Freedom of Digital Media

सरकार की डिजिटल मीडिया के लिए नई एफ़डीआई नीति के बाद हफ़पोस्ट ने भारत में काम बंद किया

अमेरिका स्थित डिजिटल मीडिया कंपनी हफ़पोस्ट के भारतीय डिजिटल प्रकाशन हफ़पोस्ट इंडिया ने छह साल के बाद मंगलवार को भारत में अपना काम बंद कर दिया. इसके साथ ही उनमें कार्यरत 12 पत्रकारों की नौकरी भी चली गई.

केंद्र ने डिजिटल मीडिया कंपनियों को एक महीने के भीतर एफ़डीआई नियमों का अनुपालन करने को कहा

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने विभिन्न न्यूज़ पोर्टल, वेबसाइट और न्यूज़ एजेंसियों को जारी किए गए नोटिस में कहा कि उन्हें एक महीने के भीतर निदेशकों व शेयरधारकों का नाम तथा पता के साथ कंपनी और उसकी शेयरधारिता की जानकारी देनी होगी.

ऑनलाइन सामग्री पर रोक लगाने संबंधी निर्देशों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

लेखकों और निर्देशकों के एक तबके ने कहा है कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाए जाने के निर्णय से वैश्विक स्तर पर भारतीय कंटेंट क्रियेटरों को नुकसान हो सकता है. इससे निर्माताओं और यहां तक कि दर्शकों की रचनात्मक एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है.

ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाए गए

ऑनलाइन समाचार पोर्टलों और कंटेंट प्रोवाइडरों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है. दिलचस्प यह है कि ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध समाचार व समसामयिक विषयों से संबंधित सामग्रियों को ‘प्रेस’ उपश्रेणी के तहत न रखकर ‘फिल्म’ उपश्रेणी के तहत रखा गया है.

हरियाणा: छह ज़िलों में सोशल मीडिया न्यूज़ प्लेटफॉर्म बैन, कार्यकर्ताओं ने कहा- अघोषित आपातकाल

हरियाणा के सोनीपत, कैथल, चरखी दादरी, करनाल, नारनौल और भिवानी के उपायुक्तों द्वारा वॉट्सऐप, ट्विटर, फेसबुक, टेलीग्राम, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, पब्लिक ऐप और लिंक्डइन पर आधारित सभी सोशल मीडिया समाचार प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करने के आदेश दिए गए हैं.

डिजिटल मीडिया पर लगाम लगाने की तैयारी, केंद्र सरकार ला रही है नया विधेयक

प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण विधेयक, 2019 के मसौदे में डिजिटल मीडिया को आरएनआई के तहत लाने की तैयारी की जा रही है. वर्तमान में डिजिटल मीडिया देश की किसी भी संस्था के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है.

यह अभिव्यक्ति की आज़ादी के लिए निराशाजनक दौर है

यह एक कठोर हक़ीक़त है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी को बचाए रखने वाले हर क़ानून के अपनी जगह पर होने के बावजूद समाचारपत्रों और टेलीविज़न चैनलों ने बिना प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया है और ऊपर से आदेश लेना शुरू कर दिया है.

क्या सरकार ने सोशल मीडिया पर नज़र रखने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं?

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रम बेसिल ने 25 अप्रैल 2018 को एक टेंडर सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब नाम से जारी किया है. इसके माध्यम से सरकार फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नज़र रखेगी.

प्रेस की आज़ादी के असली दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि अंदर ही हैं

मोदी के चुनाव जीतने के बाद या फिर उससे कुछ पहले ही मीडिया ने अपनी निष्पक्षता ताक पर रखनी शुरू कर दी थी. ऐसा तब है जब सरकार और प्रधानमंत्री ने मीडिया को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ किया है. मीडियाकर्मियों की जितनी ज़्यादा अवहेलना की गई है, वे उतना ही ज़्यादा अपनी वफ़ादारी दिखाने के लिए आतुर नज़र आ रहे हैं.

आॅनलाइन मीडिया पर मोदी सरकार के हमले से उठते सवाल

आम चुनाव नज़दीक हैं और यह साफ़ है कि केंद्र की सत्तारूढ़ मोदी सरकार आॅनलाइन मीडिया पर लगाम लगाना चाह रही है जिसने पिछले कुछ सालों में सरकार को आईना दिखाने का काम किया है.

मीडिया बोल, एपिसोड 44: ऑनलाइन मीडिया पर अंकुश की तैयारी

मीडिया बोल की 44वीं कड़ी में उर्मिलेश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा न्यूज पोर्टल और मीडिया वेबसाइट्स को रेग्युलेट करने के लिए कमेटी बनाए जाने पर चर्चा कर रहे हैं.

अब आॅनलाइन मीडिया की निगरानी के लिए नियम-क़ानून बनाएगी सरकार

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज़ पोर्टल और वेबसाइटों को रेग्युलेट करने के लिए नियम बनाने को लेकर दस सदस्यीय कमेटी का गठन किया है.