educational institutions

दिल्ली में ख़राब होती वायु गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र तथा दिल्ली सरकार को 24 घंटों के अंदर वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के सुझाव देने का निर्देश देते हुए आगाह किया कि यदि प्राधिकारी प्रदूषण को काबू करने में असफल रहते हैं, तो उसे असाधारण कदम उठाना पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा- नौकरशाह क्या कर रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हैरानी जताई कि नौकरशाह क्या कर रहे हैं. मुख्य सचिव जैसे अधिकारियों को किसानों, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के पास जाकर उनसे मुलाकात करनी चाहिए. अदालत ने कहा कि प्रदूषण पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को एक वैज्ञानिक अध्ययन कराना होगा और स्थिति को भांपते हुए एहतियातन कार्रवाई करनी होगी.

दिल्ली प्रदूषण: सभी स्कूल-कॉलेज अगले आदेश तक बंद, निर्माण-तोड़फोड़ गतिविधियां रोकने के निर्देश

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने निर्देश दिए हैं कि दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित 11 ताप विद्युत संयंत्रों में से केवल पांच 30 नवंबर तक चालू रहेंगे. धूल नियंत्रण मानदंडों के सख्त अनुपालन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा अथवा रक्षा संबंधी गतिविधियों अथवा राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को छोड़कर निर्माण और तोड़-फोड़ संबंधी सभी गतिविधियों को रोकने का निर्देश भी दिया गया है.

शिक्षण संस्थानों में पिछले दरवाज़े से प्रवेश मेधावी छात्रों के साथ घोर नाइंसाफ़ी: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उन पांच छात्रों की अपील को ख़ारिज करते हुए की, जिन्हें 2016 में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित केंद्रीकृत काउंसलिंग में शामिल हुए बगैर ही भोपाल के एक मेडिकल कॉलेज द्वारा  प्रवेश दिया गया था. अदालत ने कहा कि लाखों छात्र योग्यता के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. अब समय आ गया है कि संस्थानों में बैकडोर एडमिशन बंद हों.

जमीयत प्रमुख ने लड़कियों के सह-शिक्षा का विरोध किया, अनैतिकता बढ़ने का हवाला दिया

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी कहा कि ग़ैर-मुस्लिम लोगों को बेटियों को सह-शिक्षा देने से परहेज़ करना चाहिए, ताकि वो अनैतिकता की चपेट में नहीं आएं. जमीयत ने अपने बयान में समाज के प्रभावशाली और धनी लोगों से अपने-अपने क्षेत्र में लड़कियों के लिए अलग-अलग स्कूल और कॉलेज खोलने की अपील की.

मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों में जातिवाद की तहें खोलती ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’

वीडियो: वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश के संस्मरणों का संकलन ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’ हाल ही में आया है. इसमें उन्होंने अपनी जीवन यात्रा बताते हुए देश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया जैसे दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहद प्रतिष्ठित माने जाने वाले कुछ लोगों की जातिवादी प्रवृत्ति को रेखांकित किया है. इस किताब को लेकर उनसे विशाल जायसवाल की बातचीत.

‘भारत के प्रगतिशील और उदारवादियों की समस्या है कि वे अपना घेरा तोड़कर समाज के बीच नहीं जाते’

साक्षात्कार: हाल ही में आए अपने संस्मरणों के संकलन ‘ग़ाज़ीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’ में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उर्मिलेश ने अपने अनुभवों के माध्यम से देश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों और मीडिया में बरते जाने वाले जातिवादी रवैये को रेखांकित किया है. इस किताब को लेकर उनसे बातचीत.

बिहारः शैक्षणिक संस्थान बंद कराने के आदेश के ख़िलाफ़ छात्रों ने जमकर किया उपद्रव

बिहार के रोहतास ज़िले के सासाराम का मामला. सरकार ने राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शैक्षणिक संस्थानों को बंद कराने के आदेश दिए थे. इसके विरोध में छात्रों ने सार्वजनिक संपत्ति नष्ट की, अधिकारियों पर पथराव किया और कलक्ट्रेट गेट में आग लगा दी. छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों का कहना है कि सरकार जब मॉल और सिनेमा हॉल नहीं बंद करा रही है तो केवल कोचिंग ही क्‍यों बंद कराया जा रहा है.

सरकार उच्च शिक्षण संस्थाओं को ज्ञान के स्रोत के बजाय ‘प्रेशर कुकर’ में तब्दील कर रही है

जिस प्रकार कृषि क्षेत्र में ऋण से बढ़ते तनाव ने किसान आत्महत्या की समस्या पैदा की, स्कूल शिक्षा में परीक्षाओं और मेरिट के दबाव ने स्कूली विद्यार्थियों में आत्महत्याओं को जन्म दिया, तनाव निर्माण की उसी कड़ी में सरकार ने कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को झोंकने की तैयारी कर ली है.

‘स्वायत्तता’ का जुमला गढ़कर सरकार पढ़ने के अधिकार पर हमला कर रही है

‘स्वायत्तता’ के आगमन के साथ-साथ अब अकादमिक संस्थान दुकानों में तब्दील कर दिए जाएंगे, जहां बाज़ार की ज़रूरतों के अनुरूप कोर्स गढ़े जाएंगे और उसी के अनुसार उनकी फीस तय होगी.