Bhartiya Kisan Union

सरकार पर कोई विश्वास नहीं, ये देश को ग़रीब और कुछ लोगों को अमीर कर रही है: राकेश टिकैत

वीडियो: लखीमपुर खीरी की घटना के एक साल पूरे होने के बाद राकेश टिकैत वहां पहुंचे थे. टिकैत ने सरकार को किसान और ग़रीब विरोधी बताया, साथ ही पीड़ित परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों, महंगाई, एमएसपी, चारे की कमी जैसे कई विषयों पर द वायर के लिए इंद्र शेखर सिंह से बात की.

किसान मोर्चा की विचारधारा पूरे देश में तेज़ी से फैल रही है, हमारा आंदोलन जारी रहेगा: राकेश टिकैत

वीडियो: न्यूनतम समर्थन मूल्य और किसान आंदोलन के भविष्य को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैट से द वायर के इंद्र शेखर सिंह की बातचीत.

पांच साल तक सोए हुए विपक्ष ने नहीं, किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जगाया है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जहां किसान आंदोलन का असर दिखा था, वहां के 19 विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा सिर्फ़ छह सीटें हासिल कर पाई है. अगर इस चुनावी नतीजे से किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचा जाए तो वह यह है कि जनता के मुद्दों पर चला सच्चा जन आंदोलन ही ध्रुवीकरण के रुझानों को पलट सकता है और आगे चलकर यही भाजपा को पराजित कर सकता है.

यूपी के चीनी मिलों से रूझान: ‘भाजपा किसान नहीं, कारोबारियों की पार्टी है’

वीडियो: उत्तर प्रदेश में इसी साल चुनाव होने वाले हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ने कि मिठास के लिए मशहूर है लेकिन ये मिठास काफ़ी समय से कम हो गई है. इसका कारण है किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर न होना. द वायर की टीम बागपत की मलकपुर चीनी मिल गई और यहाँ पर गन्ना किसानों से बातकर उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की.

यूपी चुनाव: मुज़फ़्फ़रनगर के बुज़ुर्ग किसान नेता की भविष्यवाणी

वीडियो: मुज़फ़्फ़रनगर के जौला गांव के निवासी ग़ुलाम मोहम्मद जौला 80 के दशक में भारतीय किसान यूनियन की स्थापना के समय महेंद्र सिंह टिकैत के साथ थे. साल 2013 में मुज़फ़्फ़रनगर दंगों ने जाटों और मुसलमानों के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी थी, जो अब सात साल बाद भी दिखाई दे रही है. यूपी चुनाव से पहले इन मसलों पर 85 वर्षीय ग़ुलाम मोहम्मद से द वायर की आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

किसान आंदोलन के दौरान किसी भी किसान की मौत पुलिस कार्रवाई से नहीं हुई: सरकार

इसके उलट इस साल पांच फरवरी को राज्यसभा में इस संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि देश के विभिन्न राज्यों में आंदोलनरत किसानों की मौत के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है. हालांकि दिल्ली पुलिस ने किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दो व्यक्तियों की मौत और एक के आत्महत्या करने की जानकारी दी है.

किसानों का आंदोलन स्थगित, 11 दिसंबर से दिल्ली सीमा ख़ाली करना शुरू करेंगे: किसान नेता

केंद्र सरकार के तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान बीते साल नवंबर महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे थे. आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा को केंद्र सरकार द्वारा हस्ताक्षरित पत्र मिलने के बाद यह घोषणा हुई है, जिसमें किसानों के ख़िलाफ़ मामलों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर एक समिति बनाने सहित उनकी लंबित मांगों पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की गई है.

कृषि क़ानून वापस होने से किसानों का नुकसान, चंद ‘ख़ालिस्तानी ग़ुंडों’ को फायदा: पूर्व भाजपा सांसद

उत्तर प्रदेश की घोसी सीट से सांसद रह चुके भाजपा नेता हरिनारायण राजभर ने भाकियू नेता राकेश टिकैत व आंदोलनकारी किसान नेताओं को ‘उग्रवादी’ क़रार देते हुए कहा कि टिकैत किसान आंदोलन के दौरान हुई 700 किसानों की मौत के दोषी हैं और उनकी संपत्ति ज़ब्त करके मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.

अन्नदाता को आतंकवादी बताने वाले मीडिया को किसानों ने क्या कहा

वीडियो: द वायर ने कृषि क़ानूनों को वापस लेने के बाद मुख्यधारा के मीडिया के यू-टर्न पर दिल्ली की टिकरी सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों से बात की. किसानों का कहना है कि जिस मीडिया ने उन्हें आतंकवादी, खालिस्तानी, देशद्रोही कहा, उन्हें उनका सामना करना पड़ेगा.

राकेश टिकैत की चुनौती- एमएसपी पर क़ानून नहीं तो जारी रहेगा किसान आंदोलन

वीडियो: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते हुई संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि अभी भी कई मुद्दे हैं, जिनके समाधान के बाद ही आंदोलन समाप्त होगा.

कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मंज़ूरी ‘औपचारिकता’, सरकार अन्य मांगों का करे समाधान: किसान

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कृषि क़ानूनों को निरस्त करने संबंधी विधेयक को बुधवार को मंज़ूरी दे दी, जिसे 29 नवंबर को शुरू हो रहे संसद सत्र के दौरान लोकसभा में पारित करने के लिए पेश किया जाएगा. किसान नेताओं ने इसे ‘औपचारिकता’ क़रार देते हुए अन्य मांगों, विशेषकर कृषि उपजों के लिए एमएसपी की क़ानूनी गारंटी को पूरा करने की मांग की है.

कृषि क़ानून: किसान ने कई मोर्चों पर जीत दर्ज की है, लेकिन मीडिया सब पर हारा है

तीनों कृषि क़ानूनों को इसलिए निरस्त नहीं किया गया क्योंकि प्रधानमंत्री ‘कुछ किसानों को विश्वास दिलाने में विफल’ रहे, बल्कि उन्हें इसलिए वापस लिया गया क्योंकि कई किसान दृढ़ता से खड़े रहे, जबकि कायर मीडिया उनके ख़िलाफ़ माहौल बनाकर उनके संघर्ष और ताक़त को कम आंकता रहा.

एमएसपी की क़ानूनी गारंटी समेत छह मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन: संयुक्त किसान मोर्चा

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे 40 यूनियनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा को पद से हटाना और गिरफ़्तारी भी शामिल है, जिनका बेटा गत तीन अक्टूबर को हुई लखीमपुर खीरी हिंसा का आरोपी है. उक्त घटना में कई किसान मारे गए थे. मोर्चा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.

कृषि क़ानून: क्यों जारी रह सकता है किसानों का आंदोलन

संसद द्वारा तीन कृषि क़ानून निरस्त करने से किसानों की कोई मांग पूरी नहीं होगी- वे बस वहीं पहुंच जाएंगे, जहां वे यह क़ानून बनाए जाने से पहले थे.

कृषि क़ानून: ‘हमने इस आंदोलन में कुछ नहीं पाया, सिर्फ खोया है’

वीडियो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि क़ानून वापस लेने के निर्णय की घोषणा के बाद दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर मौजूद ख़ुश तो नज़र आए लेकिन यह जीत और हार का मिलाजुला भाव था. किसानों ने कहा कि उन्होंने आंदोलन के दौरान बहुत कुछ खोया है. इन किसानों से बातचीत.