Electoral Bonds Scheme

चुनावी बॉन्ड योजना: केंद्र सरकार ने हालिया संशोधन के लिए नहीं ली चुनाव आयोग की राय

मोदी सरकार ने चुनावी बॉन्ड योजना में संशोधन करते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में  विधानसभा चुनाव के वर्ष में बॉन्ड की बिक्री 15 अतिरिक्त दिन होने का प्रावधान किया है. गुजरात और हिमाचल प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान किए गए इस संशोधन के लिए चुनाव आयोग से चर्चा नहीं की गई थी.

स्टेट बैंक ने अब तक 21 चरणों में 10,246 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे: आरटीआई

सूचना का अधिकार क़ानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में भारतीय स्टेट बैंक ने बताया कि 2018 में चुनावी बॉन्ड की शुरुआत से बेचे गए कुल बॉन्ड में लगभग 93.5 प्रतिशत एक करोड़ रुपये मूल्यवर्ग के थे.

सरकार ने हाल ही में एक करोड़ रुपये वाले 10 हज़ार चुनावी बॉन्ड छपवाए हैं: एसबीआई

भारतीय स्टेट बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 29 अक्टूबर के बीच एक करोड़ रुपये की कीमत वाले 10,000 चुनावी बॉन्ड छपवाए हैं. हिमाचल प्रदेश और गुजरात चुनावों को देखते हुए चुनावी बॉन्ड की सबसे हालिया बिक्री 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच की गई थी.

चुनावी बॉन्ड संबंधी याचिकाओं को वृहद पीठ को भेजने पर छह दिसंबर को ग़ौर करेगा सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा चुनावी बॉन्ड के ज़रिये राजनीतिक दलों को चंदा मिलने के प्रावधान वाले क़ानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

सीआईसी ने भारतीय सुरक्षा प्रेस को चुनावी बॉन्ड के मुद्रण लागत की जानकारी देने का निर्देश दिया

राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए चुनावी बॉन्ड की छपाई की कुल लागत की जानकारी हासिल करने की ख़ातिर भारतीय सुरक्षा प्रेस को आरटीआई आवेदन दिया था. हालांकि भारतीय सुरक्षा प्रेस ने तर्क दिया था कि सूचना सार्वजनिक किए जाने से देश के आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

केवल जनवरी महीने में 1,213 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे गएः आरटीआई

एक आरटीआई आवेदन के जवाब में एसबीआई ने बताया कि चुनावी बॉन्ड शुरू होने के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी विधानसभा चुनाव से पहले इतनी बड़ी राशि के बॉन्ड बेचे गए. इस अवधि में बैंक की मुंबई शाखा ने सर्वाधिक 489.6 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे और नई दिल्ली शाखा में सबसे अधिक बॉन्ड भुनाए गए.

भाजपा ने 2019-20 में 4,847 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति घोषित की: एडीआर

चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले संगठन द एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने 2019-20 में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की संपत्ति और देनदारियों के अपने विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की है. वित्त वर्ष के दौरान सात राष्ट्रीय और 44 क्षेत्रीय दलों द्वारा घोषित कुल संपत्ति क्रमश: 6,988.57 करोड़ रुपये और 2,129.38 करोड़ रुपये थी.

बीते चार सालों में बिके कुल चुनावी बॉन्ड में से 92 फीसदी एक करोड़ रुपये मूल्य के: आरटीआई

स्टेट बैंक से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, पिछले चार वर्षों में लगभग 7,995 करोड़ रुपये के 15,420 चुनावी बॉन्ड बेचे गए. इनमें से 7,974 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 15,274 चुनावी बॉन्ड राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए. 20 करोड़ रुपये से कुछ अधिक मूल्य के नहीं भुनाए गए बॉन्ड प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष भेजे गए.

सरकार ने चुनावी बॉन्ड की 19वीं किस्त को मंज़ूरी दी, एक जनवरी से शुरू होगी बिक्री

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय स्टेट बैंक को एक जनवरी से 10 जनवरी 2022 के बीच उसकी 29 अधिकृत शाखाओं के जरिए चुनावी बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है.

केंद्रीय सूचना आयोग ने चुनावी बॉन्ड पर एसबीआई की रिपोर्ट का खुलासा करने से इनकार किया

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा चुनावी बॉन्ड की बिक्री और उन्हें भुनाने के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक और केंद्र को साल 2018 में सौंपी गई रिपोर्ट का खुलासा करने की मांग की थी.

2019-20 में क्षेत्रीय दलों ने अज्ञात स्रोतों से जुटाए 445.77 करोड़ रुपये: एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2019-20 में 25 क्षेत्रीय दलों को 803.24 करोड़ रुपये दान मिला, जिसमें 426.23 करोड़ रुपये चुनावी बॉन्ड से आए और क्षेत्रीय दलों ने स्वैच्छिक योगदान से 4.97 करोड़ रुपये एकत्र किए, जिसमें से 55.5 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से आया.

ग़ैर-चुनावी अवधि में भी एसबीआई ने 614 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बेचे: आरटीआई

614 करोड़ रुपये के इन चुनावी बॉन्ड में से 200 करोड़ रुपये के बॉन्ड एसबीआई की कोलकाता शाखा, 195 करोड़ रुपये के बॉन्ड चेन्नई शाखा और 140 करोड़ रुपये के बॉन्ड हैदराबाद शाखा से बेचे गए हैं. साल 2018 से लेकर अक्टूबर 2021 तक कुल 18 चरणों में 7,994 करोड़ रुपये के गोपनीय चुनावी बॉन्ड बेचे जा चुके हैं, जिनका मुख्य मक़सद राजनीतिक दलों को चंदा देना है. 

14 क्षेत्रीय दलों ने चुनावी बॉन्ड के ज़रिये चंदा प्राप्त होने की घोषणा की: एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के रिपोर्ट में कहा है कि 42 क्षेत्रीय दलों का विश्लेषण किया गया, उनमें से केवल 14 ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 447.498 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की घोषणा की है, जो उनकी कुल आय का 50.97 प्रतिशत है.

सुप्रीम कोर्ट गोपनीय चुनावी बॉन्ड मामले पर सुनवाई क्यों नहीं कर रहा है

वित्त मंत्रालय के निर्देश पर चुनावी बॉन्ड के 18वें चरण की बिक्री शुरू हो गई है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगी. हालांकि कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने गोपनीय चुनावी बॉन्ड को जारी रखने को लेकर चिंता ज़ाहिर की है और सर्वोच्च न्यायालय से इसमें तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.

साल 2019-20 में कुल चुनावी बॉन्ड की 75 फ़ीसदी राशि भाजपा को मिली, कांग्रेस को महज़ नौ फ़ीसदी

चुनाव आयोग में दायर किए गए पार्टी के वार्षिक ऑडिट के अनुसार, भाजपा देश की सबसे धनी राजनीतिक पार्टी बनी हुई है, जिसकी कुल नकदी 3,501 करोड़ रुपये (कैश और बैंक खातों में) है, जो कि साल 2019-20 में 1,904 करोड़ रुपये की तुलना में काफी अधिक है. 2019-20 में पार्टी ने 73 करोड़ रुपये की ज़मीन और लगभग 59 करोड़ रुपये के भवन ख़रीदे थे.