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क्रूज़ ड्रग्स मामला: रिश्वत मामले में एनसीबी ने अपने अधिकारी समीर वानखेड़े की जांच शुरू की

मुंबई क्रूज़ ड्रग्स मामले में स्वतंत्र गवाह प्रभाकर सैल ने दावा किया हैं कि अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन ख़ान को छोड़ने के लिए एनसीबी की मुंबई क्षेत्रीय इकाई के निदेशक समीर वानखेड़े और कुछ अधिकारियों द्वारा 25 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. एनसीबी और समीर वानखेड़े ने इन आरोपों के ख़िलाफ़ अदालत का रुख़ किया है.

एनसीबी के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली/मुंबई: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने क्रूज़ जहाज से मादक पदार्थ बरामदगी मामले में आरोपी अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को छोड़ने के लिए एनसीबी की मुंबई क्षेत्रीय इकाई के निदेशक समीर वानखेड़े और कुछ अधिकारियों द्वारा 25 करोड़ रुपये मांगने संबंधी एक गवाह के दावे पर सतर्कता जांच के आदेश दिए हैं.

शहर स्थित मुख्यालय में एनसीबी के उत्तरी क्षेत्र के उप महानिदेशक (डीडीजी) ज्ञानेश्वर सिंह यह जांच करेंगे. सिंह, संघीय मादक पदार्थ रोधी एजेंसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) भी हैं.

मामले में ‘स्वतंत्र गवाह’ प्रभाकर सैल ने रविवार को एक हलफनामे में और फिर पत्रकारों के सामने दावा किया था कि आर्यन खान को तीन अक्टूबर को एनसीबी कार्यालय लाने के बाद उन्होंने गोसावी को फोन पर सैम डिसूजा नामक एक व्यक्ति से 25 करोड़ रुपये की मांग करने और मामला 18 करोड़ रुपये पर तय करने के बारे में बात करते हुए सुना था, क्योंकि उन्हें ‘आठ करोड़ रुपये समीर वानखेड़े (एनसीबी के जोनल निदेशक) को देने थे.’

सैल ने दावा किया था कि वह जल्द ही सबूत भी पेश करेंगे.

सैल ने कहा कि वह मामले में अन्य गवाह केपी गोसावी के अंगरक्षक थे, जो एनसीबी द्वारा तीन अक्टूबर को मुंबई के तट पर एक जहाज पर की छापेमारी के बाद से फरार है.

प्राइवेट जासूस गोसावी क्रूज़ जहाज पर छापेमारी करने वाले एनसीबी अधिकारियों के साथ था.

एनसीबी ने तीन अक्टूबर को मुंबई के तट के पास, गोवा जा रहे एक क्रूज़ पोत पर छापेमारी के बाद शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया था. एजेंसी ने क्रूज़ से मादक पदार्थ जब्त करने का दावा किया है.

मामले में अभी तक आर्यन खान सहित करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

सैल ने यह भी दावा किया था कि उसने गोसावी को शाहरुख खान की प्रबंधक से मुलाकात करते हुए भी देखा था और वानखेड़े की मौजूदगी में एनसीबी अधिकारियों ने उनसे नौ से 10 कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करने को भी कहा था.

एजेंसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा, ‘हमें हलफनामा तथा मुंबई स्थित हमारे डीडीजी (पूर्व-पश्चिम) की रिपोर्ट मिल गई है और एनसीबी के महानिदेशक ने इस रिपोर्ट का संज्ञान लिया है. हम एक पेशेवर संगठन हैं और हम अपने कर्मचारियों के खिलाफ किसी भी आरोप की जांच को तैयार हैं. जांच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होगी.’

वानखेड़े के क्रूज़ जहाज मादक पदार्थ मामले की जांच जारी रखने के सवाल पर सिंह ने कहा कि इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी और ‘हम जांच और उससे संबंधित सबूतों के मिलने पर ही कोई फैसला करेंगे.’’

अधिकारियों ने कहा कि एनसीबी, सैल द्वारा किए गए दावों के सभी पहलुओं पर गौर करेगी और वर्ष 2008 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी समीर वानखेड़े तथा मादक पदार्थ मामले में शामिल मुंबई क्षेत्रीय इकाई के अन्य अधिकारियों के बयान भी दर्ज करेगी. जांच दल सैल से भी पूछताछ कर सकता है.

ज्ञानेश्वर सिंह की अगुवाई में तीन सदस्यीय दल ‘साक्ष्यों को दर्ज करने और प्रतिवेदन लेने के लिए’ मुंबई जा सकता है. जांच की रिपोर्ट एनसीबी के महानिदेशक को सौंपी जाएगी और निष्कर्षों के आधार पर वह आगे की कार्रवाई कर सकते हैं.

वानखेड़े ने मामले में अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को खारिज किया है.

वानखेड़े ने रविवार को मुंबई पुलिस आयुक्त को पत्र लिख, अज्ञात लोगों द्वारा कथित सतर्कता संबंधी मामले में फंसाने के लिये उनके खिलाफ ‘योजनाबद्ध’ कानूनी कार्रवाई किए जाने से संरक्षण की भी मांग की थी.

वर्ष 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी वानखेड़े ने किसी का नाम लिए बिना दावा किया था कि अत्यधिक सम्मानित सार्वजनिक लोगों ने उन्हें मीडिया के माध्यम से जेल भेजने और बर्खास्तगी की धमकी दी है.

एनसीबी और समीर वानखेड़े ने जबरन वसूली के आरोपों के खिलाफ किया अदालत का रुख

एनसीबी और उसके क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े क्रूज़ जहाज से मादक पदार्थ मामले में उनके खिलाफ लगे वसूली के आरोपों में सोमवार को महानगर की एक विशेष अदालत पहुंच गए. एनसीबी और वानखेड़े ने अदालत में हलफनामे दाखिल किए हैं.

वानखेड़े ने हलफनामे में कहा, ‘क्रूज़ मादक पदार्थ मामले की जांच की अगुवाई करने के बाद से, कई जाने-माने राजनेता मुझे निजी तौर पर निशाना बना रह हैं, ऐसा करने का उचित कारण तो उन्हें ही पता होगा.’

वानखेड़े ने यह भी दावा किया कि उन्हें कुछ जाने-माने राजनीतिक हस्तियों ने भी निशाना बनाया है और इसके पीछे उनका केवल एक ही कारण समझ आता है, क्योंकि एनसीबी ने ‘इस शख्स के दामाद समीर खान’ को गिरफ्तार किया था.

समीर खान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता एवं महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक के दामाद हैं.

वहीं, एनसीबी ने हलफनामे में अनुरोध किया है कि मामले के सबूतों के साथ छेड़छाड़ और जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए.

एनसीबी और वानखेड़े ने सोमवार को अदालत को सौंपे गए अपने हलफनामे में आरोपों को खारिज किया है.

वानखेड़े ने दावा किया कि उनके और उनके परिवार से व्यक्तिगत बदला लिया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘उन पर लगातार गिरफ्तारी का खतरा बना हुआ है, क्योंकि ईमानदार एवं निष्पक्ष जांच कुछ निर्हित स्वार्थों के अनुकूल नहीं है.’

वानखेड़े ने कहा कि वह खुद को बेकसूर साबित करने के लिए जांच का सामना करने को तैयार हैं.

उन्होंने कहा, ‘इस मामले में समाज के उच्च वर्ग के कुछ प्रभावशाली और सम्पन्न लोग शामिल हैं, जिस कारण मुझे गिरफ्तारी सहित हर प्रकार की धमकी दी जा रही है.’

एनसीबी ने हलफनामे में वानखेड़े और अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों को ‘पूरी तरह गलत, गुमराह करने वाला, नुकसान पहुंचाने वाला और एनसीबी जैसी स्वतंत्र एजेंसी की छवि खराब करने का प्रयास बताया.’

उसने कहा, ‘एनसीबी के अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली और धन के हस्तांतरण के आरोप चल रही जांच को कमजोर करने, दुर्भावनापूर्ण तथा गुप्त मकसद से दबाव बनाने का एक स्पष्ट प्रयास है.’

एनसीबी ने कहा कि वानखेड़े तथा उसके अन्य अधिकारियों का रिकॉर्ड एकदम साफ है और वे शहर को मादक पदार्थों से मुक्त करने के लिए ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा से काम कर रहे हैं.

एनसीबी के लिए विशेष लोक अभियोजक अद्वैत सेठना ने सोमवार को अदालत में हलफनामा दाखिल किया.

सेठना ने अदालत से कहा कि सैल कुछ सबूतों को सार्वजनिक करने की धमकी दे रहा है, जो मामले की जांच को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए उचित आदेश पारित किया जाना चाहिए.

सेठना की दलील सुनने और हलफनामे पर गौर करने के बाद अदालत ने कहा कि वह दिन में मामले पर उचित आदेश पारित करेगी.

आर्यन अभी मुंबई की आर्थर जेल में बंद है. उनकी जमानत याचिका पर बॉम्बे उच्च न्यायालय मंगलवार को सुनवाई करेगा.