South Africa

दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद संघर्ष के प्रतीक नोबेल पुरस्कार विजेता डेसमंड टूटू का निधन

डेसमंड टूटू को रंगभेद के कट्टर विरोधी और अश्वेत लोगों के दमन वाले दक्षिण अफ्रीका के क्रूर शासन के ख़ात्मे के लिए अहिंसक रूप से अथक प्रयास करने के लिए जाना जाता है. साल 1994 में दक्षिण अफ्रीका से रंगभेद के औपचारिक अंत के बाद भी टूटू ने मानवाधिकारों के लिए अपनी लड़ाई को नहीं रोका था. वह एचआईवी/एड्स, नस्लवाद, होमोफोबिया और ट्रांसफोबिया सहित तमाम मुद्दों पर आवाज़ उठाते रहते थे.

भारत की हरनाज़ संधू बनीं मिस यूनिवर्स, 21 साल बाद देश को मिला ख़िताब

चंडीगढ़ की मॉडल हरनाज़ संधू एमए की पढ़ाई कर रही हैं. इज़रायल में आयोजित प्रतियोगिता में पराग्वे की नादिया फेरेरा दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि दक्षिण अफ्रीका की लालेला मसवाने तीसरे स्थान पर रहीं. इज़रायल द्वारा फ़िलीस्तीन के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर इसके सहयोगी दक्षिण अफ्रीका ने अपने देश की प्रतिभागी का समर्थन नहीं किया था.

कोविड-19 का ओमीक्रॉन प्रकार अभी बड़ी चिंता का विषय नहीं: दक्षिण अफ्रीकी मेडिकल एसोसिएशन अध्यक्ष

दक्षिण अफ्रीकी मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष एंजेलिक कोएट्ज़ी ने कहा कि कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रॉन के मरीज़ों में हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसके गंभीर मामले भी आ सकते हैं.

भारत पहुंचा कोविड-19 का ओमीक्रॉन स्वरूप, कर्नाटक में मिले दो मामले

संभावित रूप से अधिक संक्रामक कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन स्वरूप की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ को पहली बार बीते 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से दी गई थी. डब्ल्यूएचओ ने इस स्वरूप को ‘चिंताजनक प्रकार’ के रूप में नामित किया है. इससे पहले इस श्रेणी में कोरोना वायरस का डेल्टा स्वरूप था, जिससे यूरोप और अमेरिका के कई हिस्सों में लोगों ने बड़े पैमाने पर जान गंवाई थी.

कोविड-19 के नए स्वरूप ‘ओमीक्रॉन’ के डर से दुनिया के कई देशों ने लगाईं यात्रा पाबंदियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक समिति ने कोरोना वायरस के नए स्वरूप को ‘ओमीक्रॉन’ नाम दिया है और इसे ‘बेहद संक्रामक चिंताजनक स्वरूप’ क़रार दिया है. इस वायरस की सबसे पहले जानकारी 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में मिली. इससे संक्रमण के मामले बोत्स्वाना, बेल्जियम, हांगकांग और इज़रायल में भी मिले हैं.

भारत 15 दिसंबर से सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर से शुरू करेगा: नागर विमानन मंत्रालय

यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कोविड-19 वायरस के नए वैरिएंट के कारण एक बार फिर अनिश्चितता का सामना कर रही हैं. कुछ देशों ने यात्रा प्रतिबंध भी लगाने शुरू कर दिए हैं. भारत आने-जाने वाली सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कोविड-19 महामारी के कारण 23 मार्च, 2020 से ही बंद हैं. हालांकि, पिछले साल जुलाई से करीब 28 देशों के साथ हुए एयर बबल समझौते के तहत विशेष अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानें संचालित हो रही हैं.

दक्षिण अफ्रीका के डेमन गैलगट को ‘द प्रॉमिस’ के लिए मिला बुकर पुरस्कार

डेमन गैलगट का उपन्यास ‘द प्रॉमिस’ दक्षिण अफ्रीका के नस्लवादी इतिहास के बीच एक श्वेत परिवार की कहानी पर आधारित है. गैलगट इस पुरस्कार के दावेदारों की अंतिम सूची में तीसरी बार पहुंचे थे. इससे पहले उन्हें 2003 में ‘द गुड डॉक्टर’ और 2010 में ‘इन अ स्ट्रेंज रूम’ के लिए दावेदारों की अंतिम सूची में स्थान मिला था, लेकिन दोनों बार वह जीत नहीं पाए थे.

अमीर-ग़रीब देश का भेद मिटा कोविड टीकों का वितरण नैतिक रूप से ज़रूरी: दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा ने कहा ​है कि संपन्न देशों में लाखों लोगों का टीकाकरण हो चुका है, जबकि ग़रीब देशों में अरबों लोग टीके का इंतज़ार कर रहे हैं. महामारी के ख़ात्मे के लिए प्रभावी और समावेशी वैश्विक टीकाकरण बहुत ज़रूरी है. आप तब तक सुरक्षित रहने की उम्मीद नहीं कर सकते, जब तक कि हम सभी सुरक्षित न हों.

दक्षिण अफ्रीका ने सीरम इंस्टिट्यूट से 10 लाख कोविड वैक्सीन वापस लेने को कहा: रिपोर्ट

दक्षिण अफ्रीका ने एक छोटे क्लीनिकल ट्रायल के बाद अपना टीकाकरण अभियान रोक दिया, जिसमें पता चला कि यह देश में फैले नए कोरोना वायरस वैरिएंट के ख़िलाफ़ न्यूनतम सुरक्षा प्रदान करता है.

अमीर देश कोविड-19 टीके की जमाखोरी कर रहे हैं: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने विश्व आर्थिक मंच दावोस वार्ता में कहा कि दुनिया के अमीर देशों ने उत्पादकों से बड़ी मात्रा में टीके की खु़राक ले ली हैं और कुछ देशों ने तो अपनी जनसंख्या की ज़रूरत से चार गुना ज़्यादा मात्रा में टीके लिए हैं.

सीएए और एनआरसी देश के हर नागरिक के एहसास और आज़ादी का अपमान हैं

जिस नागरिकता क़ानून को गांधी जी और भारतीयों ने आज से 113 साल पहले विदेशी धरती पर नहीं माना, उस औपनिवेशिक सोच से निकले सीएए और एनआरसी को हम आज़ाद भारत में कैसे स्वीकार कर सकते हैं?

क्या गांधी नस्लवादी थे?

उम्र के दूसरे दशक में गांधी निस्संदेह एक नस्लवादी थे. वे सभ्यताओं के पदानुक्रम यानी ऊंच-नीच में यक़ीन करते थे, जिसमें यूरोपीय शीर्ष पर थे, भारतीय उनके नीचे और अफ्रीकी सबसे निचले स्थान पर. लेकिन उम्र के तीसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते उनकी टिप्पणियों में अफ्रीकियों के भारतीयों से हीन होने का भाव ख़त्म होता गया.

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब ज़ुमा ने दिया इस्तीफ़ा

उप राष्ट्रपति साइरिल रामाफोसा अंतरिम राष्ट्रपति तब तक के लिए बनेंगे जब तक नए राष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया संसदीय तरीके से पूरी नहीं हो जाती है.