Refugees

Barpeta: State Disaster Response Force (SDRF) personnel rescue villagers affected by flood at Sarukhetri village in Barpeta, Thursday, July 25, 2019. (PTI Photo) (PTI7_25_2019_000117B) *** Local Caption ***

साल 2021 में जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के चलते भारत में क़रीब 50 लाख लोग विस्थापित: यूएन

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में हिंसा, मानवाधिकार हनन, खाद्य असुरक्षा, जलवायु संकट, यूक्रेन में युद्ध और अन्य आपात स्थितियों के कारण दुनियाभर में 10 करोड़ लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए. एजेंसी ने कहा कि बीते दशक में हर वर्ष घर छोड़ने के लिए मजबूर होने वाले लोगों की संख्या दोगुनी हुई है.

दुनियाभर में विस्थापित लोगों की संख्या 10 करोड़ से ऊपर पहुंची: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की ओर से कहा गया कि संघर्ष, हिंसा, मानवाधिकारों के उल्लंघन और उत्पीड़न से बचने के लिए दुनियाभर में 10 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. यह एक ऐसा रिकॉर्ड है, जो कभी बनना ही नहीं चाहिए था. इस प्रवृत्ति को उलटने का एकमात्र उपाय शांति और स्थिरता ही है, ताकि निर्दोष लोगों को घर पर गंभीर ख़तरे से जूझने या अनिश्चिततापूर्ण पलायन व निर्वासन के बीच चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े.

अरुणाचल प्रदेश: छात्रसंघ ने चकमा-हाजोंग शरणार्थियों की गणना के लिए दो हफ्ते का अल्टीमेटम दिया

अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्रसंघ ने कहा कि चकमा और हाजोंग की जनगणना स्वदेशी लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक डेटा को बनाए रखने के लिए एक नियमित प्रशासनिक अभ्यास है. इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय से राज्य सरकार को एक पत्र मिलने के बाद यह प्रक्रिया ठप हो गई.

हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं को निर्धारित प्रक्रिया के बिना म्यांमार प्रत्यर्पित नहीं किया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सीजेआई एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने उस याचिका पर यह आदेश पारित किया जिसमें जम्मू में हिरासत में लिए गए रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार प्रत्यर्पित करने से रोकने के लिए केंद्र को निर्देश देने के लिए अनुरोध किया गया था.

जम्मू कश्मीर में रह रहे 150 से अधिक रोहिंग्याओं को वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू

बीते छह मार्च को जम्मू शहर में सत्यापन अभियान के दौरान क़रीब 168 रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध रूप से रहते हुए पाए जाने पर उन्हें कठुआ जिले के एक विशेष केंद्र में भेज दिया गया था. आंकड़ों के अनुसार, जम्मू और सांबा ज़िलों में रोहिंग्या मुसलमानों एवं बांग्लादेशियों समेत 13,700 से अधिक विदेशी बसे हुए हैं और उनकी जनसंख्या में 2008 से 2015 के बीच छह हज़ार से अधिक की वृद्धि हुई.

जम्मू कश्मीर: रोहिंग्या शरणार्थियों की बायोमेट्रिक जानकारी जुटाने का काम शुरू, 168 लोगों को जेल

सरकारी आकंड़ों के मुताबिक, रोहिंग्या मुस्लिमों और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 विदेशी जम्मू और सांबा ज़िलों में रह रहे हैं, जहां 2008 से 2016 के बीच इनकी जनसंख्या में छह हज़ार से अधिक की वृद्धि हुई. कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों का आरोप है कि देश में उनकी उपस्थिति क्षेत्र की शांति के लिए ख़तरा है.

साल के मध्य तक आठ करोड़ से ज्यादा लोग हुए विस्थापित, कोविड-19 से स्थिति हुई गंभीर: यूएनएचसीआर

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि पहले से चल रहे और हालिया संघर्ष की स्थिति तथा कोरोना महामारी के कारण 2020 में लोगों के जीवन पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा. विस्थापन के लिए मजबूर हुए 7.95 करोड़ लोगों में 3.4 करोड़ बच्चे थे.

राष्ट्र मानवता की गरिमा बनाए रखें, कोविड-19 से सबसे अधिक शरणार्थी प्रभावित: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि दुनियाभर में कोविड-19 ज़िंदगियों और आजीविकाओं को तबाह कर रहा है और सबसे कमज़ोर, सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं.

सात दिन के बच्चे की मां को लॉकडाउन में फंसे पति का इंतजार

वीडियो: बीते 24 मार्च को हुए देशव्यापी लॉकडाउन में गुड़गांव में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले नानबाबू फंस गए. इस दौरान कालिंदी कुंज में रहने वाले पड़ोसियों ने चंदा इकट्ठा कर उनकी पत्नी रेशमा की डिलीवरी कराई और खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं. विशाल जायसवाल की रिपोर्ट.

दिल्ली: लॉकडाउन में फंसे पति के इंतज़ार में एक मां का संघर्ष

दिल्ली के कालिंदी कुंज के श्रम विहार इलाके में बसे एक कैंप में रहने वाली 23 वर्षीय रेशमा के पति दिहाड़ी मज़दूर हैं, जो लॉकडाउन के चलते गुड़गांव में फंस गए हैं. रेशमा ने दस दिन पहले बेटी को जन्म दिया है. बिना पैसे और खाने के वह पड़ोसियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद के सहारे रह रही हैं.

नागरिकता क़ानून में धर्म के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के उलट है मोदी सरकार का रवैया

नागरिकता क़ानून को लेकर 2003 और उसके बाद हुई बहस में न केवल कांग्रेस और वाम बल्कि भाजपा नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने भी धार्मिक रूप से प्रताड़ित शरणार्थियों को लेकर धर्म के आधार पर भेदभाव न करने की पैरवी की थी.

A Syrian woman cries while holding her children moments after arriving on a dinghy on the island of Lesbos, Greece August 23, 2015. Photo by Alkis Konstantinidis/Reuters.

पिछले पांच सालों में हर दिन एक शरणार्थी बच्चे की मौत हुई या वह लापता हो गया: संयुक्त राष्ट्र

इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 से 2018 के बीच तकरीबन 32 हज़ार शरणार्थियों की मौत हुई. संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्धग्रस्त यमन में 2013 से अभी तक 7500 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए.