Hemant Soren

झारखंड: सिमडेगा में भीड़ द्वारा की गई पीट-पीट कर हत्या मामले में ग्राम प्रधान गिरफ़्तार

बीते चार जनवरी को सिमडेगा ज़िले के एक गांव में भीड़ ने पेड़ काटने के संदेह में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर शव को जला दिया था. पांच जनवरी को पुलिस ने 13 नाम ज़द समेत कुल 38 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की थी. इस मामले अब तक आठ आरोपियों को पुलिस गिरफ़्तार कर चुकी है. 

झारखंड: मुस्लिम शख़्स को कथित तौर पर थूक चाटने और ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर किया

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के ख़िलाफ़ धनबाद में प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से प्रधानमंत्री एवं भाजपा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष को ‘अपशब्द’ कहने के आरोप में मानसिक बीमारी से पीड़ित एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी. मुख्यमंत्री ने मामले दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

झारखंड: मॉब लिंचिंग क़ानून आने के बाद भीड़ ने ग्रामीण की पीट-पीटकर हत्या कर शव जलाया

मामला सिमडेगा ज़िले के कोलेबिरा थाना क्षेत्र का है. पुलिस के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप था कि 32 वर्षीय संजू प्रधान वन क्षेत्र से लकड़ी की तस्करी करते थे. इससे नाराज़ ग्रामीण उन्हें बात करने के लिए घर से बुलाकर ले गए, जहां भीड़ ने पत्थर-लाठियों से उन्हें मारने के बाद शव को आग लगा दी. 

केंद्र में ‘रावण’ पार्टी की सरकार आने के बाद भीड़ हिंसा विरोधी क़ानून लाने को मजबूर हुए: सोरेन

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भाजपा देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है. मॉब लिंचिग रोधी अधिनियम हिंदू, मुस्लिम या आदिवासी अधिनियम नहीं है, क्योंकि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता. भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने और देश के सामाजिक तानाबाने को नष्ट करने वाला माहौल बनाने के बाद हम यह क़ानून लाने को मजबूर हुए.

झारखंड: मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ विधेयक लाने का प्रस्ताव, आजीवन कारावास और जुर्माने का प्रावधान

मॉब वायलेंस और मॉब लिंचिंग बिल, 2021 को झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है, जो 16 दिसंबर से शुरू हो रहा है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और संपत्ति ज़ब्त किए जाने के अलावा तीन साल से आजीवन कारावास तक की सज़ा का प्रावधान है. इसके अलावा पीड़ितों के लिए प्रतिकूल माहौल बनाने के लिए जुर्माने और तीन साल तक की सज़ा का भी प्रावधान है.

झारखंड: स्कूलों को बंद करने के विरोध में रैली, बच्चों और परिजनों ने ब्लॉक ऑफिस का घेराव किया

झारखंड के लातेहार ज़िले के मनिका क्षेत्र का मामला. बीते दो सालों से बंद पड़े स्कूलों के विरोध में निकली रैली में शामिल अभिभावकों ने कहा कि अगर भीड़ को बाज़ारों, शादी और क्रिकेट स्टेडियम में जाने की अनुमति है तो स्कूलों को क्यों बंद रखा गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ऑनलाइन शिक्षा पर ज़ोर दे रही है, लेकिन मनिका जैसे इलाकों में कुछ ही बच्चे ऑनलाइन पढ़ पाते हैं. 

झारखंड: नाबालिग दलित किशोरी से सामूहिक बलात्कार, तीन आरोपी गिरफ़्तार

घटना हजारीबाग जिले के दारू थानाक्षेत्र  का है. पुलिस के मुताबिक शनिवार तड़के जब किशोरी अपने दो सहेलियों के साथ तालाब के पास गई थी, पड़ोसी गांव के पांच व्यक्तियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक सुनसान जगह पर ले गए, जहां उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया और घटना का वीडियो बना लिया. पुलिस के संज्ञान में ये घटना तब आई जब परिवार के सदस्य उसे हजारीबाग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले गए और डॉक्टरों ने पुलिस को सूचित किया.

