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2002 गुजरात दंगा: अदालत ने तीन मामलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हटाने का आदेश दिया

2002 के गुजरात दंगा पीड़ितों के रिश्तेदारों द्वारा दायर तीन दीवानी मामलों में से प्रतिवादी के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हटाने का आदेश देते हुए एक तालुका अदालत ने कहा कि वादी यह स्थापित करने के लिए कोई सामग्री नहीं ले आ पाए, जो यह स्थापित करती हो कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अपराध की जगह पर मौजूद थे.

दिल्ली दंगे: क्या इंसाफ का गला घोंटने के लिए केंद्र सरकार ‘गुजरात मॉडल’ अपना रही है?

गुजरात दंगों के बाद की गई कुछ रिकॉर्डिंग्स बताती हैं कि किस तरह संघ परिवार के सदस्यों को पब्लिक प्रॉसिक्यूटर्स के बतौर नियुक्त किया गया, जिन्होंने उन मामलों को ‘सेटल’ करने में मदद की, जिनमें आरोपी हिंदू थे. अब दिल्ली दंगों के मामले में केंद्र सरकार अपनी पसंद के पब्लिक प्रॉसीक्यूटर चुनना चाहती है.

Varanasi: Prime Minister Narendra Modi speaks during the inauguration of various development projects, in Varanasi, Tuesday, September 18, 2018. (PIB Photo via PTI)(PTI9_18_2018_000050B)

गुजरात: 2002 दंगा मामले में नरेंद्र मोदी और तत्कालीन मंत्रियों को क्लीनचिट

2002 में गुजरात के गोधरा में हुए दंगों की जांच को लेकर गठित नानावटी आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के बाद गोधरा में भड़के दंगे सुनियोजित नहीं थे.