Adivasis

छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य में ‘ग़ैर-क़ानूनी’ खनन के ख़िलाफ़ आदिवासी कर रहे हैं 300 किमी पदयात्रा

सरगुजा ज़िले के अंबिकापुर में फतेहपुर से बीते तीन अक्टूबर को यह पैदल मार्च शुरू हुआ था. इसमें 30 गांवों के आदिवासी समुदायों के लगभग 350 लोग शामिल हैं, जो अपनी मांगों के साथ रायपुर में राज्यपाल व मुख्यमंत्री से मिलेंगे. ये ग्रामीण हसदेव अरण्य क्षेत्र में चल रही और प्रस्तावित कोयला खनन परियोजनाओं का यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे राज्य के वन इकोसिस्टम को ख़तरा है.

क्या वेरियर एल्विन के महात्मा गांधी से दूर जाने की वजह उनका आदिवासियों के क़रीब जाना था

ब्रिटिश मूल के एंथ्रोपोलॉजिस्ट वेरियर एल्विन ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई ख़त्म कर एक ईसाई मिशनरी के रूप में भारत आए थे. 1928 में वे पहली बार महात्मा गांधी को सुनकर उनसे काफी प्रभावित हुए और उनके निकट आ गए. गांधी उन्हें अपना पुत्र मानने लगे थे, लेकिन जैसे-जैसे एल्विन आदिवासियों के क़रीब आने लगे, उनके और गांधी के बीच दूरियां बढ़ गईं.

‘फूट डालो और राज करो’ को मानने वालों के लिए आदिवासी किसान नहीं हैं

एक ओर कॉरपोरेट्स सभी आर्थिक क्षेत्रों और राज्यों की सीमाओं में अपना काम फैलाने के लिए स्वतंत्र हैंं, वहीं देश भर के किसानों के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ साथ आ जाने पर भाजपा उनके आंदोलन में फूट डालने का प्रयास कर रही है.

टाटा लिटफेस्ट में सेशन रद्द होने पर नॉम चोम्स्की और विजय प्रसाद ने पूछा- क्या ये सेंसरशिप है

भाषाविद और नामचीन लेखक नॉम चोम्स्की और पत्रकार विजय प्रसाद को शुक्रवार को ‘टाटा लिटरेचर लाइव फेस्टिवल’ में एक सेशन में चोम्स्की की नई किताब पर चर्चा करनी थी, जिसे ऐन समय पर आयोजकों द्वारा ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए रद्द कर दिया गया था.

अमित शाह ने बिरसा मुंडा के बजाय ग़लत प्रतिमा पर फूल चढ़ाए, आदिवासी संगठन नाराज़

पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बांकुरा में क्रांतिकारी बिरसा मुंडा की प्रतिमा को फूल चढ़ाए थे. आदिवासी संगठनों ने बताया कि वह प्रतिमा मुंडा की नहीं बल्कि एक अनजान आदिवासी शिकारी की है, जिसके बाद शाह इन संगठनों सहित टीएमसी के निशाने पर आ गए.

छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में मारे गए 32 आदिवा​सियों के परिवारों के लिए 14 साल बाद मुआवज़े का ऐलान

साल 2006 में नक्सल विरोधी समूह सलवा जुडूम और नक्सलियों के बीच लड़ाई के दौरान नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले के एर्राबोर में हमला कर 32 आदिवासियों की हत्या कर दी थी, मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

केंद्र सरकार की कोविड-19 नीति में आदिवासियों की स्थिति क्या है?

कोरोना वायरस महामारी के चलते केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों का विश्लेषण करें, तो स्पष्ट रूप से दिखता है कि आदिवासियों और वन निवासियों के अधिकारों और उनकी ज़रूरतों की अनदेखी की गई है.

विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री ने 41 कोयला खदानों में खनन की नीलामी प्रक्रिया शुरू की

मोदी सरकार के इस क़दम से देश का कोयला क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुल जाएगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत होना देश के कोयला क्षेत्र को ‘दशकों के लॉकडाउन’ से बाहर निकालने जैसा है. हालांकि इन कोयला खदानों के समीप रहने वाले लोगों ने कहा है कि इससे उनका अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.

छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य में खनन शुरू करने के ख़िलाफ़ नौ सरपंचों ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी

हसदेव अरण्य क्षेत्र के सरपंचों ने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के भाषण को याद दिलाते हुए कहा कि यहां का समुदाय पूर्णतया जंगल पर आश्रित है, जिसके विनाश से यहां के लोगों का पूरा अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.

छत्तीसगढ़: कॉरपोरेट से जंगल और ज़मीन बचाने के लिए आदिवासियों की जद्दोजहद

बीते 14 अक्टूबर से राज्य के सरगुजा, सूरजपुर और कोरबा ज़िले के बीस से ज़्यादा गांवों के आदिवासी हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खदान खोले जाने के ख़िलाफ़ धरना दे रहे हैं. उनका आरोप है कि कोल ब्लॉक के लिए पेसा क़ानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की अनदेखी की गई है.

New Delhi: A view of Supreme Court of India in New Delhi, Thursday, Nov. 1, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI11_1_2018_000197B)

वन भूमि से आदिवासियों को बेदखल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकारा

लगभग 11.8 लाख आदिवासियों और वनवासियों को वन भूमि से बेदखल करने के मामले की सुनवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौ राज्यों ने आदिवासियों के दावे ख़ारिज करते समय तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया है.

आदिवासी और वन निवासियों को जंगलों से बेदख़ल करना उनका संहार करने जैसा है

वन अधिकार क़ानून 2006 के तहत ख़ारिज दावा-पत्रों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों को जंगल से बेदख़ल करने का आदेश दिया था, जिस पर बाद में रोक लगा दी गई. पर दावा-पत्र खारिज क्यों हुए? केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि दावा-पत्र सही से नहीं भरे गए, जबकि हक़ीक़त यह है कि सरकारों की मिलीभगत से इन्हें ख़ारिज किया गया है ताकि जंगलों में खनिज संपदा के दोहन के लिए लीज़ देने में किसी तरह की परेशानी न हो.

क्या राष्ट्र की चिंताओं और विमर्श से आदिवासियों को अधिकारिक तौर पर बाहर कर दिया गया है?

आदिवासियों की जंगल से बेदख़ली का जो सिलसिला आज़ादी के बाद से कभी विकास तो कभी पर्यावरण के नाम पर चला आ रहा है, क्या वह किसी तार्किक परिणति की तरफ बढ़ रहा है? हालांकि जैसे-जैसे आदिवासी तबाह हो रहे हैं, परेडों, संग्रहालयों, कला मेलों और शहरी उत्सवों में उनकी शोभा में वृद्धि हो रही है.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: करीब 75,000 आदिवासी मूर्ति के अनावरण का करेंगे विरोध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करने वाले हैं. अादिवासियों का कहना है कि ये प्रोजेक्ट उनके लिए विनाशकारी है. इसके विरोध में 72 गांवों में खाना नहीं पकेगा.

जिस महिषासुर का दुर्गा ने वध किया उन्हें आदिवासी अपना पूर्वज और भगवान क्यों मानते हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: महिषासुर की याद में नवरात्र की शुरुआत के साथ दशहरा यानी दस दिनों तक असुर शोक मनाते हैं. इस दौरान किसी किस्म की रीति-रस्म या परपंरा को नहीं निभाया जाता.