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जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन संबंधी जानकारी देने से मना करने पर सीआईसी की फटकार

2018 में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा के बाद आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने अक्टूबर 2019 में राष्ट्रपति भवन में आरटीआई याचिका दायर कर 18 बिंदुओं पर जवाब मांगा था. केंद्रीय सूचना आयोग का कहना है कि राष्ट्रपति भवन ने बिना उचित कारण बताए गोपनीयता का हवाला देकर इसका जवाब देने से इनकार किया है.

गृह मंत्रालय ने सीआईसी से कहा- फोन टैपिंग की सूचना नहीं दे सकते, क़ानून का उल्लंघन होगा

नीलेश गजानन मराठे नाम के एक व्यक्ति ने आरटीआई आवेदन दायर कर पूछा था कि क्या उनके दो मोबाइल फोन की कोई ग़ैर क़ानूनी फोन टैपिंग की गई थी. इसके जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि टेलीग्राफ क़ानून के तहत नियमानुसार फोन टैपिंग का प्रावधान है, लेकिन इसकी जानकारी नहीं दे सकते क्योंकि यह क़ानून के उद्देश्य को ही निरर्थक कर देगा.

सीआईसी ने अनुच्छेद 370 से जुड़ीं फाइलों को सार्वजनिक करने से किया इनकार, कहा- सुरक्षा को ख़तरा है

गृह मंत्रालय में एक आरटीआई आवेदन दायर कर संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से जुड़े सभी दस्तावेज़, पत्राचार, फाइल नोटिंग्स, रिकॉर्ड इत्यादि की प्रतियां मांगी गई थीं.

सूचना आयुक्त द्वारा भाजपा की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले ट्वीट पर आरटीआई कार्यकर्ता चिंतित

पूर्व पत्रकार उदय महुरकर की बिना आवेदन किए ही केंद्रीय सूचना आयोग में नियुक्ति हुई थी. उन्होंने मोदी मॉडल पर किताबें भी लिखी हैं. उनकी नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था. हाल के दिनों में महुरकर ने अपने कुछ ट्वीट्स में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की नीतियों के प्रति समर्थन जताया है.

ऑडिट में खामियां दिखाने वाली ईवीएम और वीवीपैट की संख्या बताई जाए: सीआईसी

सीआईसी का यह आदेश आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक की याचिका पर आया है, जिन्होंने ईवीएम और वीवीपैट की फर्मवेयर की जांच से संबंधित सूचना मांगी थी. फर्मवेयर किसी हार्डवेयर उपकरण पर एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है. इन ईवीएम और वीवीपैट इकाइयों का इस्तेमाल 2019 के लोकसभा चुनाव में किया गया था.

सीआईसी ने ऑक्सीजन आपूर्ति संंबंधी समिति की जानकारी मांगी तो केंद्र ने कहा- ऐसी समिति बनी ही नहीं

सीआईसी के आदेश के अनुपालन में एक पत्र में सरकार की ओर से लिखा गया है कि कोविड-19 के मद्देनज़र ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) सचिव की अध्यक्षता में ऐसी कोई समिति गठित नहीं की गई थी. इस पर आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाले कार्यकर्ता ने कहा है कि जब ऐसी कोई समिति अस्तित्व में ही नहीं थी फ़िर सरकार ने सीआईसी के समक्ष उस समिति के रिकॉर्ड को सार्वजनिक न करने की लड़ाई क्यों लड़ी.

केंद्र सरकार 10 दिनों के भीतर मेडिकल ऑक्सीजन से जुड़ा आंकड़ा जारी करे: सीआईसी

देश में अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की वजह से देशभर के कई कोविड-19 मरीजों की मौत हो गई थी. इनमें से दिल्ली के दो अस्पतालों में ही 40 से अधिक कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई थी.

बैंक एनपीए और डिफॉल्टर्स की जानकारी सार्वजनिक करने के आरबीआई के फ़ैसले पर सीआईसी की रोक

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सीआईसी ने आरबीआई के उस फ़ैसले पर रोक लगा दी है जिसमें उन्होंने आरटीआई एक्ट के तहत सारस्वत बैंक की निरीक्षण रिपोर्ट, एनपीए और डिफ़ॉल्टर्स की सूची सार्वजनिक करने को कहा था.

परिवार के ऊपर क़र्ज़ 2020-21 में उछलकर जीडीपी का 37.3 प्रतिशत पहुंचा: एसबीआई रिपोर्ट

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी की दूसरी लहर के कारण क़र्ज़ का यह अनुपात चालू वित्त वर्ष में और बढ़ सकता है. परिवारिक क़र्ज़ का स्तर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से बढ़ रहा है. इससे पहले नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू की गई थी. परिवार पर बढ़ता क़र्ज़ का मतलब है कि उनकी वित्तीय बचत दर, खपत और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ने के कारण कम हुई है.

भारत की आधी कामकाजी आबादी क़र्ज़दार: रिपोर्ट

ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2021 तक भारत की कुल कामकाजी आबादी 40.07 करोड़ थी, जबकि खुदरा ऋण बाजार में 20 करोड़ लोगों ने किसी न किसी रूप में क़र्ज़ लिया है.

मामले का विचाराधीन होना आरटीआई के तहत सूचना देने से मना करने का आधार नहीं: सीआईसी

राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार के तहत लाने से संबंधित एक आवेदन को ख़ारिज करने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने मामले के भारत के उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन होने को आधार बताया था.

केंद्रीय सूचना आयोग ने कोरोना संबंधी आरटीआई मामलों पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई शुरू की

केंद्रीय सूचना आयोग का ये फैसला मद्रास हाईकोर्ट द्वारा 28 अप्रैल को जारी उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें अदालत ने कहा था कि कोरोना मामलों की सुनवाई के लिए आयोग को एक विशेष पीठ का गठन करना चाहिए. आरटीआई कार्यकर्ता सौरव दास ने इस मामले में याचिका दायर की थी. दास को इसलिए हाईकोर्ट का रुख़ करना पड़ा था, क्योंकि सीआईसी इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर नहीं ले रही थी.

फोन टैपिंग से जुड़े आरटीआई आवेदनों पर गृह मंत्रालय ने सही से निर्णय नहीं लिया: सीआईसी

पारदर्शिता कार्यकर्ता और इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अपार गुप्ता ने गृह मंत्रालय में छह आरटीआई आवेदन दायर कर फोन टैंपिंग, मॉनीटरिंग, इंटरसेप्शन से संबंधित कई सूचनाएं मांगी थीं. मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया था. मुख्य सूचना आयुक्त वाईके सिन्हा ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे इससे संबंधित तर्कपूर्ण फैसला लें और 31 जुलाई तक आयोग के सामने रिपोर्ट दायर करें.

स्वास्थ्य मंत्रालय जनहित में कोरोना संबंधी जानकारी स्वत: सार्वजनिक करे: सीआईसी

केंद्रीय सूचना आयोग स्वास्थ्य मंत्रालय के ख़िलाफ़ जानकारियां छिपाने को लेकर दायर शिकायतों पर सुनवाई कर रहा था, जहां एक आरटीआई आवेदन के जवाब में मंत्रालय के अधिकारी ने कोरोना टीकाकरण से संबंधित सूचनाओं का खुलासा करने से इनकार कर दिया था.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने केंद्र और एनआईसी को आरोग्य सेतु का डेटा शेयर करने से रोका

डेटा प्राइवेसी के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकार प्राप्त समूह द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल के अनुसार प्राइवेसी पॉलिसी में ये बताया जाना चाहिए कि किस उद्देश्य के लिए यूज़र्स के डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन आरोग्य सेतु ऐप की पॉलिसी में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है.