श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफ़े के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने ट्रस्ट के 'पालक' (संरक्षक) के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बताया गया है कि उनकी भूमिका ट्रस्ट के दैनिक प्रशासनिक कार्यों के बजाय संगठनात्मक मार्गदर्शन और समन्वय से जुड़ी मानी जाती थी.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में ह्विसिलब्लोअर और मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने विशेष जांच दल को एक ईमेल के जरिए अपना बयान भेजा है, जिसमें उन्होंने मंदिर प्रबंधन पर कई नए आरोप लगाए हैं. इन आरोपों में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व सचिव चंपत राय का भी ज़िक्र है, जिन्होंने 7 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमिताओं की जांच के लिए गठित नई एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस. करेंगे. इसके अन्य सदस्य डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर हैं.
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को बिना किसी पारदर्शिता के चुन लिया गया और लोकसभा में इसकी घोषणा फरवरी 2020 में की गई. ऐसे में किसी भी गड़बड़ी के लिए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसी और को दोषी कैसे ठहरा सकता है?
संसद के मानसून सत्र के पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने पेपर लीक, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन पर मोदी सरकार की चुप्पी और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट ने मंदिर की पवित्रता और गरिमा की पुनर्स्थापना के लिए मंदिर परिसर और विभिन्न गुरुकुलों में 10 दिवसीय विशेष 'प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान' शुरू किया है. वहीं, कुछ अन्य संतों ने इस अनुष्ठान के उद्देश्य को लेकर सवाल उठाए हैं.
अयोध्या और दिल्ली में साधु-संतों व अन्य लोगों के साथ हुई विस्तृत बातचीत से पता चलता है कि चंपत राय को अपनी शक्ति और प्रभाव का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी निकटता से मिलता था. यही वजह है कि अब शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज़ होती जा रही है.
चढ़ावा चोरी और कथित ग़बन की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मंगलवार को कहा कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने माना है कि मंदिर में निगरानी में कुछ चूक ज़रूर हुई, लेकिन इसके लिए वे स्वयं को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं मानते.
अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है. अदालत ने एसआईटी को अब तक की जांच पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है.
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने चढ़ावा राशि के कथित ग़बन को 'शर्मनाक' बताया है. उन्होंने कहा कि इस घटना से मंदिर से जुड़े लोग अपमानित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. मिश्र ने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए प्रबंधन व्यवस्था को और मज़बूत किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने बताया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव से जुड़े एक वाहन पर लगे 'येलो ज़ोन' पास पर ‘गोपाल राव’ का नाम और ‘ट्रस्ट एसोसिएट, श्री राम जन्मभूमि’ का पद लिखा था, पर फोटो किसी अन्य व्यक्ति का है. येलो ज़ोन मंदिर परिसर के प्रतिबंधित ‘रेड जोन’ के चारों ओर स्थित उच्च सुरक्षा वाला बफर क्षेत्र है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कथित ग़बन की जांच कर रहे विशेष जांच दल के प्रमुख आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत का नाम कथित धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक मामले में आरोपी के रूप में सामने आया है. उनके ख़िलाफ़ यह मामला 2013 से 2015 के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक शीर्ष बिजली वितरण अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के घटनाक्रमों से जुड़ा है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कांग्रेस ने कहा- माफ़ी मांगें पीएम मोदी, उन्होंने चंपत राय को नियुक्त किया था
राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की तत्काल गिरफ़्तारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को चुनने में हुई ग़लती के लिए माफ़ी की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते क्योंकि उन्होंने ही चंपत राय को नियुक्त किया था.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक लिखित बयान में फरवरी 2025 में मंदिर में नकदी गिनने की प्रक्रिया के लिए जारी दिशानिर्देशों वाले पत्र को ख़ारिज करते हुए कहा कि इस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. उनके अनुसार, ट्रस्ट के बैंक के साथ हुए एमओयू में कैश गणना वाले कमरे में सभी सुरक्षा उपाय किए गए थे. बैंक की ओर से कुर्सी और मेज पर बैठकर नकदी गिनने की सलाह दिए जाने से
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी के सामने आने के बाद बीते 6 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद के नेता चंपत राय ने श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. अब उन्होंने एक नोट जारी कर कहा है कि वह इस मामले में मौन रहेंगे और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देंगे.