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तमिलनाडु के किसान फिर से दिल्ली पहुंचे, पुलिस ने हिरासत में लिया

दिल्ली के जंतर मंतर पर 40 दिन के धरने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन स्थगित कर दिया था.

तमिलनाडु से दिल्ली पहुंचे किसानों को संसद मार्ग थाने में रखा गया है.

तमिलनाडु से दिल्ली पहुंचे किसानों को संसद मार्ग थाने में रखा गया है.

बीते मार्च-अप्रैल में 40 दिन तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे चुके किसान फिर से दिल्ली आ गए हैं. इस बार वे 100 सौ दिन का धरना प्रदर्शन करेंगे. आज 16 जुलाई की सुबह करीब 100 किसान तमिलनाडु से दिल्ली पहुंचे. जब वे प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इसके बाद से जंतर-मंतर जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने नहीं जाने दिया. सभी को संसद मार्ग थाने में रखा गया है.

किसानों को हिरासत में लेने के दौरान पुलिस अधिकारियों का कहना था कि ऊपर से आदेश आया है, इन्हें ट्रेन में बिठाकर वापस भेजना है, दिल्ली में नहीं रहने देना है. लेकिन किसानों का कहना है कि जब भी पुलिस उन्हें छोड़ेगी, सभी किसान जंतर मंतर पहुंच कर धरना प्रदर्शन की शुरुआत करेंगे.

40 दिन धरना देने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने किसानों को आश्वासन दिया था कि वे किसानों की समस्याएं दूर करेंगे. इसके बाद किसानों ने 25 मई तक के लिए धरना स्थगित कर दिया था. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में एक जून से दस जून तक चले किसान आंदोलन के दौरान चेन्नई में किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे थे.

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तमिलनाडु के किसानों की पिछले प्रदर्शन की तस्वीर

पिछले 40 दिवसीय धरने के दौरान इस आंदोलन की अगुआई कर रहे पी. अय्याकन्नू ने बताया था, ‘तमिलनाडु में पिछले 140 सालों में सबसे खराब सूखा पड़ा है. पिछले चार महीने में करीब 400 किसानों ने खुदकुशी कर ली है. उनकी फसलें बर्बाद हो गई थीं. सूखा राहत के नाम पर सरकार ने हमें तीन हजार रुपये दिए हैं. इतने में हमारा गुजारा कैसे चलेगा.’

उन्होंने बताया था, ‘हम यहां पर उन किसानों का कंकाल लेकर यहां दिल्ली आए हैं जिन्होंने पिछले दिनों आत्महत्या की है. हम यह दिखाना चाहते हैं कि केंद्र सरकार हमारी मदद करने में असफल रही है. हमारे हाथ में कटोरा है जो यह बताता है कि हम किसानों के पास अब कुछ नहीं बचा है.’

इन किसानों की मांग है कि किसानों के क़र्ज़ माफ़ किए जाएं. फ़सलों का उचित मूल्य दिया जाए. उन्हें सूखा राहत पैकेज दिया जाए और सिंचाई से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाए. 60 साल से अधिक उम्र वाले किसानों के लिए पेंशन की व्यवस्था हो.

पिछले धरने के दौरान किसानों ने ध्यान खींचने के लिए तरह तरह से प्रदर्शन किए. उन्होंने हाथ में कटोरा और कुछ मृत किसानों के कंकाल लेकर प्रदर्शन किए. पीएमओ के सामने नग्न होकर प्रदर्शन किया. ज़मीन पर खाना रखकर खाया. चूहे, सांप और घास खाकर और मानव मूत्र पीकर अपना विरोध जताया था.

गौरतलब है कि क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, 1995 से लेकर अब तक पूरे देश में क़र्ज़, सूखा, ग़रीबी और भुखमरी के चलते पूरे देश में तीन लाख से ज़्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. जून महीने में अकेले मध्य प्रदेश में 50 से ज्यादा किसानों ने कर्ज जैसी परेशानी के चलते आत्महत्या कर ली.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के मंदसौर से शुरु हुई किसान मुक्ति यात्रा कल यानी 18 जुलाई को दिल्ली पहुंचेगी. यह यात्रा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी.

हाल में किसानों की आत्महत्या की दर बढ़ने, किसानों पर कर्ज बढ़ने, खेती में लागत न निकलने और अन्य कृषि संकट के चलते किसानों में गुस्सा है. यह गुस्सा जगह जगह आंदोलन के रूप में सामने आ रहा है.