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दिल्ली बाल आयोग ने एनसीईआरटी से पाठ्यपुस्तक से एक अध्याय हटाने या संशोधित करने के लिए कहा

दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अनुराग कुंडू ने कहा कि 9वीं कक्षा की अंग्रेज़ी पाठ्यपुस्तक का ‘द लिटिल गर्ल’ नामक अध्याय पितृसत्ता को क़ायम रखता है और परिवार में बुरे व्यवहार को बढ़ावा देता है, इसलिए इसे संशोधित या हटाया जाना चाहिए.

हर 11 मिनट में एक महिला की उसके क़रीबी साथी या परिजन द्वारा हत्या की जाती है: यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने 25 नवंबर को ‘महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा का उन्मूलन’ संबंधी अंतरराष्ट्रीय दिवस से पहले कहा कि महिलाओं के साथ हिंसा दुनिया में सबसे बड़ा मानवाधिकार उल्लंघन है और सरकारों को इससे निपटने के लिए नेशनल एक्शन प्लान लागू करना चाहिए.

पाकिस्तान: सेंसर बोर्ड की समिति ने ‘जॉयलैंड’ को रिलीज़ के लिए मंज़ूरी दी

बीते दिनों पाकिस्तान द्वारा ऑस्कर 2023 के लिए भेजी गई ‘जॉयलैंड’ फिल्म पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने रिलीज़ से ठीक पहले प्रतिबंध लगाते हुए कहा था है कि फिल्म देश के ‘सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों’ के अनुरूप नहीं है. अब सेंसर बोर्ड की समीक्षा समिति ने फिल्म को ‘मामूली कट’ के साथ हरी झंडी दे दी है.

पाकिस्तान ने ऑस्कर में भेजी गई फिल्म ‘जॉयलैंड’ को देश में बैन किया

‘जॉयलैंड’ फिल्म ऑस्कर 2023 के लिए पाकिस्तान द्वारा भेजी गई आधिकारिक प्रविष्टि है, जो 18 नवंबर को पाकिस्तान के सिनेमाघरों रिलीज़ होनी थी. सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि फिल्म देश के ‘सामाजिक मूल्यों और नैतिक मानकों’ के अनुरूप नहीं है.

क़ानूनी पेशे की संरचना सामंती, पितृसत्तात्मक और महिलाओं के अनुकूल नहीं है: सीजेआई चंद्रचूड़

भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने एक आयोजन के दौरान कहा कि कभी-कभी क़ानून और न्याय एक ही रास्ते पर नहीं चलते हैं. क़ानून न्याय का ज़रिया हो सकता है, तो उत्पीड़न का औज़ार भी हो सकता है. क़ानून उत्पीड़न का औज़ार न बने, बल्कि न्याय का ज़रिया बने.

देश के श्रमबल में महिलाओं के साथ होने वाली ग़ैर-बराबरी की जड़ें पितृसत्ता में छिपी हैं

ऑक्सफैम की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारतीय श्रम बाज़ार में महिलाएं पुरुषों की तुलना में भागीदारी और मेहनताने- दोनों पहलुओं पर ग़ैर-बराबरी का सामना करती हैं. इसकी वजहें आर्थिक तो हैं ही, लेकिन इसका मूल समाज की पितृसत्तात्मक व्यवस्था में छिपा है.

क्या एक फिल्म के पोस्टर से ‘आहत’ हुए लोगों की वास्तव में काली में आस्था है

एक स्त्री निर्देशक जब काली की छवि को अपनी बात कहने के लिए चुनती है तो वह लैंगिक न्याय और स्वतंत्रता में उसकी आस्था का प्रतीक है. क्या इंटरनेट पर आग उगल रहे तमाम ‘आस्थावान’ स्त्री स्वतंत्रता के इस उन्मुक्त चित्रण से भयभीत हो गए हैं? या उन्हें काली की स्वतंत्रता के पक्ष में स्त्रियों का बोलना असहज कर रहा है?

‘सारा को वही लोग समझ सकते हैं जिनके पास सारा जैसा दिल हो’

पुस्तक समीक्षा: उर्दू की प्रसिद्ध आलोचक अर्जुमंद आरा द्वारा किए गए सारा शगुफ़्ता की नज़्मों के संग्रह- ‘आंखें’ और ‘नींद का रंग’ के हिंदी लिप्यंतरण हाल में प्रकाशित हुए हैं. ये किताबें शायरी के संसार में उपेक्षा का शिकार रहीं सारा और अपनी नज़र से समाज को देखती-बरतती औरतों से दुनिया को रूबरू करवाने की कोशिश हैं.

महिलाएं पितृसत्तात्मक मानसिकता के अधीन हैं, जो उन्हें देखभाल करने वाली, गृहिणी मानती है: कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार को वास्तविक समानता हासिल करने का सही उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले लगातार भेदभाव के पैटर्न को पहचानकर पूरा करना चाहिए.

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने क़ानूनी शिक्षा में लड़कियों के लिए आरक्षण की हिमायत की

पहले अंतराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस के उपलक्ष्य में प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना ने कहा कि वर्तमान में शीर्ष अदालत में चार महिला न्यायाधीश हैं, जो इसके इतिहास में अब तक की सबसे अधिक संख्या है और निकट भविष्य में भारत पहली महिला प्रधान न्यायाधीश का गवाह बनेगा.

हिंदू और हिजाब

हिंदुओं में अभी उदारता का ज्वार उमड़ पड़ा है, प्रगतिशीलता का भी. वे औरतों को हर परदे, हर बंधन से आज़ाद देखना चाहते हैं. वे कट्टरता के ख़िलाफ़ लड़ना चाहते हैं. लेकिन यह सब वे मुसलमान औरतों के लिए करना चाहते हैं. क्योंकि हिंदू औरतों को तो न कट्टरता और न धर्म के किसी बंधन का कभी शिकार होना होता है!

भारत विश्व के सर्वाधिक असमान देशों में, शीर्ष एक प्रतिशत के पास है राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी

विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 के मुताबिक़, भारत की शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 फीसदी हिस्सा है, जबकि नीचे से 50 फीसदी आबादी की इसमें हिस्सेदारी मात्र 13 फीसदी है.

कमला भसीन: सरहद पर बनी दीवार नहीं, उस दीवार पर पड़ी दरार…

स्मृति शेष: प्रख्यात नारीवादी कमला भसीन अपनी शैली की सादगी और स्पष्टवादिता से किसी मसले के मर्म तक पहुंच पाने में कामयाब हो जाती थीं. उन्होंने सहज तरीके से शिक्षाविदों और नारीवादियों का जिस स्तर का सम्मान अर्जित किया, वह कार्यकर्ताओं के लिए आम नहीं है. उनके लिए वे एक आइकॉन थीं, स्त्रीवाद को एक नए नज़रिये से बरतने की एक कसौटी थीं.

नहीं रहीं प्रख्यात महिला अधिकार कार्यकर्ता और लेखक कमला भसीन

भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में नारीवादी आंदोलन की प्रमुख आवाज़ रहीं 75 वर्षीय कमला भसीन का शनिवार तड़के निधन हो गया. वे लैंगिक समानता, शिक्षा, ग़रीबी-उन्मूलन, मानवाधिकार और दक्षिण एशिया में शांति जैसे मुद्दों पर 1970 से लगातार सक्रिय थीं.

हिंदी सिनेमा अभी भी जाति के मुद्दों पर विशिष्ट चुप्पी बनाए रखना पसंद करता है: अमोल पालेकर

12 साल के लंबे अंतराल के बाद फिल्मों में वापसी कर रहे दिग्गज अभिनेता अमोल पालेकर का मानना है कि हिंदी सिनेमा में जाति को एक मुद्दे के रूप में शायद ही कभी उठाया जाता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के विषय परेशान करने वाले होते हैं और परंपरागत रूप से मनोरंजक नहीं होते हैं. निर्माता अपनी सिनेमाई यात्रा के दौरान ऐसी फिल्मों को बनाने से कतराते हैं.