Farmers Union

ग़ाज़ीपुर सीमा झड़प: जाति आधारित दंगे भड़काने की साज़िश रच रही है भाजपा- राकेश टिकैत

दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर बुधवार को ग़ाज़ीपुर प्रदर्शन स्थल के पास भाजपा कार्यकर्ताओं और कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों के बीच झड़प हुई थी. भाकियू नेता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि यह प्रकरण सात महीने पुराने विरोध को दबाने के लिए भाजपा और आरएसएस की साज़िश है.

दिल्ली: भाजपा कार्यकर्ताओं और कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे किसानों के बीच झड़प

दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित ग़ाज़ीपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं और कृषि कानूनों का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों के बीच हुई झड़प के बाद किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह तीन विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कुचलने और इसे बदनाम करने की केंद्र सरकार की एक और साज़िश है.

किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने पर निकाले गए मार्च को लेकर दर्ज मामले वापस लिए जाएं: संगठन

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों का नेतृत्व कर रहे संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने बीते 26 जून को प्रदर्शन के सात महीने पूरे होने पर मार्च निकाला था. इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने कई आरोपों में तमाम किसानों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए हैं.

आंदोलन के सात महीने पूरे होने के मौके पर बड़ी संख्या में दिल्ली का रुख़ करेंगे किसान: एसकेएम

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लगभग सात महीनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. 40 यूनियनों के प्रधान संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सिंघू, टिकरी और गाज़ीपुर बॉर्डर पर किसान 26 जून को ‘कृषि बचाओ, लोकतंत्र बचाओ दिवस’ के रूप में मनाएंगे.

केंद्र किसानों के आंदोलन को बदनाम कर रहा है, ख़त्म नहीं होगा प्रदर्शन: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. 40 यूनियनों के प्रधान संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों को बदनाम करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है. हालांकि उनकी नीति इस बार भी नाकाम होगी.

किसान आंदोलन का विपक्ष ने किया समर्थन, कृषि मंत्री ने कहा- सरकार फिर बातचीत को तैयार

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार और किसानों के बीच अब तक 11 दौर की बातचीत हुई है, लेकिन गतिरोध बना हुआ है. किसान संगठन तीनों नए कृषि क़ानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले क़ानून की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

अगर किसान कोरोना फैलाता तो दिल्ली की सीमाओं पर सबसे ज़्यादा मामले होते: किसान नेता

ऐसा कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के चलते प्रदर्शन स्थलों पर किसानों की संख्या कम होती जा रही है. हालांकि किसानों का दावा है कि संक्रमण का असर सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर लगभग नहीं के बराबर था. एक किसान नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की अकर्मण्यता के कारण गांवों में कोरोना फैला है. अगर किसान कोरोना फैलाता तो सीमाओं पर संक्रमण फैलता.

किसानों को सरकार दिल्ली से हरियाणा भेजना चाह रही है, उसकी चाल कामयाब नहीं होने देंगे: टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार चाहती है कि आंदोलन का केंद्रबिंदु दिल्ली की सीमाओं से हरियाणा में स्थानांतरित किया जाए, लेकिन हम दिल्ली की सीमा को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, आंदोलन जारी रहेगा.

महामारी के मद्देनज़र कृषि क़ानून वापस लेना ही समझदारी होगी

कोविड महामारी की दूसरी लहर का कृषि उत्पादन पर असर पड़ने के अलावा सप्लाई चेन भी महामारी की चपेट में आने लगी है, जिससे उत्पादन और वितरण दोनों पर प्रभाव पड़ने वाला है. आमदनी घटने और ख़र्च बढ़ने जैसे कई कारणों के चलते सरकार का नए कृषि क़ानूनों को वापस लेना ज़रूरी है.

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर किसानों ने मनाया ‘काला दिवस’, लहराए काले झंडे

केंद्र सरकार के विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते साल 26 नवंबर से दिल्ली चलो मार्च के तहत किसानों ने अपना प्रदर्शन शुरू किया था. पंजाब और हरियाणा में दो दिनों के संघर्ष के बाद किसानों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश की मंजूरी मिल गई थी. इसके बाद दिल्ली की तीनों सीमाओं- सिंघू, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों ने प्रदर्शन शुरू किया था, जो आज भी जारी है.

हमारी लड़ाई कॉरपोरेट घरानों से है, ये रुक नहीं सकती: किसान नेता दर्शन पाल

वीडियो: किसान नेता डॉ. दर्शन पाल कहते हैं कि वे महामारी से अवगत हैं और जोखिमों को समझते हैं, लेकिन अगर किसान आंदोलन और उनकी मांग से पीछे हटते हैं तो और भी अधिक भारतीय अपनी आजीविका खो देंगे. किसान इस आंदोलन के तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं.

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर हो रहे प्रदर्शन को 12 दलों का समर्थन मिला

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहीं 40 यूनियनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 मई को प्रदर्शन के छह महीने पूरे होने के मौके पर ‘काला दिवस’ मनाने की घोषणा की है. देश के 12 प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों का समर्थन देते हुए कहा है कि केंद्र को अहंकार छोड़कर तत्काल किसानों से बातचीज शुरू करनी चाहिए.

200 से अधिक विदेशी कार्यकर्ताओं ने कहा- सरकार कृषि क़ानून रद्द करें, ताकि किसान कोरोना से बच सकें

कनाडा, अमेरिका एवं अन्य जगहों के 200 से अधिक शिक्षाविदों, ट्रेड यूनियन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर किसानों की मांगों को समर्थन करते हुए कहा है कि कृषि क़ानून रद्द करने के साथ-साथ सभी राजनीतिक बंदियों को भी रिहा किया जाए.

किसानों ने कृषि क़ानून पर बातचीत शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा

किसानों ने पत्र में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार 25 मई तक बातचीत नहीं शुरू करती है तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा. 26 मई को आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर किसानों ने ‘काला दिवस’ मनाने की घोषणा की है. किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है. 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद से यह बातचीत बंद है.

सिंघू बॉर्डर के पास प्रदर्शन में शामिल रहे दो किसानों की मौत, एक कोरोना संक्रमित पाए गए

अधिकारियों ने बताया कि पटियाला निवासी बलबीर सिंह और लुधियाना निवासी महिंदर सिंह की बीते 18 मई को मौत हो गई. वे सिंघू बॉर्डर के निकट विरोध प्रदर्शन कर रहे समूह में शामिल थे. केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.