Assam

पूर्वोत्तर के संगठनों ने चार राज्यों में परिसीमन की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया

केंद्र से पूर्वोत्तर के चार राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर में परिसीमन की प्रक्रिया को तेज़ करने की मांग को लेकर पूर्वोत्तर छात्रों के फोरम सहित विभिन्न संगठनों ने दिल्ली स्थित जंतर मंतर में प्रदर्शन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने परिसीमन की प्रक्रिया पिछले 51 साल में नहीं की है.

Ri-Bhoi: Women voters show their fingers marked with indelible ink after casting vote during the first phase of the general elections, at Umpher in Ri-Bhoi district, Thursday, April 11, 2019. (PTI Photo)(PTI4_11_2019_000041B)

असम: जनवरी से अब तक संदिग्ध मतदाताओं की संख्या में 1.22 फीसदी की गिरावट

मुख्य चुनाव अधिकारी नितिन खाड़े ने बताया कि पांच जनवरी तक राज्य में 1,02,360 डी-वोटर्स थे जिनमें 38,496 पुरुष और 63,864 महिलाएं थीं. मतदाता सूची में संशोधन के बाद 30 जुलाई को यह संख्या घटकर 1,01,107 रह गई. इनमें 38,001 पुरुष और 63,106 महिलाएं शामिल हैं.

असम: साहित्य व छात्र संगठनों की अंग्रेज़ी को शिक्षा का माध्यम बनाने का फ़ैसला वापस लेने की मांग

बीते दिनों राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि शैक्षणिक वर्ष 2023 से सभी सरकारी और प्रांतीय असमिया और अन्य स्थानीय माध्यम के स्कूलों में कक्षा तीन से गणित और विज्ञान अंग्रेज़ी में पढ़ाए जाएंगे. साहित्य व छात्र संगठनों का कहना है कि हालिया आदेश मातृभाषा में पढ़ाई कराने वाले स्कूलों और अंतत: असमी, बोडो व राज्य की अन्य भाषाओं के लिए मौत का फ़रमान साबित होंगे.

असम: जापानी इंसेफलाइटिस से दो और लोगों की मौत, मरने वालों की संख्या 41 हुई

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन  के बयान के अनुसार, दोनों मौत असम के हैलाकांडी ज़िले में हुई हैं. राज्य में सोमवार को जापानी इंसेफलाइटिस के 14 नए मामले दर्ज किए, जिससे इस महीने इस बीमारी से ग्रस्त लोगों की संख्या 266 हो गई. 

असम: हाईकोर्ट ने उग्रवादी संगठन उल्फा के समर्थन में कविता लिखने वाली छात्रा को ज़मानत दी

असम में जोरहाट के डीसीबी कॉलेज में बीएसएस गणित की दूसरे वर्ष की छात्रा को उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) के समर्थन में सोशल मीडिया पर कथित रूप से कविता लिखने को लेकर बीते 18 मई को गिरफ़्तार किया गया था. उसके बाद से  वह गोलाघाट केंद्रीय कारागार में बंद थीं.

अरुणाचल प्रदेश की सड़क परियोजना में मज़दूरी करने गए असम के 19 मज़दूर दो हफ़्तों से लापता

सभी मज़दूर चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश के कुरुंग कुमे ज़िले में ‘सीमा सड़क संगठन’ की एक सड़क निर्माण परियोजना में कार्यरत थे. उन्हें असम के स्थानीय ठेकेदार काम का वादा करके अरुणाचल के दामिन स्थित एक शिविर में ले गए थे. 3 जुलाई के बाद से परिजनों का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है. 13 जुलाई को जब स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी हुई, तब तलाशी अभियान शुरू किया गया.

असम: कथित राष्ट्र विरोधी कविता लिखने पर गिरफ़्तार छात्रा की रिहाई की मांग

19 वर्षीय बर्षाश्री बुरागोहेन को सोशल मीडिया पर राष्ट्र विरोधी कविता पोस्ट करने के आरोप में बीते 18 मई को असम के गोलाघाट ज़िले से गिरफ़्तार किया गया था. छात्रा ने कथित तौर पर उग्रवादी संगठन उल्फा (आई) से जुड़ने की भी इच्छा ज़ाहिर की थी. कांग्रेस समेत विपक्ष दलों ने उनकी गिरफ़्तारी को लेकर असम सरकार की आलोचना की है. कांग्रेस ने सवाल किया कि उल्फा से माफ़ी मांगने वाले मंत्री संजय किशन और गायक ज़ुबीन गर्ग के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

सुप्रीम कोर्ट का कई राज्यों में जारी तोड़फोड़ अभियान के ख़िलाफ़ अंतरिम आदेश देने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि हिंसा के हालिया मामलों के आरोपियों की संपत्तियों में और तोड़फोड़ न की जाए.

