Scheduled Tribes

कर्नाटक: एससी/एसटी आरक्षण में बढ़ोतरी करने वाले अध्यादेश को राज्यपाल ने मंज़ूरी दी

इस मंज़ूरी के साथ कर्नाटक में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण मौजूदा 15 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों के लिए मौजूदा तीन प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत हो जाएगा. इस क़दम को राज्य की भाजपा सरकार द्वारा अगले साल विधानसभा चुनाव से पहले इन समुदायों को लुभाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

एनएचआरसी ने केंद्र, छह राज्यों को नोटिस जारी करके देवदासी प्रथा पर रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि देवदासी प्रथा की शिकार ज़्यादातर महिलाओं का यौन शोषण किया जा रहा है, जब वे गर्भवती हो जाती हैं तो उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ दिया जाता है.

छत्तीसगढ़: कोर्ट ने नौकरी, कॉलेज दाखिलों में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक क़रार दिया

वर्ष 2012 में राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा सरकारी नियुक्तियों, मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य कॉलेजों में दाखिले में कुल आरक्षण का प्रतिशत 50 से बढ़कर 58 प्रतिशत कर दिया गया था. हाईकोर्ट ने इसे रद्द करते हुए कहा कि ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के विरुद्ध है.

पात्र होने के बावजूद एससी/एसटी डॉक्टरों को एम्स की नौकरियों से वंचित किया गया: संसदीय समिति

लोकसभा में प्रस्तुत संसद की एक समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि एम्स, दिल्ली में उचित पात्रता, योग्यता, पूरी तरह से अनुभवी होने के बावजूद एससी/एसटी उम्मीदवारों को शामिल नहीं किया जा रहा. अनौपचारिक आधार पर अस्पताल में काम करने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति समुदायों के कनिष्ठ कर्मचारियों का चयन उस समय नहीं किया गया जब पदों को नियमित किया जा रहा था.

एमपी: विवाहेतर संबंध के शक में आदिवासी महिला को पीटा; कंधे पर पति को बैठाकर गांव में घुमाया

मध्य प्रदेश के देवास ज़िले का मामला है. विवाहित आदिवासी महिला के किसी और से संबंध होने के शक में ग्रामीणों के एक समूह ने उनके कंधे पर उनके पति को बैठाया और फिर उनकी पिटाई करते हुए पूरे गांव में जुलूस निकाला. महिला के कपड़े भी फाड़ दिए गए और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. महिला के पति सहित 11 नामज़द लोगों और कुछ अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. अब तक 12 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.

मध्य प्रदेश: ज़मीन विवाद को लेकर आदिवासी महिला को ज़िंदा जलाया, पांच गिरफ़्तार

घटना मध्य प्रदेश गुना ज़िले के बमोरी थाना क्षेत्र की है. आरोप है कि आरोपियों ने पीड़ित महिला के परिवार की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर रखा था, जिसे तहसीलदार बमोरी ने मई में ही मुक्त कराकर इस महिला के परिवार को सौंप दिया था. बीते दो जुलाई को महिला इसी खेत में गई हुई थीं, तभी आरोपी पक्ष के लोगों ने उनको खेत में ही जला दिया.

सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक दुर्व्यवहार होने की स्थिति में ही एससी/एसटी एक्ट लागू होगा: अदालत

कर्नाटक हाईकोर्ट एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ लंबित मामले को ख़ारिज कर दिया, क्योंकि यह पाया गया कि कथित दुर्व्यवहार एक इमारत के तहखाने में किया गया था, जहां सिर्फ़ पीड़ित और उसके सहकर्मी ही मौजूद थे. कथित घटना वर्ष 2020 में हुई थी.

गुर्जर आरक्षण आंदोलन के अगुवा कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का निधन

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला राजस्थान में गुर्जर आरक्षण को लेकर चले आंदोलन के अगुवा और प्रमुख चेहरा रहे थे. उन्होंने गुर्जर समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में वर्गीकृत करने के लिए यह आंदोलन चलाया था. साल 2007 व 2008 में चले इस आंदोलन में 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. 

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग निष्क्रिय, 2018 से लंबित हैं रिपोर्ट्स: संसदीय समिति

सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर गठित संसदीय समिति ने पाया है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग पिछले चार वर्षों से निष्क्रिय रहा है और संसद में उसने एक भी रिपोर्ट पेश नहीं की है.

साल 2020 में यूएपीए के तहत 1,321 लोगों को गिरफ़्तार किया गया: केंद्र

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम क़ानून (यूएपीए) के तहत 80 लोगों को दोषी ठहराया गया, जबकि 2019 में 34 लोगों को दोषी ठहराया गया था. यूएपीए के तहत ज़मानत पाना बहुत ही मुश्किल होता है और जांच एजेंसी के पास चार्जशीट दाख़िल करने के लिए 180 दिन का समय होता है.

75 साल में एससी/एसटी वर्ग को योग्यता के उस स्तर पर नहीं लाया जा सका, जहां अगड़ी जातियां हैं: केंद्र

सुप्रीम कोर्ट एससी और एसटी वर्ग से संबंधित कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित मुद्दे पर दलीलें सुन रही थी. केंद्र ने बताया कि समूह ‘ए’ और ‘बी’ की नौकरियों में प्रतिनिधित्व कम है, वहीं समूह ‘सी’ और ‘डी’ में प्रतिनिधित्व अधिक है. एससी और एसटी के लिए समूह ‘ए’ और ‘बी’ में उच्च पद पाना अधिक कठिन है.

पूर्व नौकरशाहों ने कहा- यूएपीए का मौजूदा स्वरूप नागरिकों की स्वतंत्रता के लिए गंभीर ख़तरा

‘कांस्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप’ के तत्वाधान में 108 पूर्व नौकरशाहों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) पांच दशकों से अधिक समय से भारत की क़ानून की किताबों में मौजूद है और हाल के वर्षों में इसमें किए गए संशोधनों ने इसे निर्मम, दमनकारी और सत्तारूढ़ नेताओं तथा पुलिस के हाथों घोर दुरुपयोग करने लायक बना दिया है.

जम्मू कश्मीर: 2019 से यूएपीए के तहत 2,300 से अधिक लोगों पर केस, लगभग आधे अभी भी जेल में

इस बीच केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि 2019 में ग़ैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम क़ानून यूएपीए के तहत 1,948 लोगों को गिरफ़्तार किया गया और 34 आरोपियों को दोषी ठहराया गया. एक अन्य सवाल के जवाब में बताया गया कि 31 दिसंबर 2019 तक देश की विभिन्न जेलों में 4,78,600 कै़दी बंद थे, जिनमें 1,44,125 दोषी ठहराए गए थे जबकि 3,30,487 विचाराधीन व 19,913 महिलाएं थीं.

देश की जेलों में बंद 27.37 फीसदी क़ैदी अशिक्षित, 21 प्रतिशत दसवीं पास: सरकारी डेटा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की जेलों में बंद 41.55 फीसदी क़ैदियों ने दसवीं कक्षा से कम तक ही पढ़ाई की है. 6.31 फीसदी क़ैदी ग्रेजुएट और 1.68 प्रतिशत पोस्ट-ग्रेजुएट हैं.

देश की जेलों में बंद क़ैदियों में 65 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी: सरकार

गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राज्यसभा में बताया कि ओबीसी, एससी और अन्य श्रेणियों के क़ैदियों की अधिकतम संख्या उत्तर प्रदेश की जेलों में है, जबकि मध्य प्रदेश की जेलों में एसटी समुदाय की है. इसके अलावा देशभर की जेलों में कुल क़ैदियों में 95.83 फ़ीसदी पुरुष और 4.16 फ़ीसदी महिलाएं हैं.