Secularism

हिंदुत्ववादी जमातों की ख़ुद को बड़ा साबित करने की होड़ में पिसती अयोध्या

राज ठाकरे की अयोध्या यात्रा के ऐलान के बाद आदित्य ठाकरे ने भी वहां जाने की घोषणा की है और शहर में पोस्टर वॉर छेड़ते हुए ‘नकली हिंदुत्ववादी’ से सावधान रहने को कहा है. वहीं, कैसरगंज से भाजपा के बाहुबली सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राज ठाकरे को ‘कालनेमि’ बताते हुए अयोध्या में न घुसने देने की धमकी दे डाली है. एक अन्य भाजपा सांसद लल्लू सिंह राज ठाकरे को ‘राम के साथ मोदी की शरण में आने’ की सीख दे रहे हैं.

हिंदुत्व ट्रोलिंग के सामने घुटने टेककर सेना ने अपने धर्मनिरपेक्ष आदर्शों को कमज़ोर किया है

देश के सुरक्षा बल राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं, जिसे नफ़रत और कट्टरता चाहने वाली ताक़तें पसंद नहीं करती हैं.

‘न्यू इंडिया’ में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का कोई वारिस ही नहीं बचा है…

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट आने के पंद्रह साल बाद के ‘नए भारत’ में अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर मुस्लिमों की समस्याओं या हक़ों की बात करने को बहुसंख्यकों के हितों पर ‘आघात’ माना जाता है. ख़ुद मुस्लिमों के लिए भी अब सबसे बड़ा मुद्दा जान-माल की हिफाज़त बन गया है.

टीवी एंकर ने धर्मनिरपेक्षता को बीमारी बताया तो सेना ने इफ़्तार आयोजन का ट्विटर पोस्ट हटा दिया

रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सेना द्वारा आयोजित इफ़्तार आयोजन की कुछ तस्वीरें पोस्ट करते हुए धर्मनिरपेक्षता की परंपरा बताया गया था, जिस पर निशाना साधते हुए सुदर्शन न्यूज़ के प्रमुख सुरेश चव्हाणके ने कहा था कि धर्मनिरपक्षता की बीमारी भारतीय सेना में भी घुस गई है. इसके तुरंत बाद ही पीआरओ ने ट्वीट डिलीट कर दिया.

भारत को बचाने की लड़ाई हम में से हरेक को लड़नी होगी

भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वाले हम सभी लोगों के सामने यह चुनने का रास्ता है कि या तो हम इंसाफ़ की एक साझी सोच की दिशा में काम करें, उस दर्द और नफ़रत को दूर करने के लिए, जो हमारी सारी सामूहिक स्मृतियों को निगल रहे हैं, या फिर इन हालात को और बिगड़ने दें.

भारत की ‘अल्पसंख्यक विरोधी छवि’ घरेलू कंपनियों को नुकसान पहुंचाएगी: रघुराम राजन

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की चिंताओं के बीच एक कार्यक्रम में कहा कि भारत की साख लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के लिए रही है, लेकिन अब उसे छवि की लड़ाई लड़नी पड़ रही है.

हिंदू और हिजाब

हिंदुओं में अभी उदारता का ज्वार उमड़ पड़ा है, प्रगतिशीलता का भी. वे औरतों को हर परदे, हर बंधन से आज़ाद देखना चाहते हैं. वे कट्टरता के ख़िलाफ़ लड़ना चाहते हैं. लेकिन यह सब वे मुसलमान औरतों के लिए करना चाहते हैं. क्योंकि हिंदू औरतों को तो न कट्टरता और न धर्म के किसी बंधन का कभी शिकार होना होता है!

हिजाब विवाद: क्या मसला असल में धर्मनिरपेक्षता का है या महज़ उपद्रव की साज़िश

कर्नाटक में जो भगवाधारी युवकों-युवतियों की हिंसक और नफ़रतबुझी भीड़ दिख रही है, उसे क्षणिक मानकर निश्चिंत हो जाना ख़तरनाक है. जो इन्हें इकट्ठा कर रहे हैं, वे इन्हें बस एक मौक़े के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे.

हमारा संविधान: क्या कहता है अनुच्छेद 27-28, क्या है अनिवार्य कर व धार्मिक निर्देशों पर रोक

वीडियो: क्या केंद्र या राज्य सरकारें किसी धर्म के प्रचार के लिए नागरिकों पर कर लगा सकती हैं? क्या सरकारें लोगों का पैसा धर्म के काम पर ख़र्च कर सकती हैं और इस पर संविधान क्या कहता है? क्या धर्म की शिक्षा उस संस्थान ने दी जा सकती है जो सरकारी ख़र्चे पर चलता है? इन सब पर विस्तार से बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अवनि बंसल.

हमारा संविधान: क्या है अपने धर्म को मानने और उसके प्रसार का अधिकार

वीडियो: भारत का संविधान ‘धर्म’ पर क्या कहता है? धर्म के अधिकार की क्या सीमा है? धर्मनिरपेक्षता का क्या अर्थ है और क्यों हमारे संविधान बनाने वालों ने एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना की. संविधान का अनुच्छेद 25 इस विषय पर बात करता है, जिसके बारे में विस्तार में बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अवनि बंसल.

भाजपा ने दिवाली को नफ़रत के त्योहार में बदल दिया है

फैब इंडिया के एक हालिया विज्ञापन पर आपत्ति के बाद कंपनी का उसे हटाने का फ़ैसला उसी बीमारी को उजागर करता है, जिसका भारत को डटकर सामना करने की ज़रूरत है.

धर्मों से जुड़ी कट्टरताओं के कितने भी रूप हों, वे एक दूजे की पूरक ही होती हैं

जिस तरह भ्रष्टाचारियों को अपना भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार नहीं लगता, उसी तरह कट्टरपंथियों को अपनी कट्टरता कट्टरता नहीं लगती. वे ‘दूसरी’ कट्टरताओं को कोसते हुए भी अपनी कट्टरताओं के लिए जगह बनाते रहते हैं और इस तरह दूसरी कट्टरताओं की राह भी हमवार करते रहते हैं.

फैब इंडिया का विज्ञापन वापस लेना देश के उद्योग जगत की प्राथमिकताएं दिखाता है

मिश्रित संस्कृति, भाषा की यात्रा आदि की शिक्षा का अब कोई लाभ नहीं है. उर्दू या मुसलमानों के ख़िलाफ़ प्रचार किसी अज्ञानवश नहीं किया जा रहा. यह उनके रोज़ाना अपमान का ही एक हिस्सा है. टाटा के बाद फैब इंडिया ने भी इसी अपमान को शह दी है.

बांग्लादेश हिंसा: जिस देश में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं, वह सभ्य कैसे कहला सकता है?

बांग्लादेश में हिंसा के नए चक्र से शायद हम एक दक्षिण एशियाई पहल के बारे में सोच सकें जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उनकी बराबरी के हक़ के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का निर्माण करे.

उत्तर प्रदेश: ओवैसी और कार्यक्रम के आयोजकों के ख़िलाफ़ बाराबंकी में एक और मामला दर्ज

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाल विधानसभा चुनावों के तहत बाराबंकी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. औवेसी और कार्यक्रम आयोजकों के ख़िलाफ़ कोविड-19 दिशानिर्देशों का उल्लंघन तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में मामला दर्ज करने के कुछ ही घंटों बाद राष्‍ट्रीय ध्‍वज के अपमान को लेकर एक और मामला दर्ज किया गया है.