असम: महंगाई के विरोध में हुए नुक्कड़ नाटक में शिव बनने वाला गिरफ़्तार, बाद में रिहा किया गया

असम के नागांव ज़िले का मामला. नाटक में दिखाया गया था कि भगवान शिव और पार्वती के किरदार दोपहिया वाहन की सवारी कर रहे हैं, जब पेट्रोल ख़त्म हो जाता है और शिव बढ़ती कीमतों के कारण पेट्रोल का ख़र्च वहन करने में असमर्थ होते हैं. विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता युवा मोर्चा व अन्य की शिकायतों के आधार पर शिव बने सामाजिक कार्यकर्ता बिरिंची बोरा को गिरफ़्तार कर लिया गया था.

असम: हिमंता बिस्वा कैबिनेट ने पांच मुस्लिम समुदायों को ‘स्वदेशी’ का दर्जा देने को मंज़ूरी दी

राज्य के असमिया मुस्लिम समुदाय से संबंधित सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए पिछले साल असम सरकार द्वारा गठित आयोग की सिफ़ारिशों के बाद कैबिनेट ने गोरिया, मोरिया, जुल्हा, देशी और सैयद नाम के पांच असमिया मुस्लिम उप-समूहों को स्वदेशी असमिया मुस्लिम समुदाय के तौर पर मान्यता दी है.

असम: हिरासत से कथित तौर पर भागने की कोशिश कर रहे दो लोगों की पुलिस गोलीबारी में मौत

असम के कछार ज़िले का मामला. बीते जून महीने में असम सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को बताया था कि मई 2021 में हिमंता बिस्वा शर्मा के असम का मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद से 13 महीनों में पूरे राज्य में हिरासत से कथित तौर पर भागने के प्रयास के दौरान पुलिस कार्रवाई की कुल 161 घटनाएं हुईं, जिनमें 51 आरोपियों की मौत हो गई.

मणिपुर भूस्खलन: मरने वालों की संख्या 24 हुई, बचाव अभियान जारी

मणिपुर के नोनी ज़िले में 29 जून की रात भूस्खलन हुआ था. इस हादसे के बाद 38 लोग अब भी लापता हैं. मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान जारी है. इधर, पड़ोसी राज्य असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. राज्य में 29 लाख लोग प्रभावित हैं. इस साल बाढ़ और भूस्खलन के कारण यहां मरने वालों की संख्या बढ़कर 159 हो गई है.

पीपीई किट: असम के मुख्यमंत्री ने दिल्ली के डिप्टी सीएम के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा किया

बीते जून महीने में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने भी दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मुक़दमा दर्ज कराया था. सिसोदिया ने साल 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान असम में पीपीई ख़रीद के लिए हिमंता की पत्नी की कंपनी को बाज़ार मूल्य से अधिक दामों पर ठेका देने का आरोप लगाया था. हिमंता उस वक़्त राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे.

असम: बाढ़ की स्थिति गंभीर, 12 लोगों की मौत और 31.5 लाख लोग प्रभावित

असम में बाढ़ और भूस्खलन के चलते 151 लोग जान गंवा चुके हैं. कछार ज़िले का सिलचर दस दिन से जलमग्न हैं और वहां के निवासी भोजन, पेयजल व दवाइयों की कमी का सामना कर रहे हैं. अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति बन गई है. राज्य में बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

‘हमारे प्रधानमंत्री को असम के बारे में ट्वीट करने के लिए पांच दिन लगे’

वीडियो: असम बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित है. तिब्बत से होते हुए असम पहुंचने वाली ब्रह्मपुत्र नदी में हर साल आने वाली बाढ़ राज्य की बड़ी जनसंख्या को प्रभावित करती है. इस साल बाढ़ के चलते अब तक 139 लोगों की मौत हो चुकी है. क्या वजह है कि असमवासियों को हर साल इस तबाही का सामना करना पड़ता है. द वायर की रिपोर्ट.