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अदालत कम लोग पहुंचते हैं, अधिकतर आबादी मौन रहकर पीड़ा सहती है: प्रधान न्यायाधीश

भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने न्याय तक पहुंच को ‘सामाजिक उद्धार का उपकरण’ बताते हुए कहा कि आधुनिक भारत का निर्माण समाज में असमानताओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ किया गया था. लोकतंत्र का मतलब सभी की भागीदारी के लिए स्थान मुहैया कराना है. सामाजिक उद्धार के बिना यह भागीदारी संभव नहीं होगी. 

क़ानूनी पेशा मुनाफ़े में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि समाज की सेवा के लिए है: सीजेआई एनवी रमना

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने ‘क़ानूनी सेवा दिवस’ के मौक़े पर राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि क़ानून में शिक्षित छात्र समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज़ बनने के लिए सशक्त हैं. 

भारत में शिक्षा समावेशी नहीं, शिक्षा के मामले में हम अब भी पीछे: जस्टिस ललित

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित ने गुजरात के भुज में एक कानूनी सेवा शिविर और जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी शिक्षा समावेशी नहीं है. कुछ गांवों और बड़े शहरों में जो शिक्षा प्रदान की जाती है, उनकी गुणवत्ता में कोई अंतर नहीं है. हमें इन सब पर विचार करना चाहिए. जब तक हम इसे हासिल नहीं कर लेते, सतत विकास मानकों के अनुसार शिक्षा के मामले में हम कमज़ोर रहेंगे.

जेल में बंद महिलाओं को अक्सर लांछन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है: प्रधान न्यायाधीश

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने एक कार्यक्रम में कहा कि जेल में बंद महिलाओं को अक्सर  गंभीर पूर्वाग्रह, लांछन और भेदभाव का सामना करना पड़ता है तथा पुरुष क़ैदियों की भांति इन महिला क़ैदियों का समाज में फिर से एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए कल्याणकारी राज्य के रूप में भारत का सेवाएं प्रदान करने का दायित्व बनता है.

थानों में मानवाधिकारों के हनन का सबसे ज़्यादा ख़तरा: सीजेआई रमना

सीजेआई एनवी रमना ने एक कार्यक्रम में कहा कि हमारे संविधान में इस बात की गारंटी दी गई है कि लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा होगी, फिर भी थानों में क़ानूनी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता जिसके अभाव में गिरफ़्तार या हिरासत में लिए गए लोगों को वहां सबसे अधिक ख़तरा रहता है.

राज्य सरकारें कोरोना के चलते रिहा क़ैदियों को आत्मसमर्पण के लिए नहीं कहेंः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सात मई को कोरोना के मामले में अप्रत्याशित बढ़ोतरी पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकारों से उन क़ैदियों को तुरंत रिहा करने के लिए कहा था, जिन्हें पिछले साल ज़मानत या पैरोल दी गई थी. अदालत ने राज्य सरकारों को 23 जुलाई तक क़ैदियों की रिहाई में पालन किए गए मानदंडों की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है.

लॉकडाउन के दौरान जेलों से 42 हज़ार से अधिक विचाराधीन क़ैदियों को किया गया रिहा: रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बीते मार्च महीने में कोरोना वायरस के मद्देनज़र जेलों में भीड़भाड़ को कम करने का निर्देश दिया था. राष्ट्रीय क़ानूनी सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक 9,977 विचाराधीन क़ैदियों को रिहा किया गया.

निर्भया कोष से केवल 5 से 10 फीसद पीड़ितों को ही मुआवज़ा मिला: नालसा

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह चौंकाने वाला है कि आंध्र प्रदेश में 2017 में यौन हिंसा के 901 मामले दर्ज हुए परंतु सिर्फ एक ही पीड़ित को मुआवज़ा मिल सका.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से मांगा निर्भया कोष के तहत जमा धन का विवरण

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 4 माह के अंदर कोष को मिले धन और उससे हुए वितरण की जानकारी देने का निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, रिहाई की सिफ़ारिश के बावजूद क्यों भरी हैं जेलें

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों को जेल में सालों से रह रहे क़ैदियों की स्थिति पर हलफ़नामा दर्ज करने का आदेश दिया है.