किसी भी हालत में झारखंड का बिहारीकरण नहीं होने देंगेः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक साक्षात्कार में कहा कि भोजपुरी और मगही बिहार की भाषा है, झारखंड की नहीं. झारखंड का बिहारीकरण क्‍यों किया जाए? आदिवासियों ने झारखंड को अलग राज्य बनाने की लड़ाई क्षेत्रीय भाषाओं के दम पर लड़ी थी, भोजपुरी और मगही भाषा की बदौलत नहीं.

Ranchi: Jharkhand Mukti Morcha (JMM) executive president Hemant Soren addresses a press conference ahead of Jharkhand Assembly Elections, in Ranchi, Sunday, Sept. 15, 2019. (PTI Photo) (PTI9_15_2019_000038B)

झारखंड: निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण को मंज़ूरी

विधानसभा ने ‘झारखंड राज्य निजी क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवार रोज़गार विधेयक, 2021’ को पारित कर दिया, जिसके तहत निजी क्षेत्र में 40 हजार रुपये प्रतिमाह तक के वेतन वाली नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. इसके साथ ही आंध्र प्रदेश व हरियाणा के बाद झारखंड ऐसा तीसरा राज्य बन गया, जहां निजी क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोज़गार प्रदान करने वाला क़ानून है.

धनबाद जज मौत: झारखंड हाईकोर्ट ने मामले में सीबीआई जांच की प्रगति पर असंतोष जताया

धनबाद के ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद मौत के मामले में सीबीआई की अब तक की जांच पर नाराज़गी जताते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि एजेंसी अपनी जांच पेशेवर तरीके से करे क्योंकि मामला बहुत गंभीर है.

झारखंड: आदिवासी अस्मिता पर चुनाव जीती सरकार के कार्यकाल में भी आदिवासियों का दमन क्यों जारी है?

चाहे केंद्र में यूपीए की सरकार रही हो या वर्तमान एनडीए की, नक्सल अभियान के नाम पर आदिवासियों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा हिंसा जारी रहती है. इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि झारखंड में माओवादी हिंसा एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसे रोकने के नाम पर निर्दोष आदिवासियों के दमन का क्या औचित्य है? क्यों अभी भी आदिवासियों की पारंपरिक व सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को दरकिनार कर सुरक्षा बल उनके क्षेत्र में घुसपैठ कर उन्हें परेशान कर रहे हैं? 

धनबाद जज मौत: सीबीआई जांच की साप्ताहिक निगरानी करेंगे झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

धनबाद के ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की सीलबंद रिपोर्ट में अधिक विवरण शामिल नहीं है. साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हर हफ़्ते सीबीआई जांच की प्रगति देखेंगे.

धनबाद जज मौत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सीबीआई और आईबी न्यायपालिका की मदद नहीं कर रहे

धनबाद के जज उत्तम आनंद की मौत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जिनमें गैंगस्टर और हाई-प्रोफाइल व्यक्ति को अदालत से उम्मीद के अनुरूप फैसला नहीं मिलता तो वे न्यायपालिका को छवि धूमिल करना शुरू कर देते हैं. न्यायाधीश को शिकायत करने तक की स्वतंत्रता नहीं है, ऐसी स्थिति उत्पन्न की जाती है. जब वे पुलिस या सीबीआई या अन्य से शिकायत करते हैं, तो ये एजेंसियां ​​​प्रतिक्रिया नहीं देती हैं.

धनबाद जज मौत: झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस विशेष जवाब की चाह में सवाल पूछ रही है

धनबाद के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते हुए उस पर सवाल उठाए हैं. अदालत ने कहा है कि जांच में देरी या किसी तरह की चूक से मामले की सुनवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

धनबाद जज मौत मामले में 243 लोग हिरासत में, 17 गिरफ़्तार, दो पुलिस अधिकारी निलंबित

धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एक पुलिस अधिकारी को घटना के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने के लिए और दूसरे पुलिस अधिकारी को न्यायाधीश को टक्कर मारने वाले ऑटो की चोरी की प्राथमिकी दर्ज करने में देरी के लिए निलंबित किया गया है. धनबाद के ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद 28 जुलाई की सुबह सैर पर निकले थे, जब एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी.