उत्तराखंड: सियाचिन में शहीद जवान का शव 38 साल बाद बंकर से मिला

शव की पहचान जवान चंद्रशेखर हर्बोला के रूप में हुई है. वर्ष 1984 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच दुनिया की सबसे ऊंची रणभूमि सियाचिन में टकराव हुआ था, तब ऑपरेशन मेघदूत के तहत क्षेत्र में गश्त के लिए 20 सैनिकों को भेजा गया था. इस दौरान सभी सैनिक तूफान की चपेट में आ गए. 15 जवानों के शव बरामद कर लिए गए थे, लेकिन हर्बोला समेत पांच सैनिकों के शव नहीं मिल पाए थे.

सियाचिन में सैनिकों को नहीं मिल रहे हैं उचित कपड़े, राशन और आवास: कैग

संसद में पेश कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैन्य टुकड़ियों के लिए आवश्यक कपड़ों, चश्मों आदि उपकरणों की कमी देखी गई है, साथ ही उन्हें दिए जाने वाले विशेष राशन की गुणवत्ता से भी समझौता किया गया.

रक्षा मंत्रालय में दो लाख से अधिक पद खाली: रक्षा राज्यमंत्री

रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने राज्यसभा में बताया कि जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर 30 मई 2019 से 20 जनवरी 2020 तक संघर्ष विराम उल्लंघन की 2335 घटनाएं हुई हैं. वहीं, सियाचिन क्षेत्र में हिमपात और हिमस्खलन की वजह से साल 2019 में छह सैन्यकर्मी हताहत हुए हैं.

सियाचिन, लद्दाख में जवानों को नहीं मिल रहा जरूरी खाना: कैग

कैग की रिपोर्ट से पता चला है कि सियाचिन और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात जवानों के पास स्नो ग्लासेस और मल्टीपर्पज जूते नहीं हैं. उनके पास जरूरी भोजन भी उपलब्ध नहीं है. इन इलाकों में बेहद ठंड की वजह से जवानों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है.