राजस्थान सरकार द्वारा संचालित कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जेके लोन अस्पताल में 11 मई को सीज़ेरियन प्रसव के बाद हुई जटिलताओं के चलते एक और महिला की मौत हो गई. इसके साथ ही पिछले एक सप्ताह में ज़िले में ऐसी मौतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है. बताया गया है कि शहर के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद इलाज करा रही छह अन्य महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराधों में दोषी क़ैदियों को पैरोल दिए जाने की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आयोग जल्द ही केंद्र सरकार को अपनी सिफ़ारिशें सौंपेगा, जिनमें महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराधों में दोषियों के लिए पैरोल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है.
एनसीआरबी द्वारा जारी 'भारत के कारागार आंकड़े-2024' के अनुसार, दिल्ली की जेलों में ऑक्यूपेंसी रेट 194.6 प्रतिशत था, जो देशभर में सबसे ज़्यादा था. हालांकि 2023 में दर्ज 200 प्रतिशत के ऑक्यूपेंसी रेट से इसमें थोड़ा सुधार हुआ है, फिर भी यह इस सूची में सबसे ऊपर है.
वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध देश के 19 बड़े शहरों में सबसे ज़्यादा रहे. यहां कुल 13,396 मामले दर्ज किए गए. दिल्ली में बलात्कार के मामलों की संख्या सबसे अधिक है और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसक अपराधों में भी इसकी हिस्सेदारी ज्यादा है.
1947 में भारत से पाकिस्तान का अलग होना सिर्फ़ ज़मीन के लिए लड़ी गई लड़ाई नहीं थी, यह औरतों के शरीर और समुदाय की 'इज़्ज़त' के लिए भी उतनी ही बड़ी लड़ाई थी. यह टकराव आज भी दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के बीच जारी है. इस स्त्री-द्वेषी दृष्टि की वजह से महिलाओं को आज भी यह चुनने की आज़ादी नहीं है कि वे किससे दोस्ती करें, किससे प्रेम या किसके साथ संबंध बनाएं और किससे शादी करें.
बीते सप्ताह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर बिहारी पहचान को लेकर एक 22 वर्षीय डिलीवरी बॉय पांडव कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी. बीते कुछ बरसों में भारत में धर्म और जाति के आधार पर हो रही हिंसा सामान्य हो चली है. इसमें क्षेत्रीय भेदभाव आधारित हिंसा की ख़बरें भी आती रही हैं, हालांकि बिहारी प्रवासी इस हिंसा के निशाने पर दशकों से रहे हैं.
घटना बरेली ज़िले की है, जहां आलमपुर जाफराबाद ब्लॉक की सरदार नगर ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत डेढ़ साल पहले बनी ओवरहेड पानी की टंकी गिरने से सात लोग घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है. ग्रामीणों का आरोप है कि यह टैंक ख़राब सामग्री का इस्तेमाल कर बनाया गया था.
बीते कुछ समय में ओडिशा हाईकोर्ट समेत राज्य की कुछ अदालतों ने आदिवासी और दलित समुदायों के लोगों को ज़मानत की शर्त के बतौर पुलिस थानों की सफाई करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने इन शर्तों की प्रकृति को क्रूर और निंदनीय बताते हुए कहा कि ऐसे आदेश मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं. साथ ही यह प्रवृत्ति हाशिये पर पड़े समुदायों के ख़िलाफ़ न्यायपालिका में मौजूद जातिगत पक्षपात को उजागर करती है.
आजकल हमारे समाज में क्षणिक पागलपन- किसी मामूली बात पर चाकू घोंप देना, गोली चला देने जैसी अभागी घटनाओं की बारंबारता इतनी बढ़ गई है कि अख़बारों में इन्हें सरसरी तौर पर पढ़कर परे सरका दिया जाता है. दूसरा सवाल यह कि अगर यह पागलपन है तो हमेशा कमज़ोरों के विरुद्ध ही क्यों अभिव्यक्त होता है?
मज़दूरों के पास निश्चित काम के घंटे, छुट्टियां, या सामाजिक सुरक्षा (जैसे पेंशन, बीमा) की कमी है. अधिकांश असंगठित मज़दूरों की आय बहुत कम है. नौकरी की असुरक्षा और जोखिम भरे माहौल में काम करने को मजबूर मज़दूर अक्सर भुखमरी या गरीबी के कगार पर रहते हैं. विकास कार्यों में अहम भूमिका निभाने के बावजूद, उन्हें उन सुख-सुविधाओं से दूर रखा जाता है, जो वे ख़ुद बनाते हैं.
ग्रामीण भारत की महिलाएं मनरेगा के तहत काम करते हुए अपने हक़ की मज़दूरी के लिए संगठित संघर्ष कर रही हैं. लेकिन अब उनकी लड़ाई सिर्फ सिस्टम से नहीं, बल्कि तकनीक से भी है. एनएमएमएस ऐप जैसी तकनीकी बाधाएं उनके काम, हाजिरी और मज़दूरी, तीनों को अनिश्चित बना रहे हैं.
सफलता के इस नशे, जो अपने चरम पर है, में कुछ माओवादियों और ज़्यादातर पुलिस बलों के द्वारा पिछले बीस सालों में की गई हज़ारों हत्याओं के लिए किसी को भी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है. सलवा जुडूम के कारण औरतों का बलात्कार हुआ, सौ से भी ज़्यादा गांवों को आग लगा दिया गया और बस्तर में हज़ारों की संख्या में लोग विस्थापित हुए. लेकिन 'सफलता' के शोर में इन घटनाओं पर उठाए गए सवाल अनसुने कर दिए जा
अदालत ने एक पिता द्वारा उनकी बालिग बेटी के 'अपहरण' और विवाह के लिए मजबूर करने संबंधी एफआईआर रद्द करते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति बालिग हो जाता है तो किसी को भी यह बताने का अधिकार नहीं है कि वह किसके साथ रहेगा, किससे शादी करेगा या अपना जीवन कैसे बिताएगा. कोर्ट ने पुलिस द्वारा सहमति से हुए विवाहों को लेकर एफआईआर दर्ज कर 'चिंताजनक प्रवृत्ति' पर डीजीपी को सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
हम जितनी चर्चा नेताओं के भ्रष्टाचार की करते हैं, सिविल सेवकों के भ्रष्टाचार की नहीं करते, जबकि जहां तक सरकारी योजनाओं में आर्थिक भ्रष्टाचार की बात है, नेता उसे तब तक अंजाम नहीं दे सकते, जब तक उसमें किसी सिविल सेवक को न शामिल करें. सिविल सेवकों के काम की जगहें अभी भी उनके रौब-दाब और अधिकारों के दुरुपयोग की जगहें ही बनी हुई हैं.
नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को लेकर वकीलों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने यूपी पुलिस पर दमन, अवैध हिरासत और ‘दुष्प्रचार’ के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि मजदूरों के वैध आंदोलन को ‘साजिश’ बताकर बदनाम किया जा रहा है, जबकि पुलिस की कार्रवाई कानून और प्रक्रिया के खिलाफ है.