Mahatma Gandhi

Jaipur: Union Home minister and senior BJP leader Rajnath Singh adderesses a press conference in Jaipur, Monday, April 22, 2019. (PTI Photo) (PTI4_22_2019_000132B)

राजनाथ सिंह झूठ क्यों बोले?

अगर राजनाथ सिंह को झूठ ही सही, सावरकर के माफ़ीनामे को स्वीकार्य बनाने के लिए गांधी की छतरी लेनी पड़ी तो यह एक और बार सावरकर पर गांधी की नैतिक विजय है. नैतिक पैमाना गांधी ही रहेंगे, उसी पर कसकर सबको देखा जाएगा. जब-जब भारत भटकता है, दुनिया के दूसरे देश और नेता हमें गांधी की याद दिलाते हैं. 

मोदी सरकार और सावरकर का सच…

सेल्युलर जेल के सामने बने शहीद उद्यान में वीडी सावरकर की मूर्ति और संसद दीर्घा में उनका तैल चित्र लगाकर भाजपा सरकार ने उनकी गद्दारी के प्रति जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की है.

झूठ के सहारे सावरकर का महिमामंडन क्यों?

वीडियो: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि एक ख़ास वर्ग विनायक दामोदर सावरकर की दया याचिका को ग़लत तरीके से प्रचारित कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि सावरकर ने जेल में अपनी सज़ा काटते हुए महात्मा गांधी के कहने पर अंग्रेज़ों के सामने दया याचिका दायर की थी.

क्या वेरियर एल्विन के महात्मा गांधी से दूर जाने की वजह उनका आदिवासियों के क़रीब जाना था

ब्रिटिश मूल के एंथ्रोपोलॉजिस्ट वेरियर एल्विन ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई ख़त्म कर एक ईसाई मिशनरी के रूप में भारत आए थे. 1928 में वे पहली बार महात्मा गांधी को सुनकर उनसे काफी प्रभावित हुए और उनके निकट आ गए. गांधी उन्हें अपना पुत्र मानने लगे थे, लेकिन जैसे-जैसे एल्विन आदिवासियों के क़रीब आने लगे, उनके और गांधी के बीच दूरियां बढ़ गईं.

हिंदुस्तान में चल रही भाषाई सियासत पर गांधी का क्या नज़रिया था…

महात्मा गांधी का मानना था कि अगर हमें अवाम तक अपनी पहुंच क़ायम करनी है तो उन तक उनकी भाषा के माध्यम से ही पहुंचा जा सकता है. इसलिए वे आसान भाषा के हामी थे जो आसानी से अधिक से अधिक लोगों की समझ में आ सके. लिहाज़ा गांधी हिंदी और उर्दू की साझी शक्ल में हिंदुस्तानी की वकालत किया करते थे.

‘यह गांधी कौन था?’ ‘वही, जिसे गोडसे ने मारा था’

गांधी को लिखे पत्र में हरिशंकर परसाई कहते हैं, ‘गोडसे की जय-जयकार होगी, तब यह तो बताना ही पड़ेगा कि उसने कौन-सा महान कर्म किया था. बताया जाएगा कि उस वीर ने गांधी को मार डाला था. तो आप गोडसे के बहाने याद किए जाएंगे. अभी तक गोडसे को आपके बहाने याद किया जाता था. एक महान पुरुष के हाथों मरने का कितना फायदा मिलेगा आपको.’

राष्ट्रपति जी, ‘राम सबके और सबमें हैं’ उन्हें समझाइए जो राम नाम पर हमवतनों का जीना मुहाल किए हैं

अयोध्या में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपने संबोधन में न अवध की ‘जो रब है वही राम है’ की गंगा-जमुनी संस्कृति की याद आई, न ही अपने गृहनगर कानपुर के उस रिक्शेवाले की, जिसे बीते दिनों बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम होने के चलते पीटा और जबरन ‘जय श्रीराम’ बुलवाकर अपनी ‘श्रेष्ठताग्रंथि’ को तुष्ट किया था.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अगले अध्यक्ष होंगे पूर्व जज जस्टिस अरुण मिश्रा

इस पद के लिए तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को भी शॉर्टलिस्ट किया गया था, लेकिन इन सबको दरकिनार कर चयन समिति ने जस्टिस अरुण मिश्रा को तरजीह दी. पिछले साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर होते हुए भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ की थी, जिसके कारण उनकी आलोचना हुई थी कि वह किस हद तक सरकार के क़रीबी हैं.

महादेव देसाई की डायरी के ज़रिये साबरमती आश्रम में टीकाकरण पर हुई चर्चा का पुनर्पाठ

गांधी कहते थे कि वे किसी को चेचक का टीका लेने से नहीं रोकेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपनी मान्यता नहीं बदल सकते और टीकाकरण को बढ़ावा नहीं दे सकते हैं.

मध्य प्रदेश: हिंदू महासभा 14 मार्च को यात्रा निकालकर गोडसे से जुड़े ‘तथ्यों’ का प्रचार करेगी

अखिल भारतीय हिंदू महासभा की ओर से कहा गया है कि वह महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे एवं सह-षड्यंत्रकारी नारायण राव आप्टे से जुड़े तथ्यों की जानकारी देने के लिए 14 मार्च को ग्वालियर से दिल्ली तक वाहन रैली निकालेगी. इस पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू महासभा, भाजपा और आरएसएस के कुछ तत्व नफ़रत के सौदागर हैं.

किसानों को सत्याग्रह अपनाकर प्रदर्शन जारी रखना चाहिएः मेधा पाटकर

गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा मामले में जिन 37 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें मेधा पाटकर भी हैं. उन्होंने कहा कि कृषि क़ानून सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं है बल्कि खेती और उससे जुड़ा हर शख़्स इनसे प्रभावित होगा. लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ खड़े होने की ज़रूरत है.

गांधी को हिंदू देशभक्त बताना उन्हें ओछा करना है…

गांधी हिंदू थे, गीता, उपनिषद, वेद आदि के लिए भी उनके मन में ऊंचा स्थान था, पर उनका साफ कहना था कि अगर ये पवित्र ग्रंथ अस्पृश्यता का समर्थन करते हों, तो वे उन्हें भी ठुकरा देंगे. गांधी का एक जीवन दर्शन था जिसकी कसौटी पर महान से महान व्यक्ति, ग्रंथ या विचार को कसा ही जाना था.

PRECIOUS CARGO: The OOCL Europe left July 20 from South Carolina for the Netherlands carrying a refrigerated container filled with human body parts. Here, it is docked at the Port of Newark in New Jersey in November, after it delivered the parts to Europe. REUTERS/Brendan McDermid

क्या है आरसीईपी और भारत के इससे अलग होने की वजह

हाल ही में 15 देशों ने आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है. इस समूह का प्रबल दावेदार माने जा रहे भारत ने इससे अलग होने का निर्णय लेते हुए कहा कि इससे उसकी चिंताओं का संतोषजनक समाधान नहीं किया गया है.

गांधी को एक व्यक्ति ने नहीं, एक विचारधारा ने मारा था…

पुस्तक समीक्षा: गांधी के विचारों से प्रतिक्रियावादी पीछा नहीं छुड़ा सकते इसलिए गांधी पर हमले जारी रहेंगे. ऐसे में ‘उसने गांधी को क्यों मारा’ की शक्ल में उनकी हत्या के इतिहास को उसके पूरे यथार्थ से बचाए रखना आने वाली पीढ़ियों की चेतना को कुंद किए जाने के ख़िलाफ़ एक मुनासिब कार्रवाई है.