Punjab and Haryana High Court

पहले इनकार के बाद केंद्र ने माना- पात्र न होने के बावजूद हुई आईआईएम रोहतक के निदेशक की नियुक्ति

आईआईएम रोहतक के निदेशक धीरज शर्मा की नियुक्ति को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. जहां शिक्षा मंत्रालय ने माना कि शर्मा को स्नातक स्तर पर द्वितीय श्रेणी मिलने के बावजूद इस पद पर नियुक्त किया गया जबकि इसके लिए प्रथम श्रेणी से डिग्री होना अनिवार्य शर्त है. शर्मा को नियुक्ति के साथ दूसरे कार्यकाल की मंज़ूरी भी मिली थी.

निजी क्षेत्र में स्थानीयों को आरक्षण से राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव पड़ेगाः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

बीते 15 जनवरी को लागू हरियाणा राज्य स्थानीय उम्मीदवारों का रोज़गार अधिनियम, 2020 नौकरी चाहने वालों को निजी क्षेत्र में 75 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करता है, जो इसी राज्य के निवासी हैं. हाईकोर्ट द्वारा इस पर अंतरिम रोक लगाई गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया.

पंजाब: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व डीजीपी की गिरफ़्तारी पर रोक लगाने वाले जज को बदलने को कहा

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के ख़िलाफ़ लंबित मामलों में विधानसभा चुनाव तक उनकी गिरफ़्तारी या मामले दर्ज करने पर रोक लगाने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा हैरान करने वाला आदेश नहीं देखा.

हरियाणा: सुप्रीम कोर्ट ने निजी नौकरियों में आरक्षण पर हाईकोर्ट के आदेश को ख़ारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा को नियोक्ताओं के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई नहीं करने का भी निर्देश दिया है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के निवासियों को 75 फ़ीसदी आरक्षण देने संबंधी हरियाणा सरकार के क़ानून पर तीन फरवरी को अंतरिम रोक लगा दी थी. इस फ़ैसले को हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

निजी नौकरी में स्थानीय लोगों को 75 फ़ीसदी आरक्षण पर रोक; हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के निवासियों को 75 फ़ीसदी आरक्षण देने संबंधी हरियाणा सरकार के क़ानून पर बृहस्पतिवार को अंतरिम रोक लगा दी थी. हरियाणा में यह क़ानून 15 जनवरी से प्रभावी हुआ है.

यौन संबंधों में नहीं का मतलब नहीं, बेशक पूर्व में हां क्यों न कहा होः हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि न का मतलब न है, फिर बेशक शुरुआत में हामी क्यों न रही हो. सहमति नहीं होना पूर्व में दी गई सहमति को ख़त्म कर देता है. जबरन यौन संबंध असहमति से बने संबंध कहलाएंगे, जो आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत दंडात्मक है.

कठुआ रेप मामले में दोषी पुलिसकर्मी की जल्द रिहाई पर व्यथित पीड़ित परिवार, कहा- खौफ़ में जी रहे

कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को उनकी पांच साल की जेल की सज़ा पूरी होने से पहले ही रिहा कर दिया गया और अदालत ने उनकी बाकी बची सज़ा भी रद्द कर दी है.

कथित जातिवादी टिप्पणी मामले में युवराज सिंह गिरफ़्तार, फ़िर ज़मानत पर रिहा: हरियाणा पुलिस

पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह पर पिछले साल इंस्टाग्राम चैट के दौरान एक अन्य क्रिकेटर के ख़िलाफ़ जातिवादी टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था. एक वकील ने पिछले साल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि युवराज सिंह की टिप्पणी से दलित समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है.

अदालतों को ज़मानत देते वक़्त आरोपी की पृष्ठभूमि की पड़ताल करनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को दी गई जमानत को रद्द करते हुए ये टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट जेल से साज़िश रचने के गंभीर आरोप पर ध्यान देने में विफल रहा है. उसे यह विचार करना चाहिए था कि यदि आरोपी जेल में रहकर साज़िश रच सकता है तो अगर वह ज़मानत पर रिहा हुआ तो क्या नहीं करेगा.

सरकारी आवास सेवारत कर्मचारियों के लिए है, न कि सेवानिवृत्तों के लिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की जिसमें एक कश्मीरी प्रवासी सेवानिवृत्त अधिकारी को सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी गई थी. अदालत ने कहा कि आश्रय के अधिकार का मतलब सरकारी आवास का अधिकार नहीं है.

हरियाणा: राजद्रोह मामले में किसान को ज़मानत, कोर्ट ने कहा- बोलने की आज़ादी लोकतंत्र की नींव

बीते मई में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और अन्य भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर अन्य आरोपों के साथ राजद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किसान दलबीर सिंह को ज़मानत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है.

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के फैसले का मूल्यांकन करना अदालत का काम नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही 17 साल की लड़की और 20 साल के लड़के को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा है कि उत्तर भारत में ख़ासकर हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में ‘ऑनर किलिंग’ की घटनाएं होती रहती हैं, ऐसे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी राज्य की है.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

हाईकोर्ट के लिव-इन संबंध को अस्वीकार्य बताने के बाद शीर्ष अदालत से युवक-युवती को मिली सुरक्षा

पिछले महीने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युवक-युवती को सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह नैतिक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य नहीं है. शीर्ष अदालत ने इस आदेश को ख़ारिज करते हुए पुलिस से याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा देने को कहा है.

मां के विवाहेतर संबंध बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का आधार नहीं हो सकते: हाईकोर्ट

एक महिला के चार साल की बेटी की कस्टडी मांगने पर पति द्वारा उनके चरित्र पर सवाल उठाने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पितृसत्तात्मक समाज में किसी महिला के चरित्र पर आक्षेप लगाना सामान्य बात है. आमतौर पर ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं होता. महिला के विवाहेतर संबंध हों भी तो यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि वह अच्छी मां नहीं होगी.

लिव-इन रिलेशनशिप की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ रही, क़ानून में इस पर प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट

इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ही दो अन्य पीठों ने लिव-इन रिलेशनशिप के ख़िलाफ़ फैसला दिया था और प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के संबंध सामाजिक और नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं.