Caste based Discrimination

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

उत्तर प्रदेशः अधिकारियों के साथ बैठक में दलित ग्राम प्रधान को कुर्सी से खींचा, एफआईआर दर्ज

घटना महोबा की है, जहां हाल ही में ग्राम प्रधान बनीं एक दलित महिला ने आरोप लगाया है कि गांव के पंचायत भवन में ज़िले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया. उन्हें कुर्सी से उतरने को कहते हुए जातिसूचक टिप्पणियां भी की गईं.

राहुल कुमार राम, तौकीर शाह और रोहित कुमार राम. (बाएं से दाएं) (सभी फोटो: फ़ैयाज़ अहमद वजीह)

बिहार: अंधेरी बस्तियों से फूटी रोशनी की किरण

बीते महीने बिहार के दरभंगा ज़िले की अदलपुर पंचायत में मुस्लिमों के अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आने वाले और अमूमन सामाजिक उपेक्षा का शिकार रहे ‘फ़कीर’ समुदाय के दो बच्चे हाईस्कूल की दहलीज़ तक पहुंचे, वहीं गांव के ही दो दलित बच्चों ने पहली बार मैट्रिक पास किया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

क्यों भारतीय जेलें मनु के बनाए जाति नियमों से चल रही हैं

कई राज्यों की जेलों के मैनुअल कारागार के अंदर किए जाने वाले कामों का निर्धारण जाति के आधार पर करने की बात कहते हैं.

(प्रतीकात्मक फोटोः नेविल जावेरी/फ्लिकर)

उत्तर प्रदेशः कथित तौर पर सरकारी हैंडपंप छूने पर दलित व्यक्ति से मारपीट, मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले की घटना. पुलिस ने बताया कि यह मामला पिछले दो महीनों से चल रहा है. पुलिस कई बार मामले को सुलझा चुकी है और फ़िलहाल मामले की जांच जारी है.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

दलितों ने जो अधिकार संघर्ष से हासिल किए थे, आज वो सब खोते जा रहे हैं

बहुत सारे अधिकार संविधान सभा की बहसों से निकले थे, जब भारतीय संविधान बना तो उसमें उन अधिकारों को लिख दिया गया और बहुत सारे अधिकार बाद में दलितों ने अपने संघर्षों-आंदोलनों से हासिल किए थे. हालांकि दलितों का बहुत सारा समय और संघर्ष इसी में चला गया कि राज्य ने उन अधिकारों को ठीक से लागू नहीं किया.

Chitrakoot

यूपी: नाबालिग दलित के कथित गैंगरेप और आत्महत्या मामले में कोतवाल और चौकी प्रभारी निलंबित

मामला चित्रकूट ज़िले का है. बीते आठ अक्टूबर को 15 वर्षीय दलित किशोरी के साथ कथित तौर सामूहिक बलात्कार किया गया था. मामले में शिकायत न दर्ज किए जाने से नाराज़ होकर मंगलवार को किशोरी ने अपने घर में फ़ांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

भाजपा नेता रंजीत बहादुर श्रीवास्तव. (फोटो साभार: फेसबुक)

हाथरस: भाजपा नेता ने आरोपियों के निर्दोष होने की गारंटी दी, युवती के चरित्र पर सवाल उठाए

उत्तर प्रदेश के हाथरस की 19 वर्षीय कथित गैंगरेप पीड़िता को आवारा बताते हुए उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से भाजपा नेता रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने दावा किया कि पीड़िता का आरोपी के साथ संबंध था.

(स्क्रीनशॉटः हाथरस सपोर्ट वेबसाइट)

हाथरस: जिस वेबसाइट पर अंतरराष्ट्रीय साज़िश रचने का आरोप, उसमें कहा गया- न्यूयॉर्क पुलिस से बचें

हाथरस में दलित युवती के साथ गैंगरेप के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि इससे यूपी सरकार की छवि ख़राब करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश रची गई. पुलिस ने अंग्रेजी की एक वेबसाइट को इस षड्यंत्र का केंद्र बताया है.

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हाथरस रेप: यूपी में जातिवाद-दबंगई का घटिया खेल

वीडियो: उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में 19 वर्षीय युवती के साथ गैंगरेप के आरोपियों के समर्थन में कथित तौर पर सवर्ण जाति के लोगों ने बीते दिनों एक सभा की. यह सभा भाजपा नेता राजवीर सिंह पहलवान के घर हुई थी. इस मुद्दे पर कौशल पवार, कविता कृष्णन, चिंटू कुमारी और विवेक कुमार से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता के लिए न्याय मांगते हुए भोपाल  में हुआ एक प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: बलात्कार मामलों में न्याय की राह में पहला रोड़ा पुलिस का रवैया है

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव और एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स के एक साझा अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि यूपी में यौन हिंसा पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करवाने के दौरान लगातार पुलिस के हाथों अपमान झेलना पड़ा और एफआईआर भी पहले प्रयास में दर्ज नहीं हुई.

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस: यह सिर्फ़ बेटी का मामला नहीं है…

हाथरस में जो हुआ वह जातीय श्रेष्ठता और उसके अधिकार के अहंकार का ही नतीजा है. इसका एक प्रमाण गांव के कथित उच्चजातीय समूह की प्रतिक्रिया है.

(प्रतीकात्मक फोटोः पीटीआई)

एससी एसटी क़ानून के तहत लाया गया राजस्थान पुलिस का सर्कुलर विधिसम्मत क्यों है

राजस्थान पुलिस के सर्कुलर में कहा गया है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अभियुक्त को सीआरपीसी की धारा 41 ए का लाभ दिया जाना अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है और इसके उद्देश्य को विफल करता है. कई समूहों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है.

(फोटो साभार: राजकमल प्रकाशन)

कुठांव: मुस्लिम समाज में जातिवाद को उघाड़ता उपन्यास

अब्दुल बिस्मिल्लाह ने मुस्लिम समाज में मौजूद जातिवाद को कुठांव यानी मर्मस्थल की मानिंद माना है. उनके अनुसार यह एक ऐसा नाज़ुक विषय है अमूमन जिसका अस्तित्व ही अवास्तविक माना जाता है और जिसके बारे में बात करना पूरे मुस्लिम समाज के लिए एक पीड़ादायक विषय है.

Moradabad

मुरादाबादः दलितों के बाल काटने से इनकार करने पर तीन मुस्लिम नाइयों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह का जातिगत भेदभाव कई सालों से होता आ रहा है, जिसे रोकने के लिए उन्होंने शिकायत दर्ज की थी. आरोपी नाइयों में से एक का कहना है कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं.