पश्चिम एशिया के युद्ध से उपजा ऊर्जा संकट कई शहरों को प्रभावित कर रहा है. ऐसे ही एक शहर इलाहाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र रसोई गैस की किल्लत और महंगाई से जूझ रहे हैं. भोजन जैसी बुनियादी ज़रूरत संकट में है, जिससे उनकी पढ़ाई, मानसिक स्थिति और भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है.
जन्मदिन विशेष: दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के साथ मसुरियादीन पासी को याद करने का भी दिन है. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा सदस्य रहे मसुरियादीन ने राष्ट्रीय और सामाजिक आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तथा सामाजिक चिंतक के रूप में दलित एवं पिछड़ों का नेतृत्व किया.
घटना इलाहाबाद ज़िले की करछना तहसील के इसौटा लोहागपुर गांव की है, जहां बीते 13 अप्रैल को एक 35 वर्षीय दलित किसान की हत्या कर दी गई और उनके शव को एक बाग में जलाने की कोशिश की. परिजनों ने आरोप लगाया कि ठाकुर समुदाय के लोगों के खेतों से गेहूं ढोने से इनकार करने पर उनकी हत्या हुई.
योगी आदित्यनाथ ने बयान दिया था कि एक नाविक परिवार ने कुंभ के दौरान 130 नावों से तीस करोड़ रुपये कमा लिए. सच यह है कि प्रशासनिक मदद की वजह इस हिस्ट्रीशीटर परिवार को संगम में नाव चलाने का एकाधिकार मिल गया. इस नदी माफिया ने नहावन के लिए बेहिसाब पैसे वसूले, लेकिन आम नाविकों की दिहाड़ी छिन गई.
लोकसभा में महाकुंभ भगदड़ में हुई मौतों पर एक प्रश्न के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि ऐसे आयोजनों में धार्मिक सभाएं और भीड़ प्रबंधन ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ बनाए रखने से संबंधित है, जो राज्य का विषय है. इस तरह का कोई भी डेटा केंद्रीकृत रूप से नहीं रखा जाता.
कुंभ में गिद्धों को लाशों और सूअरों को गंदगियों की 'सौगातें' किसकी कृपा से मिलीं? वह सरकार, जिसने भगदड़ के शिकार हुए निर्दोष श्रद्धालुओं की लाशों को देखकर भी नहीं देखा, वह क्यों ज़िम्मेदार नहीं है? क्या प्रदेश की सत्ता विपक्ष चला रहा है जो वह सारा ठीकरा उसके सिर पर फोड़कर बच निकलेगी?
महाकुंभ के चलते इलाहाबाद शहर में लग रहे जाम से स्थानीय व्यापारियों से लेकर छात्र, शिक्षक, श्रमिक, हॉकर सभी परेशान हैं. जहां छात्र और शिक्षक पढ़ाई का कोई रूटीन न बन पाने से चिंतित हैं, वहीं काम पर निकले लोगों का आधा समय जाम से निपटने में निकल रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महाकुंभ में हुई भगदड़ में कथित लापरवाही को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा है.
कुंभों और महाकुंभों की लंबी परंपरा में कभी इलाहाबादी कुंभ यात्रियों या कुंभयात्री इलाहाबादियों की किसी भी तरह की असुविधा के हेतु नहीं बने. उन्होंने हमेशा, और इस बार विशेषकर मुस्लिम समुदाय ने परस्पर सत्कार व सहकार की भावना बनाए रखी.
कहते हैं कि जब कोई गंगा स्नान करके घर आता है तो उसके पैरों में लगकर गंगा की माटी भी उन लोगों के लिए चली आती है जो गंगा तक नहीं जा पाए. महाकुंभ में भगदड़ की रात जब तमाम श्रद्धालु मेला क्षेत्र से निकलकर शहर में फंसें, तो जिन मुसलमानों को कुंभ में हिस्सा लेने से रोका गया, कुंभ ख़ुद ही उनके घरों, उनकी मस्ज़िदों में चला आया.
मौनी अमावस्या के महापर्व पर महाकुंभ में जो हादसा हुआ, उसके लिए मानवीय भूल और भीड़ नियंत्रण की विफलता को तो ज़िम्मेदार माना ही जाएगा. चूंकि सरकार इतनी अधिक भीड़ जुटाने का श्रेय ले रही थी, इसलिए हादसे का अपयश भी स्वीकार करना ही चाहिए.
हादसे के दो दिन बाद भी प्रयागराज में विकट स्थिति बनी हुई है. लोगों के घरों में दूध और अख़बार तक नहीं पहुंच पाए हैं. शहर की सड़कों पर बेहिसाब भीड़ के बीच वाहन अटके हुए हैं.
महाकुंभ में 29 जनवरी को हुई भगदड़ में कम से कम 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 60 से अधिक अन्य घायल हो गए. एक जनहित याचिका में यूपी सरकार पर प्रशासनिक चूक, लापरवाही और पूर्ण विफलता का आरोप लगाया गया है. इस बीच, भगदड़ की घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं.
1954 कुंभ त्रासदी को लेकर तब की सरकार को कोसने वाले भूल जाते हैं कि भगदड़ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने सभी वीआईपी अतिथियों से आग्रह किया था कि वे प्रमुख स्नान पर्वों पर कुंभ न जाएं, पर अब तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह वहां जाने वाले हैं और उनसे ऐसी किसी अपील की उम्मीद की ही नहीं जाती.
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में महाकुंभ के दौरान बुधवार को संगम पर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने से कई लोगों के हताहत होने की आशंका है. खबरों में 15 लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है लेकिन आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है.