Farmer Loan

उत्तराखंड: बिचौलिए से परेशान किसान ने की आत्महत्या, कथित सुसाइड नोट में लिखा भाजपा को वोट न करें

हरिद्वार के लक्सर का मामला. 65 वर्षीय किसान ईश्वर चंद शर्मा ने सुसाइड नोट में बैंक से पांच लाख का लोन दिलाने वाले बिचौलिए पर पैसों के लिए उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है.

मोदी सरकार ने एक साल में 615 खातों को दिया लगभग 59 हज़ार करोड़ रुपये का कृषि लोन

विशेष रिपोर्ट: आरटीआई के जरिए यह सामने आया है कि साल 2016 में 615 खातों को औसतन 95 करोड़ से ज़्यादा का कृषि लोन दिया गया है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ते दर और आसान नियमों के तहत किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी कंपनियों को भारी भरकम लोन दिया जा रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: पीटीआई)

तमिलनाडु: क़र्ज़ से परेशान किसान ने परिवार संग की ख़ुदकुशी

अपेक्षित फसल न होने से हताश किसान मुथुसामी ने अपने 2 बच्चों की हत्या कर 70 वर्षीय मां संग फांसी लगा ली. मुथुसामी पर करीब 13 लाख रुपये का क़र्ज़ बकाया था.

पिछले 17 साल में महाराष्ट्र में 26,339 किसानों ने की आत्महत्या

राजस्व मंत्री ने विधानसभा में कहा, आत्महत्या करने वाले कुल किसानों में से 12,805 किसानों ने क़र्ज़, बंजर ज़मीन और ऋण के भुगतान को लेकर दबाव के चलते यह क़दम उठाया.

देश में पहली बार महिलाओं की संसद, किसानों ने कहा- अब मोदी के जुमले नहीं चलेंगे

देश भर के 184 किसान संगठनों की किसान मुक्ति संसद में कृषि क़र्ज़ से पूर्ण मुक्ति और कृषि उत्पाद के लाभकारी मूल्य को लेकर दो विधेयकों के मसौदे पारित.

‘जिनको चुना है वो हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हमें अपनी संसद चलानी पड़ेगी’

वीडियो: दिल्ली के जंतर मंतर पर 184 किसान संगठनों ने मिलकर लगाई किसान मुक्ति संसद. कहा- सरकार को हमारी बात सुननी पड़ेगी.

नोटबंदी पर जश्न का दिन भी किसानों के लिए मौत का दिन था

मध्य प्रदेश में दो, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब में एक-एक किसानों ने की आत्महत्या, महाराष्ट्र में जनवरी से लेकर अक्टूबर तक 2,414 किसानों ने आत्महत्या की.

जिस सरकार ने नोटबंदी की, उसी को क़र्ज़ माफ़ी का ख़र्च भी उठाना चाहिए

अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग उथली राजनीति है तो नरेंद्र मोदी का देश भर में घूम-घूम कर चुनावी सभाओं में वादा करना उथली राजनीति नहीं थी?

Farmers PTI

यह मिथक तोड़ना ज़रूरी है कि केवल रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाओं से कृषि उत्पादकता बढ़ती है

दुनिया में सैकड़ों उदाहरण उपलब्ध हैं जहां महंगी रासायनिक खाद व कीटनाशकों के बिना अच्छी कृषि उत्पादकता प्राप्त की गई है.

किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घाटे का सौदा है

वास्तव में किसानों से उपज खरीदने वालों से व्यापार में नैतिकता की अपेक्षा भर की जाती रही. सरकार ने यह कोशिश कभी नहीं की कि किसानों को उचित कीमतें मिलें.

फसल अच्छी होने के बावजदू हमारा किसान हताश क्यों है?

शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता है, जब देश के किसी न किसी कोने से किसानों की आत्महत्या की खबरें न आती हों. हार किसानों की नहीं हुई है. ये हार अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं की है, जिन्होंने किसानों को मझधार में छोड़ दिया है.

‘फ़सल बीमा के लिए निजी कंपनियों को दिए 17,184 करोड़, किसानों को मिला सिर्फ़ 6808 करोड़’

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर लगाया पूंजीपतियों को भारी मुनाफ़ा पहुंचाने का आरोप, बोले- मोदी ने अपने पूंजीपति दोस्तों का 1,54,000 करोड़ माफ़ किया और देश में 35 किसान रोज़ आत्महत्या कर रहे हैं.