क्या प्रधानमंत्री यह कह सकते हैं कि वो गोडसे की विचारधारा से सहमति नहीं रखते?

क्या हम एक राष्ट्र के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह उम्मीद कर सकते हैं कि वो गोडसे के विचारों की निंदा करेंगे. क्या मोदी और भाजपा यह कह सकेंगे कि वो गोडसे की विचारधारा से सहमति नहीं रखते.

गोडसे वाले बयान के लिए भाजपा प्रज्ञा ठाकुर को निष्कासित करने पर विचार करे: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, ‘यह बेहद निंदनीय है. हम ऐसी चीजों को बर्दाश्त नहीं करेंगे. बापू राष्ट्रपिता हैं और लोग पसंद नहीं करेंगे अगर कोई इस तरह से गोडसे के बारे में बात करता है.’

मोदी ने केदारनाथ की जिस गुफा में ध्यान लगाया, वो सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है

यहां पर बिजली, पीने के पानी की सुविधा और एक वॉशरूम भी है. गुफा का बाहरी हिस्सा पत्थरों से बना है और इसमें लकड़ी का दरवाजा है. गुफा में रहने वाले पर्यटक को दिन में दो बार नाश्ता, दोपहर का भोजन, रात का खाना और चाय भी दिया जाता है.

‘पिछले पांच सालों में ध्रुवीकरण ने कश्मीर मुद्दे की जटिलता को समझना और मुश्किल कर दिया है’

दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित और ऑस्कर के लिए नामित फिल्मकार अश्विन कुमार ने कहा कि कश्मीर दुनिया की कुछ ऐसी जगहों में से एक है, जहां सुंदरता और भय एक साथ मौजूद हैं.

तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से की शिकायत, कहा- मोदी की केदारनाथ यात्रा आचार संहिता का उल्लंघन है

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा को पिछले दो दिनों के दौरान लगातार कवर किया जा रहा है और इसका बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया में प्रसारण किया जा रहा है. यह आदर्श आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन है.

फिल्म केसरी का भगवा रंग

फिल्में जितने लोगों तक पहुंचती हैं, कोई इतिहास की किताब नहीं पहुंचती. तो केसरी के बाद सारागढ़ी के युद्ध की जो रूपरेखा इस फिल्म दिखाई गई है, वही सार्वजनिक कल्पना में इतिहास का स्थान ले लेगी.

भोजपुरी सिनेमा की दुनिया और सितारों की राजनीति

गोरखपुर से भाजपा प्रत्याशी और भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन ने कहा है कि वह गोरखपुर में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री बनाएंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि भोजपुरी फिल्में ठहराव के दौर से गुज़र रही हैं. भोजपुरी फिल्म उद्योग लगातार मंदा पड़ता जा रहा है और उसके अच्छे दिन चले गए हैं.

क्या बनारस में बुनकरों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का अच्छे दिन लाने का वादा जुमला साबित हुआ?

ग्राउंड रिपोर्ट: नरेंद्र मोदी ने बनारस में बुनकरों से जुड़े कई वादे किए थे लेकिन पांच साल बाद स्थानीय बुनकर अच्छे दिनों के नारे और वादे के बीच ख़ुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रधानमंत्री का दिखना ही अब प्रेस कॉन्फ्रेंस कहलाएगा

मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की. यह तथ्य है. यह भी एक तथ्य है कि मोदी से पूछने वाला प्रेस ही नहीं है. होता तो उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस की ज़रूरत नहीं होती. वह अपनी ख़बरों से मोदी को जवाब के लिए मजबूर कर देता.

चंदौली लोकसभा सीट: वाराणसी की इस पड़ोसन की तो दास्तान ही अलग

पिछले 21 वर्षों में चंदौली सीट के मतदाताओं ने किसी भी पार्टी या प्रत्याशी को लगातार दो बार नहीं चुना है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडे दोबारा जीत दर्ज कर अपनी प्रतिष्ठा बचा पाते हैं या नहीं.

व्यापमं पर भाजपा को घेरने वाली कांग्रेस ने घोटाले के एक संदिग्ध को उम्मीदवार क्यों बनाया?

एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी रैली में व्यापमं घोटाले की जांच कराने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर पार्टी ने इंदौर लोकसभा सीट से उन पंकज संघवी को प्रत्याशी बनाया है जिन पर घोटाले में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं.

पांच साल में पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए मोदी, लेकिन किसी सवाल का जवाब नहीं दिया

जब एक पत्रकार ने सीधे प्रधानमंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, ‘हम तो डिसिप्लिन्ड सोल्जर हैं. पार्टी अध्यक्ष हमारे लिए सब कुछ होते हैं.’ शाह ने भी कहा कि प्रधानमंत्री को सवालों का जवाब देने की ज़रूरत नहीं है.

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