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मुझे अपनी मिडिल क्लास मानसिकता से बाहर आने में 40 साल लग गए: आदिल हुसैन

वीडियो: ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘ज़ेड प्लस’, ‘इंग्लिश विंग्लिश’, ‘इश्क़िया’, ‘मुक्ति भवन’ और ‘ह्वॉट विल पीपल से’ जैसी फिल्मों में काम कर चुके अभिनेता आदिल हुसैन के साथ फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी. (फोटो साभार: यूट्यूब वीडियो ग्रैब)

अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने कोमा में गई बेटी से मिलवाने के लिए अदालत से लगाई गुहार

बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाख़िल कर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने अपने दामाद पर आरोप लगाया है कि वह उनकी बेटी से मिलने नहीं देते इसलिए उचित देखभाल के लिए उन्हें बेटी का अभिभावक घोषित किया जाए.

अभिनेत्री शेफाली शाह. (फोटो साभार: फेसबुक/Shefali Shah)

एक बार आप उम्रदराज़ महिला का रोल कर लें फिर लीड रोल नहीं कर सकते: शेफाली शाह

सत्या, मॉनसून वेडिंग, वक़्त: द रेस अगेंस्ट टाइम, गांधी माय फादर, द लास्ट लीयर, लक्ष्मी, दिल धड़कने दो जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली शेफाली शाह हाल ही में रिलीज़ फिल्म वंस अगेन में मुख्य भूमिका में नज़र आईं. उनसे प्रशांत वर्मा की बातचीत.

फिल्म मंटो का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/Manto Film)

नंदिता दास की ‘मंटो’ में मैं मंटो को तलाश करता रहा

मंटो फिल्म में मुझे जो मिला वो एक फिल्म निर्देशक की आधी-अधूरी ‘रिसर्च’ थी, वर्षों से सोशल मीडिया की खूंटी पर टंगे हुए मंटो के चीथड़े थे और इन सबसे कहीं ज़्यादा स्त्रीवाद बल्कि ‘फेमिनिज़्म’ का इश्तिहार था.