Akhilesh Yadav

वाराणसी से नामांकन रद्द होने पर तेज बहादुर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल की याचिका

वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ सपा-बसपा गठबंधन के टिकट पर चुनाव लड़ने उतरने वाले बीएसएफ के बर्ख़ास्त जवान तेज बहादुर यादव का नामांकन 1 मई को चुनाव आयोग ने तकनीकी आधार पर रद्द कर दिया था.

वाराणसी: नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ सपा से मैदान में उतरे तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द

नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर ने कहा कि मेरा नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया है. मुझे सबूत देने के लिए कहा गया था, मैंने सबूत दिए भी. इसके बावजूद मेरा नामांकन रद्द कर दिया गया. हम इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

वाराणसी में मोदी के ख़िलाफ़ खड़े बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव को सपा ने बनाया उम्मीदवार

सेना में खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने के बाद सुर्ख़ियों में आए बीएसएफ के बर्ख़ास्त जवान तेज बहादुर यादव पहले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा भर चुके थे.

बनारस में लड़ाई असली चौकीदार और नकली चौकीदार के बीच है: तेज बहादुर यादव

साक्षात्कार: सेना में खाने की गुणवत्ता की शिकायत को लेकर सुर्ख़ियों में आए बीएसएफ के बर्ख़ास्त जवान तेज बहादुर यादव ने वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया था. सोमवार को समाजवादी पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है. चुनाव प्रचार के लिए वाराणसी पहुंचे तेज बहादुर यादव से हुई बातचीत.

उत्तर प्रदेश: अखिलेश के लिए आसान नहीं रही कन्नौज की राह

कन्नौज की सीट करीब दो दशक से यादव परिवार के पास ही रही है लेकिन इस चुनाव में यहां जो जातीय समीकरण बन रहे हैं वो यादव परिवार द्वारा यहां किए गए विकास कार्यों पर भारी पड़ रहा है.

नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद भाजपा ने गोरखपुर से रवि किशन को टिकट क्यों दिया?

विशेष रिपोर्ट: गोरखपुर में भाजपा आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही है. प्रत्याशी चयन में एक महीना लगना और इस दौरान दर्जन भर नेताओं का नाम आना व ख़ारिज होना इसका उदाहरण है. आखिर में ऐसे प्रत्याशी को ‘आयात’ करना पड़ा, जिसे लेकर पार्टी और समर्थकों में उत्साह नहीं दिख रहा है.

द वायर बुलेटिन: लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए 95 सीटों पर मतदान हुआ

जेट एयरवेज़ के अस्थायी तौर पर बंद होने से 20 हज़ार कर्मचारियों पर रोज़गार के संकट समेत आज की प्रमुख ख़बरें.

Saharanpur: Bhim Army chief Chandrashekhar Azad after being released from Saharanpur Jail, in Saharanpur, Friday, Sept 14, 2018. Azad was arrested from Himachal Pradesh's Dalhousie in June last year in connection with the May 5 caste violence in which one person was killed and 16 others were injured at Shabbirpur village in Saharanpur. (PTI Photo) (PTI9_14_2018_000122B)

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा, वाराणसी से मोदी के ख़िलाफ़ नहीं लड़ूंगा चुनाव

बसपा सुप्रीमो मायावती ने चंद्रशेखर को भाजपा का एजेंट बताया था. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा को हराने के लिए दलित वोट संगठित रहना चाहिए और उनका संगठन सपा-बसपा गठबंधन का समर्थन करेगा.

यूपी: सहारनपुर में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने की वोट न बंटने देने की अपील

बसपा प्रमुख मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन की पहली रैली सहारनपुर के देवबंद में की, जहां पहले चरण में 11 अप्रैल को चुनाव होने हैं.

क्यों अखिलेश यादव अहीर बख़्तरबंद रेजीमेंट और गुजरात इन्फैंट्री रेजीमेंट बनाना चाहते हैं?

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों समाजवादी पार्टी का घोषणापत्र पढ़कर चौंक गए होंगे. दोनों सोच रहे होंगे कि सपाई क्यों उनके राज्य के नाम पर रेजीमेंट बना रहे हैं?

Bengaluru: Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav with Bahujan Samaj Party leader Mayawati wave at the crowd during the swearing-in ceremony of JD(S)-Congress coalition government, in Bengaluru, on Wednesday. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI5_23_2018_000199B)

मुज़फ़्फ़रनगर दंगा: चुनावों की भेंट चढ़ती नैतिकता

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों पर राजनीतिक रोटियां सबने सेंक लीं पर दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं मिला. जो लोग तब सरकार चला रहे थे वे कहते हैं कि दंगे नहीं रोक सकते थे. तो अब सवाल यह है कि इस बार उन्हें क्यों चुना जाए?

Jabalpur: A shopkeeper poses with political parties' campaign materials ahead of Lok Sabha elections 2019, in Jabalpur, Wednesday, March 13, 2019. (PTI Photo) (PTI3_13_2019_000028B)

लोकसभा चुनाव का पलड़ा अभी किसी एक तरफ नहीं झुका है

राष्ट्रवाद और सैन्य बलों को चुनाव प्रचार में घसीटकर उनका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश मतदाताओं को आकर्षित करने की गारंटी नहीं है और इसका उलटा असर भी हो सकता है. चुनाव की तैयारी कर रहीं पार्टियों की रणनीति देखते हुए यह साफ़ हो रहा है कि कोई भी अपनी निर्णायक जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है.