Indian Medical Association

Muzaffarpur: People take part in a candle light march to protest against the death of children due to Acute Encephalitis Syndrome (AES), in Muzaffarpur, Sunday, June 23, 2019. (PTI Photo) (PTI6_23_2019_000113B)

बिहार: चमकी बुखार से मरने वालों में अधिकतर गरीब परिवारों के बच्चे, 62 फीसदी लड़कियां

बिहार में इस साल एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से जिन बच्चों की मौत हुई उनमें से 85 फीसदी से अधिक परिवार दिहाड़ी मजदूर हैं. वहीं, इस साल मरने वाले 168 बच्चों में से 104 लड़कियां थीं.

असम: डॉक्टर की पीट-पीटकर हत्या मामले में 21 गिरफ़्तार

यह मामला असम के जोरहाट का है. चाय बागान के अस्थायी कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत के बाद 250-300 लोगों की भीड़ ने अस्पताल का घेराव कर डॉक्टर पर हमला कर दिया, जिसमें डॉक्टर की मौत हो गई. आईएमए और असम के डॉक्टरों ने 3 सितंबर को राज्यभर में 24 घंटे की हड़ताल की घोषणा की है.

‘राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से स्वास्थ्य सेवा की लागत बढ़ेगी, मेडिकल कॉलेज मनमानी पैसे वसूलेंगे’

संसद ने हाल ही में भारतीय चिकित्सा परिषद के स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग गठित करने वाले विधेयक को मंजूरी दी. भारतीय चिकित्सा संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडेकर का कहना है कि ये फैसला जन विरोधी है. इससे स्वास्थ्य शिक्षा एवं डाक्टरों की गुणवत्ता में कमी आएगी.

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक: सरकार ने सबसे बड़ा सुधार बताया, डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन

कांग्रेस, द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने विधेयक को अलोकतांत्रिक बताया. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा कि यह विधेयक गरीब और छात्र विरोधी है तथा मौजूदा संस्करण में सिर्फ दिखावटी बदलाव किए गए हैं.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

बिहार में डॉक्टरों के 57 फीसदी और नर्सों के 71 फीसदी पद खाली

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाख़िल कर ये जानकारी दी. हाल ही में चमकी बुखार के कारण राज्य में 150 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

‘सरकार ईमानदारी से काम करे, तो अगले साल इंसेफलाइटिस से एक भी बच्चे की जान नहीं जाएगी’

साक्षात्कार: बिहार में इस साल अब तक एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते मुज़फ़्फ़रपुर व उसके आसपास के ज़िलों में 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. यह बीमारी 1995 में सामने आई थी, तब से हर साल बच्चों की मौत हो रही है, कभी कम तो कभी ज़्यादा. इस बीमारी के तमाम पहलुओं को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर में साढ़े तीन दशक से काम कर रहे प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.अरुण शाह से उमेश कुमार राय की बातचीत.

बिहार में बच्चों की मौत के लिए प्रशासनिक विफलता व राज्य की उपेक्षा ज़िम्मेदार: डॉक्टरों की टीम

बिहार में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से 150 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. अकेले मुज़फ़्फ़रपुर में तकरीबन 132 बच्चे इस बीमारी से मारे जा चुके हैं.

नीतीश सरकार ने चमकी बुखार पर शोध, जागरूकता, पुनर्वास के लिए कोई फंड नहीं मांगा

चमकी बुखार या एईएस से बिहार में अब तक क़रीब 150 बच्चों की मौत हो चुकी है. एईएस से निपटने के लिए बिहार सरकार की लापरवाही का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन 2019-20 के तहत इस पर शोध, पीड़ितों का पुनर्वास और लोगों को जागरूक करने के लिए किसी फंड की मांग नहीं की.

बिहार: चमकी बुखार से बच्चों की मौत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले 39 लोगों पर केस दर्ज

बीते 18 जून को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुज़फ्फ़रपुर दौरे पर जाने के दौरान हरिवंशपुर गांव के लोगों ने चमकी बुखार से बच्चों की मौत और पानी की कमी को लेकर सड़क का घेराव किया था, जिसके चलते पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. नामजदों में क़रीब आधे दर्जन वे लोग हैं जिनके बच्चों की मौत चमकी बुखार से हुई है.

चमकी बुखार से प्रभावित करीब 75 फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं: रिपोर्ट

बिहार सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में ये जानकारी सामने आई है. राज्य में एईएस या चमकी बुखार से अब तक 130 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बिहार सरकार को नोटिस जारी किया

कोर्ट ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सात दिन के भीतर हलफनामा दाखिल कर बताएं कि उन्होंने इंसेफलाइटिस से हो रहे बच्चों की मौत को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) being treated at a hospital in Muzaffarpur, Saturday, June 15, 2019. Four more children died Friday in Bihar's Muzaffarpur district reeling under an outbreak of brain fever, taking the toll to 57 this month (PTI Photo)(PTI6_15_2019_000045B)

क्यों 25 साल बाद भी हमें नहीं पता कि बच्चों को चमकी बुखार से कैसे बचाया जाए?

वर्ष 1995 में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में यह एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम का पहला मामला सामने आने के बाद 25 साल गुज़र गए, इसके बाद भी इस बीमारी के सही कारणों और निदान का पता नहीं चल पाया है.

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर में अस्पताल के पीछे मिले मानव कंकाल

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर स्थित जिस अस्पताल के पीछे मानव कंकाल मिले हैं, वहां एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अभी तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार में चमकी बुखार से अभी तक करीब 139 बच्चों की मौत हो चुकी है.

Muzaffarpur: A view of an over-crowded ward with children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) as they undergo treatment at a hospital, in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. The death toll rose to 100 in Muzaffarpur and the adjoining districts in Bihar. (PTI Photo) (PTI6_17_2019_000139B)

बिहार: एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम से अब त​क 136 की मौत, 16 जिलों में फैला

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले में सबसे अधिक अब तक 117 की मौत हुई है. इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, सीतामढ़ी और समस्तीपुर से मौतों के मामले सामने आए हैं.

Muzaffarpur: Children showing symptoms of Acute Encephalitis Syndrome (AES) undergoing treatment at Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH), in Muzaffarpur, Monday, June 17, 2019. (PTI Photo)(PTI6_17_2019_000049B)

बिहार: इंसेफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 115 हुई, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और अश्विनी कुमार चौबे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ मुज़फ़्फ़रपुर की एक अदालत में शिकायत दर्ज कराई गई है.