Maharashtra Government

A farmer shows wheat crop damaged by unseasonal rains in his wheat field at Sisola Khurd village in the northern Indian state of Uttar Pradesh, March 24, 2015. To match Insight INDIA-MODI/ Picture taken March 24, 2015. REUTERS/Anindito Mukherjee

मराठवाड़ा के एमए पास किसान समेत तीन ने की आत्महत्या

मराठवाड़ा के नांदेड ज़िले का एक अन्य किसान क़र्ज़ की वजह से परेशान था, वहीं ओडिशा में आत्महत्या करने वाले किसान की फसल ख़राब हो गई थी.

महिला क़ैदियों के साथ रहने वाले बच्चों की सुविधाओं का ध्यान रखे महाराष्ट्र सरकार: अदालत

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि बच्चों को किशोर न्याय क़ानून के तहत देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है.

फर्ज़ी जाति प्रमाणपत्र से मिली नौकरी और दाखिले अवैध: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को ग़लत ठहराया जहां उसने फर्ज़ी सर्टिफिकेट के आधार पर व्यक्ति को नौकरी की लंबी अवधि के चलते सेवा में बने रहने की अनुमति की बात कही थी.

बलात्कार पीड़िताओं से जन्मे बच्चों का ध्यान रखे महाराष्ट्र सरकार, वे भी पीड़ित हैं: अदालत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, बलात्कार पीड़िताओं के बच्चों का अच्छे से ख़्याल रखा जाना चाहिए, उन्हें अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए.

आंबेडकर पर फूल-माला चढ़ाओ पर उन्हें पढ़ने मत दो!

बाबा साहब के नाम पर बहुत सारे आयोजन और कर्मकांड हो रहे हैं. लेकिन उनके विचार, उनके लेखन और उनकी रचनाओं को लोगों के बीच पहुंचाने की कोशिश सिरे से गायब है.

महाराष्ट्र में डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म, अब तक 135 मरीज़ों की मौत

डॉक्टरों पर मरीजों के परिजन द्वारा बढ़ते हमले के ख़िलाफ़ महाराष्ट्र के तकरीबन चार हज़ार डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे. बॉम्बे हाईकोर्ट की दख़ल के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल ख़त्म कर दी है. हालांकि इस दौरान तकरीबन 150 मरीज़ों की मौत हो चुकी है.

जनता के पैसों से नेताओं को सुरक्षा क्यों दी जा रही है: बॉम्बे हाईकोर्ट

एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि नेताओं की सुरक्षा पर हो रहे खर्च पर रोक लगनी चाहिए. राजनीतिक दल उनका खर्च उठाने में सक्षम हैं. ऐसे में सरकार को उनकी सुरक्षा का खर्च उठाने की जरूरत नहीं है.

बलात्कार पीड़ितों को मुआवजा देना सरकार का दायित्व है, परोपकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बलात्कार पीड़ितों को लेकर महाराष्ट्र सरकार के रवैये को ‘निष्ठुर’ करार देते हुए कहा कि ऐसे लोग याचक नहीं हैं और महिला पीड़ितों को मुआवजा देना सरकार का दायित्व है, परोपकार नहीं.