Right to education

Kolkata: Mahadevi Birla World Academy students take pledge for environment, sustainability and recycling during a campaign in Kolkata, Thursday, Jan. 16, 2020. Around 2000  students from various schools of Kolkata participated in the event. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI1_16_2020_000009B)

शिक्षा का अधिकार कानून: दस सालों के सफर में हमने क्या हासिल किया?

साल 2010 में शिक्षा का अधिकार कानून के लागू होने के बाद पहली बार सरकारों की कानूनी जवाबदेही बनी कि वे 6 से 14 साल सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करें. लेकिन इसी के साथ ही इस कानून की सबसे बड़ी सीमा यह रही है कि इसने सावर्जनिक और निजी स्कूलों के अन्तर्विरोध से कोई छेड़-छाड़ नहीं की.

(फोटो: पीटीआई)

सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए, इन्हें चलाने वाली सरकारें फेल हुई हैं

सरकारी स्कूलों को बहुत ही प्रायोजित तरीके से निशाना बनाया गया है. प्राइवेट स्कूलों की समर्थक लॉबी की तरफ से बहुत ही आक्रामक ढंग से इस बात का दुष्प्रचार किया गया है कि सरकारी स्कूलों से बेहतर निजी स्कूल होते हैं और सरकारी स्कूलों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

दिल्ली में 80 प्रतिशत से अधिक निजी स्कूल नहीं लागू कर रहे शिक्षा का अधिकार कानून: रिपोर्ट

यह सर्वेक्षण शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले एक एनजीओ इंडस एक्शन ने किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला प्राप्त छात्रों की संख्या के बारे में सूचना उपलब्ध नहीं है.

Students-protest-pti

सरकार उच्च शिक्षण संस्थाओं को ज्ञान के स्रोत के बजाय ‘प्रेशर कुकर’ में तब्दील कर रही है

जिस प्रकार कृषि क्षेत्र में ऋण से बढ़ते तनाव ने किसान आत्महत्या की समस्या पैदा की, स्कूल शिक्षा में परीक्षाओं और मेरिट के दबाव ने स्कूली विद्यार्थियों में आत्महत्याओं को जन्म दिया, तनाव निर्माण की उसी कड़ी में सरकार ने कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को झोंकने की तैयारी कर ली है.

Syrian refugee children are seen during a lesson at Fatih Sultan Mehmet School in Karapurcek district of Ankara, Turkey, October 2, 2015. Image: REUTERS/Umit Bektas

अंग्रेज़ी भाषा और निजी स्कूलों में शिक्षा का ख़र्च बच्चों के स्कूल छोड़ने की वजह: अध्ययन

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का यह अध्ययन दिल्ली के 650 स्कूलों द्वारा स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों के विषय में दिए गए वर्षवार आंकड़े पर आधारित है.

Indian tribal people sit at a relief camp in Dharbaguda in Chhattisgarh. File Photo Reuters

बस्तर: जहां नागरिकों की सुध लेने वाला कोई नहीं

बस्तर के लिए लोकतंत्र क्या है? सरकार, मीडिया और कुछ एनजीओ के दावों से लगता है कि यहां विकास की ऐसी बयार आई हैं, जिसमें नागरिकों को ज़मीन पर ही मोक्ष मिल गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्या स्कूल में फेल करने से बच्चे ज़िंदगी में ‘पास’ हो जाएंगे?

शिक्षा के अधिकार अधिनियम को पिछले सात साल में ठीक ढंग से लागू किया गया या नहीं, इसका आकलन किसी ने नहीं किया. सभी ने अपनी नाकामी को बच्चों पर थोप दिया और बच्चों की किसी ने पैरवी तक नहीं की.

(फोटो :पीटीआई)

बच्चों को आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति ख़त्म करने को मंज़ूरी

सरकार की छात्रों को आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति पर अब विराम लग जाएगा. कैबिनेट ने बुधवार को ‘नो डिटेंशन नीति’ ख़त्म करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.