Anti Muslim Rhetoric

भारत में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा देखकर दुख होता है: पद्मा लक्ष्मी

भारतीय-अमेरिकी सुपरमॉडल और लेखक पद्मा लक्ष्मी ने कई ट्वीट्स कर कहा है कि भारत में ‘व्यापक पैमाने पर मुस्लिम विरोधी’ बयानबाज़ी चल रही है और उन्होंने उम्मीद जतायी कि हिंदू ‘इस डर पैदा करने’ और ‘दुष्प्रचार’ के जाल में नहीं फंसेंगे.

भारत को बचाने की लड़ाई हम में से हरेक को लड़नी होगी

भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले हम सभी लोगों के सामने यह चुनने का रास्ता है कि या तो हम इंसाफ़ की एक साझी सोच की दिशा में काम करें, उस दर्द और नफ़रत को दूर करने के लिए, जो हमारी सारी सामूहिक स्मृतियों को निगल रहे हैं, या फिर इन हालात को और बिगड़ने दें.

‘यह आज़ाद भारत के इतिहास का सबसे बुरा दौर है’

वीडियो: पिछले कुछ दिनों में कई राज्यों में हुए सांप्रदायिक घटनाक्रम के बाद तनाव का माहौल है. मध्य प्रदेश में मुस्लिम समुदाय के घर-दुकान ढहाए गए, तो कहीं मस्जिदों के सामने अभद्र नारे लगे. इसके मद्देनज़र द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की इतिहासकार रामचंद्र गुहा से बातचीत.

द कश्मीर फाइल्स ने हिंदुत्ववादियों को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने का बहाना दे दिया है

सिनेमाघरों में द कश्मीर फाइल्स देखने वालों के नारेबाज़ी और सांप्रदायिक जोश से भरे वीडियो तात्कालिक भावनाओं की अभिव्यक्ति लगते हैं, लेकिन ऐसे कई वीडियो की पड़ताल में कट्टर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं और संगठनों की भूमिका स्पष्ट तौर पर सामने आती है. 

दिल्ली दंगा: हेट स्पीच मामले में अदालत ने कहा- बयान मुस्कुराकर दिया जाए तो अपराध नहीं है

दिल्ली हाईकोर्ट माकपा नेता वृंदा करात और केएम तिवारी द्वारा दिल्ली दंगों से पहले हेट स्पीच के आरोप में भाजपा नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने की मांग ख़ारिज करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है.इस दौरान कोर्ट ने कहा कि चुनावी भाषण में नेताओं द्वारा कई बातें कही जाती हैं, लेकिन हमें किसी भी घटनाक्रम की आपराधिकता को देखना होगा.

क्या दक्षिणपंथी राजनीति नागरिकों को दंगाई भीड़ में बदलने के मक़सद में सफल हो गई है

न्याय और बराबरी रोकने वालों ने बदलाव की लड़ाई को सांप्रदायिक नफ़रत की तरफ मोड़ दिया है. मुस्लिमों के ख़िलाफ़ घृणा उपजाने के लिए तमाम नकली अफ़वाहें पैदा की गईं, जिससे ग़ैर मुस्लिमों को लगातार भड़काया जा सके. आज इसी राजनीति का नतीजा है कि लोग महंगाई, रोज़गार, शिक्षा की बात करना भूल गए हैं.

विधानसभा चुनाव परिणाम: आशा और आशंका के बीच जनतंत्र कहां है

जनादेश जब इस क़िस्म का हो कि मतदाताओं का एक तबका उसमें ख़ुद को किसी तरह शामिल न कर पाए, तो उसके मायने यही होंगे कि जनता खंडित हो चुकी है.

पूर्व सेना प्रमुखों, नौकरशाहों की राष्ट्रपति, पीएम से हेट स्पीच देने वालों पर कार्रवाई की मांग

हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा आयोजित ‘धर्म संसद’ में कथित तौर पर मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों को ख़िलाफ़ खुलकर नफ़रत भरे भाषण दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया. इसके बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी इसी तरह का आयोजन हुआ था.

New Delhi: A view of the Supreme Court, in New Delhi, on Thursday. (PTI Photo / Vijay Verma)(PTI5_17_2018_000040B)

नफ़रत भरे भाषणों के सिलसिले में याचिका दाख़िल कर अदालत की निगरानी में जांच की मांग

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था, जिसमें मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे भाषण देने के साथ उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया था. इसी तरह दिल्ली में हिंदु युवा वाहिनी के एक कार्यक्रम में सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके ने कहा था कि वह भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने के लिए ‘लड़ने, मरने और मारने’ के लिए तैयार हैं.

धर्म संसद आयोजकों पर कोई भी कार्रवाई की जाए, चुनावी लाभ भाजपा को ही मिलेगा

यति नरसिंहानंद ने बताया है कि तथाकथित धर्म संसदें हर छह माह पर आयोजित की जाती रही हैं. तो फिर आगामी एक माह में तीन ‘धर्म संसदें’ आयोजित करने के पीछे क्या रहस्य है, वो भी दो बार उस उत्तर प्रदेश में, जहां विधानसभा चुनाव आसन्न हैं?

छत्तीसगढ़ः रायपुर की धर्म संसद में हुआ हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए हथियार उठाने का आह्वान

हरिद्वार में कई अखाड़ों ने मिलकर 28 दिसंबर को 21 धार्मिक नेताओं की एक कोर समिति का गठन किया है. धार्मिक नेताओं ने बताया कि उन्होंने भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ में बदलने के अपने अभियान को तेज़ करने का भी फ़ैसला किया है. अब आगे इस तरह की तीन और धर्म संसद अलीगढ़, कुरुक्षेत्र और शिमला में होंगी.

हरिद्वार ‘धर्म संसद’ के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रदर्शन; हिंदुत्ववादी नेताओं की गिरफ़्तारी की मांग

वीडियो: उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा एक ‘धर्म संसद’ का आयोजन किया गया था, जिसमें कथित तौर पर मुसलमान एवं अल्पसंख्यकों को ख़िलाफ़ खुलकर नफ़रत भरे भाषण दिए गए, यहां तक कि उनके नरसंहार का आह्वान भी किया गया है.

पाकिस्तान ने अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे भाषणों को लेकर भारतीय राजनयिक को तलब किया

पाकिस्तान ने हाल में हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने के इरादे से दिए गए कथित नफ़रत भरे भाषणों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत के लिए यह बहुत ही निंदनीय बात है कि न तो आयोजकों ने कोई खेद व्यक्त किया है और न ही भारत सरकार ने उनकी निंदा की है. 

मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में दो और लोगों के ख़िलाफ़ केस

उत्तराखंड के हरिद्वार में 17-19 दिसंबर के बीच आयोजित ‘धर्म संसद’ में  हिंदुत्ववादी नेताओं और कट्टरपंथियों द्वारा मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने के सिलसिले में 23 दिसंबर को दर्ज प्राथमिकी में जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को नामजद किया गया था. अब उसमें स्वामी धरमदास और साध्वी अन्नपूर्णा के नाम जोड़े गए हैं.

हरिद्वार धर्म संसद: नफ़रत के फैलते कारोबार के आगे पुलिस क्यों लाचार है

हरिद्वार में हुई तथाकथित धर्म संसद में कही गई अधिकांश बातें भारतीय क़ानूनों की धारा के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं, लेकिन अब तक इसे लेकर की गई उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि वह क़ानून या संविधान नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी के लिए काम कर रही है.