हिंदुस्तान टाइम्स

New Delhi: NITI Aayog CEO, Amitabh Kant speaks during the 'Circular Economy Symposium 2018' in New Delhi on Monday. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI5_14_2018_000165B)

नीति आयोग सीईओ बोले, देश में ‘अधिक लोकतंत्र’, बाद में कहा- नहीं दिया ऐसा बयान

एक ऑनलाइन कार्यक्रम में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि देश में कड़े सुधार नहीं ला सकते क्योंकि यहां ‘बहुत ज़्यादा लोकतंत्र’ है. उनके इस बयान से मुकरने के बाद कुछ मीडिया संस्थानों ने इस बारे में प्रकाशित की गई ख़बर हटा ली, हालांकि सामने आए कुछ वीडियो में वे ऐसा कहते नज़र आ रहे हैं.

पत्रकारिता को स्टिंग ऑपरेशन से ज़्यादा ख़तरा ज़हर फैला रहे मीडिया से है

मीडिया मालिक अख़बारों और न्यूज़ चैनलों को सुधारने के लिए कुछ करें या न करें, लेकिन यह तो तय है कि जब तक हर रोज़, हर न्यूज़रूम में प्रतिरोध की आवाज़ें मौजूद रहेंगी, तब तक भारतीय पत्रकारिता बनी रहेगी.

भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी संभाजी को पद्मश्री देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने की थी सिफ़ारिश

समिति के सदस्य और आवास मंत्री ने निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में अगर संभाजी के ख़िलाफ़ कोई मामला दर्ज है तो यह बड़ा मुद्दा नहीं, क्योंकि मैं भी कई सारे मामलों का सामना कर रहा हूं.

भारत को अपनी मुस्लिम आबादी की क़द्र करनी चाहिए: बराक ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि भारत को अपनी मुस्लिम आबादी का ध्यान रखना चाहिए जो ख़ुद को इस देश से जुड़ा हुआ और भारतीय मानते हैं.

क्यों मीडिया ने अमित शाह की संपत्ति और स्मृति ईरानी की डिग्री से जुड़ी ख़बर हटा दी?

कई मीडिया संस्थानों ने अमित शाह की संपत्ति में 300 फीसदी की बढ़ोत्तरी और स्मृति ईरानी की डिग्री से जुड़ी ख़बर छापी थी, जिसे बिना कोई वजह बताए हटा लिया गया.

क्या टाइम्स आॅफ इंडिया के संपादक ने अपने हित के लिए पत्रकारिता को ताक पर रख दिया?

अगर संपादक मंत्री से कहकर किसी नियुक्ति में कोई बदलाव करवा सकते हैं, तो क्या इसके एवज में मंत्रियों को अख़बारों की संपादकीय नीति प्रभावित करने की क्षमता मिलती है?