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निचली अदालतों के जज ज़मानत देने से डरते हैं कि कहीं उन पर निशाना न साधा जाए: सीजेआई चंद्रचूड़

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वरिष्ठ वकीलों को अपने जूनियर साथियों के साथ ग़ुलामों जैसा बर्ताव नहीं करना चाहिए और उन्हें अच्छा वेतन देना चाहिए.

कपिल सिब्बल बोले- सुप्रीम कोर्ट से कोई उम्मीद नहीं बची, वकीलों ने की अवमानना कार्यवाही की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों को लेकर कहा कि यदि आपको लगता है कि जज हमेशा क़ानून के अनुसार निर्णय लेते हैं, तो आप ग़लत हैं. राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मामले कुछ चुनिंदा जजों को दिए जाते हैं और निर्णय का क्या होगा, यह कोई भी बता सकता है.

हाईकोर्ट के जुर्माना लगाने के फ़ैसले पर शीर्ष अदालत को हमेशा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ आरोप लगाने वाले एक अधिवक्ता को दिए जुर्माना भरने के आदेश को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि कई बार वकीलों को अनुशासित करने के लिए जुर्माना लगाया जाता है और शीर्ष अदालत को उन फैसलों में दख़ल देकर उन्हें कमज़ोर नहीं करना चाहिए.

न्याय से इनकार करने से अंतत: अराजकता फैलेगी: सीजेआई रमना

श्रीनगर में हुए एक समारोह में सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह ज़रूरी है कि लोग महसूस करें कि उनके अधिकारों और सम्मान को मान्यता दी गई है और उन्हें संरक्षित किया गया है. उन्होंने जोड़ा कि हम अपनी अदालतों को समावेशी और सुलभ बनाने में बहुत पीछे हैं. अगर इस पर तत्काल ध्यान नहीं देते हैं, तो न्याय तक पहुंच का संवैधानिक आदर्श विफल हो जाएगा.

न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी कम, शीर्ष अदालत में 1950 से सिर्फ़ 11 महिला जज: जस्टिस बनर्जी

पहले ‘अंतराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस’ के कार्यक्रम में जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व है. कार्यक्रम में जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि उच्च न्यायालयों के 680 न्यायाधीशों में 83 महिला न्यायाधीशों का होना बहुत कम संख्या है और निचली अदालतों में क़रीब 30 प्रतिशत महिला न्यायिक अधिकारी हैं.

इस समय न्यायपालिका विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही है: जस्टिस ओका

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में हाल में नियुक्त किए गए जस्टिस अभय एस. ओका  ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि क़ानूनी पेशे के सदस्यों को न्यायपालिका में देश के नागरिकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में काम करना चाहिए. देश में इस समय न्यायाधीशों और जनसंख्या का अनुपात प्रति 10 लाख लोगों के लिए 17 या 18 न्यायाधीश हैं. न्यायाधीशों की कमी की समस्या से निपटा जाना चाहिए और इस अनुपात में सुधार किया जाना चाहिए.

दिल्ली पुलिस ने ऑडिट के बाद सेवानिवृत्त अधिकारियों और जजों की सुरक्षा में कटौती की: रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुलिस द्वारा किए गए ऑडिट में पता चला है कि 535 सुरक्षाकर्मियों को उन पूर्व आयुक्तों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और न्यायाधीशों के साथ नेताओं की सुरक्षा में तैनात किया गया था, जिन्हें कोई ख़तरा नहीं है. इसके बाद पुलिस ने इन लोगों की सुरक्षा की समीक्षा की और इनकी सुरक्षा या तो हटा दी गई या इसे कम कर दिया.

आंध्र प्रदेश: जजों पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी मामले में सीबीआई ने चार और चार्जशीट दाख़िल की

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू की थी, जिसमें आरोप है कि राज्य में अहम पदों पर बैठे कुछ महत्वपूर्ण लोगों ने जान-बूझकर सुप्रीम और हाईकोर्ट के कुछ जजों पर आदेश सुनाने में जाति और भ्रष्टाचार संबंधी आरोप लगाए हैं.

केंद्र ने कोर्ट से कहा- जजों के लिए राष्ट्रीय स्तर का सुरक्षा बल बनाना व्यवहार्य नहीं होगा

सुप्रीम कोर्ट झारखंड के धनबाद में एक न्यायाधीश की कथित हत्या के मद्देनज़र देशभर में न्यायाधीशों और वकीलों की सुरक्षा से जुड़े स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई कर रही है. विभिन्न राज्यों द्वारा जवाब दाख़िल नहीं करने को लेकर नाराज़ शीर्ष अदालत ने मामले में इन पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए 10 दिन के अंदर जवाबी हलफ़नामा दाख़िल करने को कहा है.

न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ अपमानजनक पोस्ट डालने के मामले में सीबीआई ने पांच को गिरफ़्तार किया

सीबीआई ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री डालने के मामले में 16 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था. इस मामले में वाईएसआर कांग्रेस के सांसद नंदीगाम सुरेश और एक अन्य नेता की भूमिका जांच के दायरे में है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

क़रीब 57.51 लाख लंबित मामलों में 54 प्रतिशत पांच उच्च न्यायालयों में: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के 25 उच्च न्यायालयों में 57.51 लाख से अधिक लंबित मामलों में 54 प्रतिशत मामले पांच उच्च न्यायालयों- इलाहाबाद, पंजाब एवं हरियाणा, मद्रास, बॉम्बे और राजस्थान में हैं. राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के डेटा के अनुसार, 56.4 प्रतिशत लंबित मामले पिछले पांच वर्षों के दौरान मामले दायर किए गए हैं, जबकि 40 प्रतिशत लंबित मामले 5 से 20 साल पहले दर्ज किए गए थे.

क़ानून को छोड़कर न्यायाधीशों को बाकी सभी प्रभावों से मुक्त रहना चाहिए: जस्टिस गोविंद माथुर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर ने रिटायर होने के बाद अपने विदाई भाषण में कहा कि एक सभ्य भारत के लिए यह हम सब की ज़िम्मेदारी है कि न्यायपालिका को मज़बूत करें.

देश के उच्च न्यायालयों में जजों के ख़ाली पदों की संख्या बढ़ती जा रही है: क़ानून मंत्रालय

क़ानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक उच्च न्यायालयों में 420 न्यायाधीशों की कमी है, जो इस वर्ष अब तक सर्वाधिक है. एक अक्टूबर तक उच्च न्यायालयों में 659 न्यायाधीश थे, जबकि कुल मंज़ूर पद 1079 हैं.

देश के 25 उच्च न्यायालयों में जजों के 414 पद ख़ाली

उच्च न्यायालयों में कुल 1,079 न्यायाधीश होने चाहिए. क़ानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक एक सितंबर को हाईकोर्ट में जजों के 414 पद खाली थे, जो इस साल की अब तक की सर्वाधिक रिक्तियां हैं.

क्या कोर्ट को भी एफआईआर के लिए सरकार से पूछना होगा?

राजस्थान में वसुंधरा सरकार सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के सत्र में एक ऐसा विधेयक लाने जा रही है जो सांसद, विधायक, जज और अफसरों को कानूनी कार्रवाई से कवच प्रदान करेगी.