कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: आज के समय में सत्तारूढ़ राजनीतिक शक्तियां मूल्यभाषा का दम तो भरती हैं और उनके प्रति अपनी प्रतिबद्धता का सार्वजनिक उद्घोष तो करती हैं पर आचरण उससे बिल्कुल उलट करती हैं. कथनी-करनी में यह फांक, यह पाखंड हमारे लोकतंत्र के इतिहास में इससे पहले इतने व्यापक कभी नहीं हुए.
अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर देश के प्रमुख साहित्यकारों से बातचीत के ज़रिये यह पड़ताल की गई कि वर्तमान में हिंदी की स्थिति क्या है, अनुवाद की भूमिका कितनी निर्णायक है और हिंदी किस हद तक वैश्विक भाषा के रूप में उभर पाई है. उनके विचार हिंदी की चुनौतियों और संभावनाओं की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं.
भाषाएं कभी इतिहास से अलग नहीं होतीं. वे समाज की जटिलता, राजनीति की चाल और सत्ता के असंतुलन से गढ़ी जाती हैं. उर्दू को अक्सर मुस्लिमों की, विदेशी और अभिजात्य भाषा के रूप में देखा गया. हिंदी को राष्ट्रवाद और 'प्रामाणिक भारतीय’ पहचान से जोड़ा गया.
भाषा केवल संवाद का साधन नहीं है; वह स्मृति, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संरचना का वाहक भी होती है. ऐसे में जब भाषा सार्वजनिक नीति और राजनीति के केंद्र में आती है, तो वह केवल शैक्षिक या सांस्कृतिक विषय नहीं रह जाती-वह सत्ता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन का प्रश्न बन जाती है.
इस साल पेंगुइन स्वदेश ने हिंदी और भारतीय भाषाओं में कई किताबें प्रकाशित की हैं. 2024 के अपने हासिल का लेखा-जोखा दे रही हैं पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया’ में भारतीय भाषाओं की प्रकाशक वैशाली माथुर.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय हिंदी समिति की 32वीं बैठक में हिंदी को सर्वमान्य और लचीला बनाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि सभी आधुनिक शिक्षा पाठ्यक्रमों का हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद करना ज़रूरी है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों को अगले तीन वर्षों के भीतर भारतीय भाषाओं में हर पाठ्यक्रम के लिए अध्ययन सामग्री डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने कहा कि यह क़दम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के क्रम में है.
उर्दू के कई नामचीन लेखकों ने साल 2023 के लिए दिए गए साहित्य अकादमी पुरस्कार को लेकर ‘अयोग्य जूरी सदस्यों’ द्वारा इस साल नामांकित वरिष्ठ लेखकों की रचनाओं को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया है. उन्होंने अकादमी के उर्दू एडवाइजरी बोर्ड के संयोजक चंद्रभान ख़याल को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग भी की है.
भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब किसी मीडिया संस्थान के अन्य व्यावसायिक हित होते हैं तो वह बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है. अक्सर व्यावसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना पर हावी हो जाते हैं. नतीजतन, लोकतंत्र से समझौता होता है.
अक्सर देखा गया है कि ग़ैर-हिंदीभाषियों को हिंदी अपनाने का उपदेश देने वाले ख़ुद अंग्रेज़ी की राह पकड़ लेते हैं. यह प्रश्न बार-बार उठा है कि कितने हिंदीभाषियों ने अन्य भारतीय भाषाएं सीखी हैं?
विश्व में वैज्ञानिक लेखों का दो तिहाई हिस्सा अंग्रेज़ी में लिखा जाता है और बिना अंग्रेज़ी के आजकल विद्यावर्धन नहीं हो सकता. पर यह भी महत्वपूर्ण है कि ऐसे लेखों का एक तिहाई, जो भी एक बड़ी संख्या है, दूसरी भाषाओं में है. पर इनमें भारत की बड़ी लोकभाषाएं शामिल क्यों नहीं हैं?
हिंदी दिवस पर विशेष: जितना बोझ आप बच्चों पर लाद रहे हैं डेढ़ लाख शब्दों का स्त्रीलिंग पुल्लिंग याद करने का, उतना मेहनत में बच्चा रॉकेट बना देगा.
हिंदी दिवस पर विशेष: हम अपनी भाषा की महानता की गाथा में दूसरी भाषाओं के प्रति एक स्पर्धाभाव ले आते हैं. यह ठीक बात नही है. इससे किसी भी भाषा को आगे बढ़ने और दूसरे भाषायी-सांस्कृतिक स्थलों पर फूलने-फलने की संभावना न्यूनतम हो जाती है.
शायर और गीतकार गुलज़ार ने कहा कि हमें आज भी सांस्कृतिक आज़ादी नहीं मिल सकी है.
लोकसभा में किरण रिजिजू ने बताया कि भाषा का विकास सामाजिक आर्थिक राजनैतिक विकासों द्वारा प्रभावित होता है, भाषा संबंधी कोई मानदंड निश्चित करना कठिन है.