1952 के बाद से वर्तमान लोकसभा की कार्य अवधि सबसे कम रहने की संभावना

अपने अंतिम साल में आने वाली 17वीं लोकसभा ने अब तक 230 दिन बैठक की हैं. पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाली सभी लोकसभाओं में से 16वीं में बैठकों के दिन न्यूनतम (331) थे. कार्यकाल पूरा होने में एक वर्ष शेष रहते और साल में औसतन 58 बैठकें होने की स्थिति देखते हुए 17वीं लोकसभा के 331 दिनों से अधिक होने की संभावना नहीं है.

संसदीय बहसों का न होना खेदजनक स्थिति है: मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना

स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि संसद में बहस की कमी के कारण क़ानून बनाने की प्रक्रिया में बहुत सारी अस्पष्टताएं होती हैं. हमें नहीं पता कि विधायिका का इरादा क्या है, क़ानून किस उद्देश्य से बनाए गए. इससे लोगों को असुविधा होती है. ऐसा तब होता है, जब क़ानूनी समुदाय के सदस्य संसद और राज्य विधानमंडलों में नहीं होते.