N. Ram

पेगासस जासूसी मामले में एसआईटी जांच की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा एडिटर्स गिल्ड

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की याचिका में कहा गया कि प्रेस की आज़ादी पत्रकारों की रिपोर्टिंग में सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा हस्तक्षेप नहीं किए जाने पर निर्भर होती है, जिसमें सूत्रों के साथ सुरक्षा व गोपनीयता के साथ बात करने की उनकी क्षमता, सत्ता के दुरुपयोग एवं भ्रष्टाचार की जांच, सरकारी अक्षमता का खुलासा करना, और सरकार के विरोध में या विपक्ष से बात करना शामिल है.

मोदी सरकार पेगासस जासूसी के दुष्प्रभावों को कब तक नज़रअंदाज़ कर सकती है?

पत्रकारिता संस्थान अपने संसाधनों के चलते सीमित होते है, इसलिए राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर केवल वास्तविक जांच से ही पेगासस के उपयोग की सही स्तर का पता चलेगा.

पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार, पूछा- सरकार बताए स्पायवेयर प्रयोग किया या नहीं

एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर भी शामिल है, ने सिलसिलेवार रिपोर्ट्स में बताया है कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं सहित 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में शामिल थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग की गई या वे संभावित निशाने पर थे.

कोर्ट का मान ट्वीट से नहीं, जजों के काम और उनके फ़ैसलों से घटता है: अरुण शौरी

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराए के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने कहा कि इससे पता चलता है कि लोकतंत्र का यह स्तंभ इतना खोखला हो चुका है कि महज़ दो ट्वीट से इसकी नींव हिल सकती है.

अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली गई, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने की छूट दी

पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और कार्यकर्ता एवं वकील प्रशांत भूषण ने याचिका दायर कर अदालत की अवमानना क़ानून, 1971 को चुनौती दी थी और कहा था कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

अवमानना क़ानून को चुनौती देने वाली याचिका को जस्टिस चंद्रचूड़ और जोसेफ़ की पीठ से हटाया गया

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और कार्यकर्ता एवं वकील प्रशांत भूषण की तरफ से दायर याचिका के संबंध में अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि इस मामले को जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ के सामने क्यों सूचीबद्ध नहीं किया गया?

अदालत की अवमानना अधिनियम के ख़िलाफ़ एन. राम, प्रशांत भूषण और अरुण शौरी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 2 (सी) (i) को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने के साथ अस्पष्ट, व्यक्तिपरक और स्पष्ट तौर पर मनमाना है.

मीडिया में डर का माहौल बना हुआ है: एन. राम

द वायर से बात करते हुए द हिंदू के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने रफाल सौदे और इसकी मीडिया कवरेज़ को लेकर मोदी सरकार की हालिया धमकियों पर अपनी राय साझा की.

New Delhi: In this Feb 14, 2017 file picture a Rafale fighter aircraft flies past at the 11th edition of Aero India 2017, in Bengaluru. Chief of the Air Staff, Air Chief Marshal BS Dhanoa defended the Rafale purchase as "a game changer" at the annual Air Force press conference in New Delhi, Wednesday. (PTI Photo) (PTI10_3_2018_000110B)

हम भी भारत: रफाल पर पत्रकारों को धमकी, क्या छिपा रही है मोदी सरकार?

इस हफ्ते हम भी भारत में रफाल मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा द हिंदू की रिपोर्ट को चोरी के दस्तावेज़ के हवाले से छापने के आरोप और अख़बार पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत कार्रवाई की बात पर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु और वकील सरीम नावेद से चर्चा कर रही हैं.

सरकार की मीडिया के ख़िलाफ़ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के इस्तेमाल की कोशिश निंदनीय: मीडिया संगठन

रफाल मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा द हिंदू की रिपोर्ट को चोरी के दस्तावेज़ के हवाले से छापने के आरोप और अख़बार पर कार्रवाई की बात कहने की एडिटर्स गिल्ड समेत विभिन्न प्रेस संगठनों ने आलोचना की है.

रफाल की फाइल पर सीक्रेट का तर्क बोगस है, जैसे चौकीदार का जागते रहो कहना बोगस है

सीक्रेट आउट होने पर ही घोटाला आउट होता है. घोटाला आउट होने पर फाइल को सीक्रेट बताने का फार्मूला पहली बार आउट हुआ है. प्रधानमंत्री को हर बात में ख़ुद को चौकीदार नहीं कहना चाहिए. ख़ुद को चौकीदार और प्रधान सेवक कहते-कहते भूल गए हैं कि वे भारत के प्रधानमंत्री हैं, इसलिए जागते रहो, जागते रहो बोलकर कुछ भी बोल जाते हैं.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi addresses a press conference regarding Vijay Mallya's allegations, in New Delhi, Thursday, Sept 13, 2018. Gandhi accused Arun Jaitley of lying on meeting with Vijay Mallya. (PTI Photo/Subhav Shukla) (PTI9_13_2018_000071B)

रफाल मामले में प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए: राहुल

रफाल दस्तावेज़ चोरी पर कांग्रेस अध्यक्ष बोले- दो करोड़ रोजगार गायब हो गया. किसानों के बीमा का पैसा गायब हो गया. 15 लाख रुपया गायब हो गया. अब रफाल की फाइलें गायब हो गईं.

रफाल: दस्तावेज़ ‘चोरी’ के आरोप के बाद एन. राम ने कहा- अपने सूत्रों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध

द हिंदू के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने कहा कि रफाल सौदे से जुड़ी जानकारियां दबा कर या छिपा कर रखी गई थीं जिसके कारण ही उनसे जुड़े दस्तावेज़ जनहित में प्रकाशित किए गए. उन्होंने कहा कि आप इसे चोरी हो गए दस्तावेज़ कह सकते हैं लेकिन हम इसको लेकर चिंतित नहीं हैं.

‘प्रधानमंत्री बताएं कि रफाल सौदे का मक़सद वायुसेना को मज़बूत करना था या एक उद्योगपति को’

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि भाजपा के शासनकाल में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की परिभाषाएं बदल दी गई हैं. जो रफाल सौदे का गुणगान कर रहे हैं वे देशभक्त माने जा रहे हैं, जो सवाल उठा रहे हैं उन्हें देशद्रोही करार दिया जा रहा है.

रफाल सौदे में पीएमओ का दख़ल और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति

वीडियो: एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रफाल सौदे में पीएमओ के दखल पर रक्षा मंत्रालय ने आपत्ति जताई थी. द वायर द्वारा भी इस साल जनवरी में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि रक्षा मंत्रालय के रफाल क़रार की शर्तों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय समझौता कर रहा था. इस मामले पर द वायर के संस्थापक संपादक एमके वेणु से अजय आशीर्वाद की बातचीत.