Mathura Court

हाथरस गैंगरेप और हत्या: पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को इलाहाबाद हाईकोर्ट का ज़मानत देने से इनकार

5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. पुलिस का आरोप है कि आरोपी क़ानून-व्यवस्था ख़राब करने के लिए हाथरस जा रहा था. कप्पन पर पीएफआई से जुड़े होने का भी आरोप है.

मथुरा-ज्ञानवापी विवाद: क्या है 1968 का समझौता और उपासना स्थल अधिनियम

वीडियो: वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह को लेकर चल रहे विवादों के चलते 1968 के समझौते और 1991 के उपासना स्थल अधिनियम पर चर्चा हो रही है. इनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं याक़ूत अली.

मथुरा: शाही ईदगाह मस्जिद में कथित ‘गर्भ गृह’ के शुद्धिकरण की अनुमति देने के लिए याचिका दाख़िल

याचिकाकर्ता दिनेश चंद्र शर्मा ने कथित रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद के अंदर मौजूद केशव देव मंदिर के गर्भ गृह का ‘शुद्धिकरण’ करने की अनुमति अदालत से मांगी है. दिनेश अखिल भारत हिंदू महासभा के कोषाध्यक्ष हैं और उन्होंने 19 मई को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में भी ऐसी ही एक याचिका दाख़िल की थी. दोनों याचिकाएं अदालत में लंबित हैं.

कृष्ण जन्मभूमि मामला: अदालत शाही ईदगाह मस्जिद हटाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर विचार करेगी

मथुरा की ज़िला अदालत ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर वह भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास को सौंपने के मामले में दिए गए आदेश पर फिर से विचार करते हुए सुनवाई के लिए मंज़ूर कर लिया. सितंबर 2020 में इस याचिका को ख़ारिज कर​ दिया गया था. इस समय इसी तरह की मांग को लेकर स्थानीय अदालतों में 12 से अधिक और मामले में भी चल रहे हैं.

केयूडब्ल्यूजे का आरोप- सिद्दीक़ कप्पन को नहीं मिली मेडिकल सहायता, यूपी सरकार के ख़िलाफ़ याचिका

केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को पांच अक्टूबर 2020 को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि उचित चिकित्सीय देखभाल की कमी की वजह से कप्पन बीमार हैं और वे गंभीर दर्द से जूझ रहे हैं.

सिद्दीक़ कप्पन की गिरफ़्तारी का एक साल पूरा होने पर पत्रकारों ने की रिहाई की मांग, प्रदर्शन

5 अक्टूबर 2020 को केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य को हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले की रिपोर्टिंग के लिए जाते समय गिरफ़्तार किया गया था. कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर विभिन्न पत्रकार संघों ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि उन पर लगाए गए आरोप मनमाने हैं.

यूपी पुलिस ने चार्जशीट में कहा- सिद्दीक़ कप्पन अपने लेख में मुस्लिमों को भड़काते हैं

यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. पुलिस ने कप्पन के लेखों के आधार पर कहा है कि वे ज़िम्मेदार पत्रकार नहीं हैं और माओवादियों के समर्थन में लिखते हैं.

हाथरस मामला: शांतिभंग के लिए गिरफ़्तार अतीक़-उर-रहमान की हालत गंभीर, परिवार ने की रिहाई की मांग

वीडियो: देशद्रोह और यूएपीए के तहत गिरफ़्तार उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर निवासी अतीक़-उर-रहमान की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है. परिवार और उनके वकील का कहना है कि वह दिल की बीमारी से पीड़ित हैं. बार-बार अर्ज़ी देने के बाद भी न तो सुनवाई हो रही न उनका सही इलाज करवाया जा रहा है. द वायर ने अतीकुर्रहमान के वक़ील मधुवन दत्त, भाई और पत्नी से बात की.

पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज, बाकी तीन सदस्यों की पहले ही हो चुकी ख़ारिज

यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद उन पर शांतिभंग और यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए थे. आरोप है कि कप्पन और उनके साथी हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के मद्देनज़र सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे.

उत्तर प्रदेश: यूएपीए के तहत जेल में बंद पत्रकार सिद्दीक कप्पन की मां का निधन

यूपी पुलिस ने पिछले अक्टूबर में हाथरस जाने के रास्ते में केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था, जिसके बाद उन पर शांतिभंग और यूएपीए के तहत मामले दर्ज किए गए थे. इसी हफ्ते मथुरा की स्थानीय अदालत ने इन सभी को शांतिभंग के आरोपों से मुक्त किया है.

हाथरस मामलाः पत्रकार कप्पन, तीन अन्य के ख़िलाफ़ शांति भंग के आरोप रद्द

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले साल पांच अक्टूबर को हाथरस जाने के रास्ते में केरल के एक पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. उन पर आरोप लगाया था कि हाथरस सामूहिक बलात्कार और हत्या मामले के मद्देनज़र सांप्रदायिक दंगे भड़काने और सामाजिक सद्भाव को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे. यूपी सरकार ने दावा किया था कि कप्पन पत्रकार नहीं, बल्कि अतिवादी संगठन पीएफआई के सदस्य हैं.

सुप्रीम कोर्ट का यूपी सरकार को आदेश, केरल के पत्रकार को इलाज के लिए बाहर भेजा जाए

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को यूएपीए के आरोपों के तहत गिरफ़्तार केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश देते हुए कहा कि एक विचाराधीन क़ैदी को भी जीने का अधिकार है.

सिद्दीक़ कप्पन को रिहा करने के लिए सीजेआई से मांग, कहा- उनका जीवन गंभीर ख़तरे में है

केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन की पत्नी की ओर से लिखे गए पत्र में दावा किया गया है कि उन्हें मथुरा के मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में जानवर की तरह खाट से बांधा गया है और न वे खाना खा पा रहे हैं और न ही पिछले चार दिनों से भी अधिक समय से टॉयलेट जा सके हैं. कप्पन को पिछले साल हाथरस जाते समय गिरफ़्तार किया गया था.

हाथरस मामला: यूपी एसटीएफ ने पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और सात अन्य के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले साल पांच अक्टूबर को हाथरस जाने के रास्ते में केरल के एक पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन समेत चार युवकों को गिरफ़्तार किया था. यूपी सरकार ने कोर्ट में दाख़िल हलफ़नामे में दावा किया है कि सिद्दीक़ कप्पन पत्रकार नहीं, बल्कि अतिवादी संगठन पीएफआई के सदस्य हैं.

बीमार मां से मिलने के लिए पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को सुप्रीम कोर्ट से मिली पांच दिन की ज़मानत

अक्टूबर 2020 में हाथरस में दलित युवती से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद वहां जा रहे केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को ज़मानत देते हुए शीर्ष अदालत ने उन्हें परिजनों और डॉक्टरों के अलावा किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी है. पीठ ने यह भी कहा इस दौरान वे सोशल मीडिया समेत मीडिया को कोई इंटरव्यू नहीं देंगे.