Tiranga Yatra

आम नागरिकों का नफ़रत के ख़िलाफ़ खड़े होना आश्वस्त करता है कि घृणा हारेगी

देश में जहां एक तरफ नफ़रत के पैरोकार सांप्रदायिकता की खाई गहरी करने के फेर में हैं, वहीं उनकी भड़काने और उकसाने की तमाम कोशिशों के बावजूद आम देशवासी सांप्रदायिक आधार पर एक दूजे के खून के प्यासे नहीं हो रहे, बल्कि उनके मंसूबों को समझकर जीवन के नए समतल तलाशने की ओर बढ़ने लगे हैं.

जहांगीरपुरी में शांति की अपील करने के लिए हिंदू-मुसलमानों ने मिलकर तिरंगा यात्रा निकाली

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के दिन दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी. जिसके बाद इलाके में तनाव के माहौल के चलते कर्फ्यू लगा दिया गया था. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस तिरंगा यात्रा से इलाके में शांति बहाल करने में मदद मिलेगी.

क्या चंदन गुप्ता हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद का शिकार हुआ?

कासगंज में साल 2018 में मारे गए चंदन गुप्ता के पिता कह रहे हैं कि नौजवानों को उस रास्ते नहीं जाना चाहिए जिस पर हिंदुत्ववादी या राष्ट्रवादी उत्साह या उन्माद में उनका बेटा चल पड़ा था. क्या उनकी नाराज़गी की वजह यह है कि वे इस मौत के बाद या उसके बदले जो चाहते थे, वह नहीं मिला? या वे इसके ख़तरे को समझ पाए हैं?

2018 कासगंज ‘तिरंगा यात्रा’ में जान गंवाने वाले एबीवीपी नेता के परिवार ने कहा- सरकार ने निराश किया

साल 2018 में उत्तर प्रदेश के कासगंज में ‘तिरंगा यात्रा’ के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए युवक चंदन गुप्ता के परिजनों ने योगी सरकार पर झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि उनके परिवार में एक सरकारी नौकरी दी जाए और शहर के एक चौराहे का नाम चंदन के नाम पर रखा जाए.

आम आदमी पार्टी की तिरंगा यात्रा बहुसंख्यकवादी राष्ट्रवाद का ही नमूना है

आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके तिरंगे के रंग पक्के हैं. शुद्ध घी की तरह ही वह शुद्ध राष्ट्रवाद का कारोबार कर रही है. भारत और अभी उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को राष्ट्रवाद का असली स्वाद अगर चाहिए तो वे उसकी दुकान पर आएं. उसकी राष्ट्रवाद की दाल में हिंदूवाद की छौंक और सुशासन के बघार का वादा है.

यूपी: तिरंगा यात्रा निकालने पर सिसोदिया, संजय सिंह सहित आप के 17 नेताओं के ख़िलाफ़ केस दर्ज

आम आदमी पार्टी ने बीते 29 अगस्त को उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में तिरंगा यात्रा निकाली थी, जिसमें दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह समेत बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया था. कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के आरोप में पार्टी के 17 नेताओं सहित 500 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया है.

एएमयू को लेकर विवाद ज़रूर नया है पर षड्यंत्र वही पुराना है

इस समय इरादा मुसलमानों से जुड़ी हर जगह को संदिग्ध बनाने का है. उसका तरीक़ा है उन्हें विवादित बनाना. एक बार कुछ भी विवादित हो जाए तो उसमें दूसरा पक्ष जायज़ हो जाता है, जैसे बाबरी मस्जिद को विवादित बनाकर अब संघ के संगठन एक जायज़ पक्षकार बन बैठे हैं.

अपराधियों को मारना राम राज्य की शुरुआत: केशव प्रसाद मौर्य

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद बढ़े एनकाउंटरों पर उपमुख्यमंत्री का कहना है कि यूपी अकेला ऐसा राज्य है जहां क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर क़दम उठाए जा रहे हैं.

सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.

क्या तिरंगा यात्राएं शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनती जा रही हैं?

देश के झंडे को भी क्यों सांप्रदायिक आधार पर बांटा जा रहा है? क्या हम लड़ते-लड़ते इतने दूर आ गए हैं कि देश के झंडे का भी बंटवारा कर देंगे?

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने कहा, पूर्व नियोजित थी कासगंज हिंसा

कासगंज हिंसा के बाद क़स्बे के दौरे से लौटी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं.

कासगंज हिंसा: भड़काऊ मैसेज फैलाने पर वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन गिरफ़्तार

गणतंत्र दिवस पर कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद से ‘नक्षत्र कम्प्यूटर’ नाम के वॉट्सएप ग्रुप में भड़काऊ वीडियो और तस्वीरें पोस्ट की जा रही थीं.

अब तो अटल बिहारी जैसा कोई प्रधानमंत्री भी नहीं है, जो योगी को राजधर्म की याद दिलाए

कासगंज में जिन अल्पसंख्यकों ने तिरंगा फहराने के लिए सड़क पर कुर्सियां बिछा रखी थीं, वे अचानक वंदे मातरम् का विरोध और पाकिस्तान का समर्थन क्यों करने लगेंगे?

कासगंज में हालात तनावपूर्ण, हिंसा के पांचवें दिन बोले योगी- सख़्ती से निपटेंगे

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर मृतक चंदन गुप्ता की जगह कोई मोहम्मद इस्माईल होता तो मीडिया में अलग बहस होती.