Chief Justice of India

कॉलेजियम की आलोचना पर सीजेआई बोले- संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं

संविधान दिवस के उपलक्ष्य में हुए एक कार्यक्रम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कॉलेजियम के सभी न्यायाधीश संविधान को लागू करने वाले वफ़ादार सैनिक हैं. जब हम ख़ामियों की बात करते हैं, तो हमारा समाधान है- मौजूदा व्यवस्था के भीतर काम करना.

बिना विकल्प के कॉलेजियम प्रणाली की आलोचना का कोई अर्थ नहीं: पूर्व सीजेआई टीएस ठाकुर

भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने कहा कि कोई भी यह नहीं कह सकता है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली सबसे उत्तम प्रणाली है, लेकिन इस प्रणाली में सुधार किया जा सकता है जैसा कि प्रधान न्यायाधीश ने हाल ही में उल्लेख किया था.

जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड़ ने भारत के 50वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली

सीजेआई के रूप में जस्टिस धनंजय वाई. चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक होगा. उन्होंने जस्टिस उदय उमेश ललित की जगह ली है, जिनका कार्यकाल आठ नवंबर को पूरा हुआ. जस्टिस चंद्रचूड़ देश में सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहे जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं.

न्यायिक नियुक्ति आयोग पर क़ानून मंत्री बोले- सुप्रीम कोर्ट देश की इच्छा पर सहमत नहीं हुआ

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली के अपारदर्शी होने की बात दोहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम देश की सामूहिक इच्छा थी, जिससे सुप्रीम कोर्ट सहमत नहीं हुआ.

क़ानून मंत्री बोले- न्यायपालिका कार्यपालिका में हस्तक्षेप न करे, जजों की नियुक्ति सरकार का काम

केंद्रीय क़ानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि न्यायाधीशों का आधा समय और दिमाग़ यह तय करने में लगा रहता है कि अगला न्यायाधीश कौन होगा. उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार मीडिया पर निगरानी के लिए भारतीय प्रेस परिषद है, ठीक उसी प्रकार न्यायपालिका पर निगरानी की एक व्यवस्था होनी चाहिए.

जस्टिस चंद्रचूड़ देश के अगले प्रधान न्यायाधीश नियुक्त, नौ नवंबर को पद की शपथ लेंगे

प्रधान न्यायाधीश के रूप में जस्टिस यूयू ललित का 74 दिन का संक्षिप्त कार्यकाल रहा. वह 65 वर्ष के होने पर इस साल आठ नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे. सीजेआई के पद पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल दो वर्षों का होगा.

सीजेआई ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस चंद्रचूड़ के नाम की सिफ़ारिश की

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे. वह देश के सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहे न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे हैं. उनका कार्यकाल दो साल का होगा और वह 10 नवंबर 2024 को सेवानिवृत्त होंगे.

केस सूचीबद्ध करने की नई प्रणाली पर जजों की नाराज़गी संबंधी मीडिया रिपोर्ट सही नहीं: सीजेआई

नई प्रणाली के तहत शीर्ष अदालत के जज दो अलग-अलग पालियों में काम कर रहे हैं. प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को कुल 30 जज मुक़दमों की सुनवाई करते हैं और दो-दो न्यायाधीशों की पीठ का ही गठन किया जाता है. प्रत्येक पीठ औसतन 60 से अधिक मामलों की सुनवाई करती है, जिनमें नई जनहित याचिकाएं शामिल हैं.

जस्टिस यूयू ललित ने देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली

जस्टिस यूयू ललित दूसरे ऐसे सीजेआई हैं जो बार से पदोन्नत होकर सीधे शीर्ष अदालत पहुंचे हैं. हालांकि उनका कार्यकाल तीन माह से कम का होगा. वे आठ नवंबर को 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे.

जस्टिस यूयू ललित देश के 49वें प्रधान न्यायाधीश नियुक्त

जस्टिस उदय उमेश ललित 27 अगस्त को सीजेआई का पदभार ग्रहण करेंगे. उनका कार्यकाल तीन माह से कम का होगा. वह आठ नवंबर को 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होंगे.

कपिल सिब्बल बोले- सुप्रीम कोर्ट से कोई उम्मीद नहीं बची, वकीलों ने की अवमानना कार्यवाही की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों को लेकर कहा कि यदि आपको लगता है कि जज हमेशा क़ानून के अनुसार निर्णय लेते हैं, तो आप ग़लत हैं. राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मामले कुछ चुनिंदा जजों को दिए जाते हैं और निर्णय का क्या होगा, यह कोई भी बता सकता है.

सीजेआई ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस यूयू ललित के नाम की सिफ़ारिश की

भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना 26 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. उन्होंने 24 अप्रैल 2021 को देश के 48वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपना पदभार संभाला था. 

केंद्र ने न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण और रिटायर जजों की एडहॉक नियुक्ति को मंज़ूरी नहीं दी

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण के गठन और पीठ की कमी के मुद्दे को हल करने के लिए अस्थायी तौर पर हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों को एडहॉक के आधार पर नियुक्त करने की योजना का प्रस्ताव रखा था.

न्यायाधीशों की नियुक्ति न्यायाधीश करते हैं, यह धारणा ग़लत है: एनवी रमना

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने कॉलेजियम प्रणाली का बचाव करते हुए कहा कि न्यायिक नियुक्तियों पर उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले जनता के विश्वास को बनाए रखने के मक़सद से होते हैं. न्यायाधीशों की नियुक्ति लंबी परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से होती है, जहां कई हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जाता है.

मीडिया को न्यायपालिका पर विश्वास करना चाहिएः सीजेआई एनवी रमना

मुंबई प्रेस क्लब द्वारा डिजिटल माध्यम से आयोजित ‘रेड इंक अवॉर्ड्स’ समारोह में चीफ जस्टिस एनवी रमना ने ख़बरों में वैचारिक पूर्वाग्रह मिलाने की प्रवृत्ति को लेकर कहा कि तथ्यात्मक रिपोर्ट्स में रायशुमारी से बचना चाहिए. पत्रकार, जजों की तरह ही होते हैं. उन्हें अपनी विचारधारा और आस्था से परे बिना किसी से प्रभावित हुए केवल तथ्यों को बताना चाहिए और सच्ची तस्वीर पेश करनी चाहिए.